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भए प्रगट कृपाला दीनदयाला जसुमति हितकारी PDF

भए प्रगट कृपाला दीनदयाला जसुमति हितकारी PDF Download

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भए प्रगट कृपाला दीनदयाला जसुमति हितकारी PDF Details
भए प्रगट कृपाला दीनदयाला जसुमति हितकारी
PDF Name भए प्रगट कृपाला दीनदयाला जसुमति हितकारी PDF
No. of Pages 4
PDF Size 0.91 MB
Language English
CategoryEnglish
Source pdffile.co.in
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भए प्रगट कृपाला दीनदयाला जसुमति हितकारी

नमस्कार मित्रों, आज इस लेख के माध्यम से हम आप सभी को भए प्रगट कृपाला दीनदयाला जसुमति हितकारी PDF प्रदान करने जा रहे। हिंदू धर्म के अनुसार भगवान श्रीराम का जन्म चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी के दिन हुआ था। हमारे देश में इस दिन भगवान श्री राम के जन्म उत्सव को बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है, कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम की पूजा – अर्चना करने से सभी विघ्न-बाधाएं दूर होने के साथ-साथ मन भी शांत होता है।

स्कंद पुराण में वर्णित एक कथा के अनुसार बिना आरती व व्रत कथा के राम नवमी की पूजा को संपूर्ण नहीं माना जाता। इसलिए राम नवमी पर व्रत कथा का पाठ करने के बाद भगवान राम की आरती अवश्य करनी चाहिए। कहा जाता है कि राजा राम चंद्र भगवान की आरती सुनने मात्र से सभी समस्याओं का समाधान हो जाता है। तो दोस्तों, अगर आप भी प्रभु श्री राम जी की विशेष कृपा प्राप्त करना चाहते हैं तो इस सुंदर स्तुति का गायन नियमित रूप से अवश्य करें।

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भये प्रगट कृपाला दीन दयाला ,यशुमति के हितकारी ।

हर्षित महतारी रूप निहारी,मोहन मदन मुरारी ॥ १॥

कंसासुर जाना अति भय माना ,पुतना बेगि पठाई ।

सो मन मुसुकाई हर्षित धाई ,गई जहाँ जदुराई ॥ २॥

तेहि जाइ उठाई ह्रदय लगाई,पयोधर मुख में दीन्हें ।

तब कृष्ण कन्हाई मन मुसुकाई ,प्राण तासु हरि लीन्हें ॥ ३॥

जब इन्द्र रिसाये मेघ बुलाये ,वशीकरण ब्रज सारी ।

गौवन हितकारी मुनि मन हारी,नखपर गिरिवर धारी ॥ ४॥

कंसासुर मारे अति हंकारे,वत्सासुर संहारे ।

बक्कासुर आयो बहुत डरायो,ताकर बदन बिडारे ॥ ५॥

अति दीन जानि प्रभु चक्रपाणी,ताहि दीन निज लोका ।

ब्रह्मासुर राई अति सुख पाई ,मगन हुये गये शोका ॥ ६॥

यह छन्द अनूपा है रस रूपा,जो नर याको गावै ।

तेहि सम नहिं कोई त्रिभुवन माँहीं ,मन-वांछित फल पावै ॥ ७॥

दोहा -नन्द यशोदा तप   कियो,मोहन सो मन लाय ।

तासों हरि तिन्ह सुख दियो ,बाल भाव दिखलाय ॥

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