Ashtanga Hridayam PDF in Hindi

Ashtanga Hridayam Hindi PDF Download

Ashtanga Hridayam Hindi PDF Download for free using the direct download link given at the bottom of this article.

Ashtanga Hridayam PDF Details
Ashtanga Hridayam
PDF Name Ashtanga Hridayam PDF
No. of Pages 387
PDF Size 17.26 MB
Language Hindi
CategoryReligion & Spirituality
Source pdffile.co.in
Download LinkAvailable ✔
Downloads17

Ashtanga Hridayam Hindi

नमस्कार मित्रों, आज इस लेख के माध्यम से हम आप सभी को Ashtanga Hridayam PDF in Hindi प्रदान करने जा रहे हैं। अष्टांग हृदयम एक दिव्य और प्रभावशाली ग्रंथ है। इस ग्रंथ में समस्त रोगों की चिकित्सा, पंचकर्म के लिए औषधि का वर्णन, पंचकर्म विधि, हानियों एवं लाभ, उपचार आदि का विधिवत वर्णन है। अष्टाङ्ग हृदयम् (Ashtanga Hridayam) वाग्भट के द्वारा लिखा गया एक आयुर्वेद ग्रंथ है।

इसमें औषधि और शल्यचिकित्सा दोनों का सम्मिलित वर्णन है, यह ग्रंथ स्वास्थ्य के आधार पर है कि किसी भी मनुष्य को किस तरह से खाना पीना, रहना सहना चाहिए आदि! वैसे तो इस ग्रंथ को कब रचा गया इसका कोई प्रमाण नहीं मिला है, लेकिन अनुमानत: माना जाता है कि इस ग्रन्थ का रचनाकाल ५०० ईसापूर्व से लेकर २०० ईसापूर्व तक है! इस ग्रंथ को पढ़ने से प्रत्येक व्यक्ति को बहुत अधिक लाभ मिलेगा।

Ashtanga Hridayam Book PDF in Hindi / अष्टांग हृदयम पुस्तक हिंदी पीडीऍफ़ – Highlights

Particulars(विवरण)  eBook Details (Size, Writer, Lang. Pages(आकार, लेखक, भाषा,पृष्ठ की जानकारी)
पुस्तक का नाम / Name of Book  अष्टांगहृदयम् आयुर्वेद ग्रंथ | Ashtanga Hridayam Ayurveda Granth
 पुस्तक का लेखक / Name of Author महर्षि वाग्भट्ट / Maharishi Vagbhata
 पुस्तक की भाषा / Language of Book  हिंदी / Hindi
 पुस्तक का आकार / Size of Book   73 MB
  कुल पृष्ठ / Total Pages   387
 पुस्तक की श्रेणी / Category of Book स्वास्थ्य / Health,आयुर्वेद / Ayurveda

Ashtanga Hridayam Ayurveda Granth Hindi PDF / अष्टांगहृदयम् आयुर्वेद ग्रंथ हिंदी पीडीएफ

वाग्भट ने अपने इस ग्रंथ में आयुर्वेद के सम्पूर्ण विषय- शल्यचिकित्सा, कार्यचिकित्सा एवं पूरे शरीर के आठों अंगों का विस्तृत वर्णन किया है। उन्होंने अपने इस ग्रन्थ को शरीर स्वास्थ्य का हृदय से संबोधित किया है। वाग्भट्ट का इस ग्रंथ में निदानस्थान, चिकित्सास्थान, शारीरस्थान, कल्पस्थान तथा उत्तरस्थान में सम्पूर्ण रोगों का निदान, लक्षणों, रोग के भेद आदि सम्बधित विषयों का विस्तृत वर्णन है।

गर्भ एवं शरीर सम्बधित विषय का विस्तृत वर्णन है कि गर्भ अवस्था में एक स्त्री को क्या खाना चाहिए, कैसे रहना चाहिए और किस तरह से होने बाले बच्चे पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ेगा आदि का भी विशेष रूप से वर्णन किया गया है। बालकों में ग्रह विकार, स्त्री ग्रह विकार, स्त्री रोग, बाल रोग, भूत विद्या एवं मानसिक रोग का आदि का भी विस्तृत वर्णन है।

अष्टांगहृदयम में कुल 7120 श्लोक, 120 अध्याय एवं 6 खण्ड हैं! अष्टांगहृदयम के छः खण्डों के नाम इस प्रकार हैं-

  1. चिकित्सास्थान (२२ अध्याय)
  2. सूत्रस्थान (३० अध्याय)
  3. शारीरस्थान (६ अध्याय)
  4. निदानस्थान (१६ अध्याय)
  5. कल्पस्थान (६ अध्याय)
  6. उत्तरस्थान (४० अध्याय)

वाग्भट कौन है?

वाग्भट एक प्रसिद्ध ग्रंथ रचनाकार हैं ,जो अष्टांगहृदय तथा अष्टांगसंग्रह जैसे पवित्र ग्रंथ के रचनाकार हैं। इनका जन्म सिंधु देश में हुआ था,  ऐसा अष्टांगसंग्रह में दर्शाया गया है। वाग्भट के पिता का नाम सिद्धगुप्त था। ये बौद्ध धर्म को मानने वाले थे, ऐसा ग्रंथ में दर्शाया गया है एवं इनके गुरु का नाम अवलोकितेश्वर है।

अष्टांगहृदयम क्यों पढ़ना चाहिए?

जैसे कि हम पहले भी बता चुके हैं की अष्टांगहृदयम एक चिकित्सा ग्रंथ है, इस ग्रंथ में आप लोगों को शरीर के बारे में पूरी जानकारी आसानी से मिल जाएगी की किस तरह से खाना खाना चाहिए ,किस तरह से रहना चाहिए इत्यादि!

नीचे दिये गए लिंक के माध्यम से आप Ashtanga Hridayam in Hindi PDF को आसानी से डाउनलोड कर सकते हैं।


Ashtanga Hridayam PDF Download Link