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भानु सप्तमी व्रत कथा | Bhanu Saptami Vrat Katha PDF in Hindi

भानु सप्तमी व्रत कथा | Bhanu Saptami Vrat Katha Hindi PDF Download

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भानु सप्तमी व्रत कथा | Bhanu Saptami Vrat Katha PDF Details
भानु सप्तमी व्रत कथा | Bhanu Saptami Vrat Katha
PDF Name भानु सप्तमी व्रत कथा | Bhanu Saptami Vrat Katha PDF
No. of Pages 3
PDF Size 0.62 MB
Language Hindi
CategoryEnglish
Source pdffile.co.in
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Tags: If भानु सप्तमी व्रत कथा | Bhanu Saptami Vrat Katha is a illigal, abusive or copyright material Report a Violation. We will not be providing its PDF or any source for downloading at any cost.

भानु सप्तमी व्रत कथा | Bhanu Saptami Vrat Katha Hindi

नस्म्कार पाठकों इस लेख के माध्यम से आप भानु सप्तमी व्रत कथा PDF / Bhanu Saptami Vrat Katha PDF प्राप्त कर सकते हैं। भानु सप्तमी व्रत सूर्यदेव के निमित्त किया जाता है। यह कथा सूर्यदेव को समर्पित एक अत्यधिक महिमामयी कथा है। सूर्यदेव का विधिवत पूजन करने से व्यक्ति को स्वास्थ्य एवं आरोग्य की प्राप्ति होती है।

वैदिक ज्योतिष में भी सूर्यदेव का अत्यधिक विशिष्ट स्थान माना जाता है। श्री सूर्यदेव के पूजन के प्रभाव से व्यक्ति के जीवन में आने वाले विभिन्न प्रकार के कष्टों से मुक्ति तो मिलती है। यदि आप भी सूर्यदेव की विशेष कृपा प्राप्त करना चाहते हैं तो भानु सप्तमी के दिन सूर्यदेव का व्रत पालन अवश्य करें।

भानु सप्तमी व्रत कथा / Bhanu Saptami Vrat Katha PDF

प्राचीन काल में इंदुमती नाम की एक वैश्या  थी  एक बार उसने ऋषि वशिष्ठ से पूछा कि, ‘मुनिराज मैंने आज तक कोई भी धार्मिक काम नहीं किया है लेकिन मेरी इच्छा है कि मैं मृत्यु के बाद मुझे मोक्ष प्राप्त हो तो यह कैसे प्राप्त हो सकता है ?’

इंदुमती की इस बात को सुनकर वशिष्ठ जी ने जवाब दिया कि महिलाओं को मुक्ति, सौभाग्य, और सौंदर्य देने वाला अचला सप्तमी या भानु सप्तमी से बढ़कर कोई व्रत नहीं होता है इस दिन जो कोई भी स्त्री सच्चे मन से पूजा करती है और व्रत रखती है उसे मनचाहा फल प्राप्त होता है, इसलिए तुमको भी अगर मोक्ष की चाह है तो तुम्हें इस दिन व्रत करना चाहिए और विधि पूर्वक पूजन इत्यादि करना चाहिए, जिससे तुम्हारा कल्याण हो जाएगा ।

वशिष्ठ जी की बात सुनकर इंदुमती ने इस व्रत का पालन किया और मृत्यु के पश्चात उसे स्वर्ग की प्राप्ति हुई स्वर्ग में उन्हें अप्सराओं की नायिका बनाया गया इसी मान्यता के आधार पर इस व्रत का विशेष महत्व माना जाता है।

भानु सप्तमी व्रत विधि / Bhanu Saptami Vrat Vidhi

  • इस दिन व्रती को  प्रात:काल स्नान करना चाहिए स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें अब पूजा स्थान पर पूर्व या उत्तर दिशा में मुख करके बैठ जाएं ।
  • इसके बाद सूर्य देव का लाल चंदन, अक्षत्, लाल फूल, धूप, गंध आदि से विधिपूर्वक पूजा करें इसके पश्चात कपूर या गाय के घी वाले दीपक से आरती करें ।
  • अब तांबे के स्वच्छ पात्र में गंगाजल मिश्रित जल लें, उसमें अक्षत्, लाल फूल और लाल चंदन शामिल कर लें ।
  • इसके बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें और इस दौरान ‘ओम सूर्याय नमः’ मंत्र का जाप करें भानु सप्तमी के दिन हो सके तो, भोजन में नमक का इस्तेमाल न करें ।
  • जिन लोगों को एकाग्रता और यादाश्त की समस्या है, उनको आज के दिन सूर्य देव को जल अर्पित करना चाहिए इससे आपको अवश्य ही लाभ होगा ।

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