भीमरूपी महारुद्र PDF | Bhimrupi Maharudra Sanskrit PDF

भीमरूपी महारुद्र PDF | Bhimrupi Maharudra Sanskrit PDF Download

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भीमरूपी महारुद्र PDF | Bhimrupi Maharudra Sanskrit PDF Details
भीमरूपी महारुद्र PDF | Bhimrupi Maharudra Sanskrit
PDF Name भीमरूपी महारुद्र PDF | Bhimrupi Maharudra Sanskrit PDF
No. of Pages 6
PDF Size 1.05 MB
Language English
CategoryReligion & Spirituality
Source pdffile.co.in
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भीमरूपी महारुद्र PDF | Bhimrupi Maharudra Sanskrit

नमस्कार मित्रों, आज इस लेख के माध्यम से हम आप सभी के लिए भीमरूपी महारुद्र PDF / Bhimrupi Maharudra Sanskrit PDF प्रदान करने जा रहे हैं। भीमरूपी महारुद्र एक बहुत ही चमत्कारी एवं अद्भुत स्तोत्र है। सनातन हिंदू धर्म में भीमरूपी महारुद्र स्तोत्र को सबसे महत्वपूर्ण स्तोत्रों में से एक माना जाता है। यह दिव्य स्तोत्र प्रभु श्री राम के अनन्य भक्त हनुमान जी को समर्पित है। यह स्तोत्र हनुमान जी के रुद्र रूप को समर्पित है।

इस स्तोत्र का पाठ करने से न केवल हनुमान जी कि वरन प्रभु श्री राम जी की भी विशेष कृपा प्राप्त होती है। क्योंकि भगवान हनुमान जी प्रभु श्री राम के सबसे प्रिय भक्त माने जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि जो भी भक्त भीमरूपी महारुद्र स्तोत्र का नित्या-प्रतिदिन जाप पूरे भक्ति-भाव से करता है, वह तत्काल ही हर प्रकार के संकटों से मुक्त हो जाता है। मारुति नाम भगवान हनुमान जी के अनेकों नाम में से ही एक दिव्य नाम नामा जाता है। इसीलिए भीमरूपी महारुद्र स्तोत्र को भीमरूपी महारुद्र मारुती स्तोत्र के नाम से भी जाना जाता है।

इतिहासकारों के मत के अनुसार 17वीं शताब्दी में मारुति स्तोत्र की रचना हुई थी। इसके रचना समर्थ गुरु रामदास ने की है। तो मित्रों अगर आप भी हनुमान जी के रुद्र रूप का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं तो प्रतिदिन भीमरूपी महारुद्र स्तोत्र का पाठ श्रद्धापूर्वक अवश्य करें। यदि आप किसी कारणवश प्रतिदिन इसका पाठ करने में असमर्थ हैं तो केवल मंगलवार और शनिवार को भी आप इस स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं।

भीमरूपी महारुद्रा स्तोत्र PDF / Bhimrupi Maharudra Stotra Lyrics in Sanskrit PDF

भीमरूपी महारुद्रा, वज्र हनुमान मारुती।

वनारी अंजनीसूता, रामदूता प्रभंजना ।।1।।

महाबळी प्राणदाता, सकळां उठवीं बळें ।

सौख्यकारी शोकहर्ता, धूर्त वैष्णव गायका ।।2।।

दिनानाथा हरीरूपा, सुंदरा जगदंतरा।

पाताळ देवता हंता, भव्य सिंदूर लेपना ।।3।।

लोकनाथा जगन्नाथा, प्राणनाथा पुरातना ।

पुण्यवंता पुण्यशीला, पावना परतोषका ।।4।।

ध्वजांगे उचली बाहू, आवेशें लोटिला पुढें ।

काळाग्नी काळरुद्राग्नी, देखतां कांपती भयें ।।5।।

ब्रह्मांड माईला नेणों, आवळें दंतपंगती।

नेत्राग्नी चालिल्या ज्वाळा, भृकुटी त्राहिटिल्या बळें ।।6।।

पुच्छ तें मुरडिलें माथां, किरीटी कुंडलें बरीं।

सुवर्णकटीकासोटी, घंटा किंकिणी नागरा ।।7।।

ठकारे पर्वताऐसा, नेटका सडपातळू।

चपळांग पाहतां मोठें, महाविद्युल्लतेपरी ।।8।।

कोटिच्या कोटि उड्डाणें, झेपावे उत्तरेकडे ।

मंद्राद्रीसारिखा द्रोणू, क्रोधे उत्पाटिला बळें ।।9।।

आणिता मागुता नेला, गेला आला मनोगती ।

मनासी टाकिलें मागें, गतीस तूळणा नसे ।।10।।

अणूपासोनि ब्रह्मांडा, येवढा होत जातसे।

तयासी तुळणा कोठें, मेरुमंदार धाकुटें ।।11।।

ब्रह्मांडाभोंवते वेढे, वज्रपुच्छ घालूं शके।

तयासि तूळणा कैचीं, ब्रह्मांडीं पाहतां नसे ।।12।।

आरक्त देखिलें डोळां, गिळीलें सूर्यमंडळा ।

वाढतां वाढतां वाढे, भेदिलें शून्यमंडळा ।।13।।

धनधान्यपशुवृद्धी, पुत्रपौत्र समग्रही ।

पावती रूपविद्यादी, स्तोत्र पाठें करूनियां ।।14।।

भूतप्रेतसमंधादी, रोगव्याधी समस्तही ।

नासती तूटती चिंता, आनंदें भीमदर्शनें ।।15।।

हे धरा पंधराश्लोकी, लाभली शोभली बरी।

दृढदेहो निसंदेहो, संख्या चंद्रकळागुणें ।।16।।

रामदासी अग्रगण्यू, कपिकुळासी मंडण।

रामरूपी अंतरात्मा, दर्शनें दोष नासती ।।17।।

।। इति श्रीरामदासकृतं संकटनिरसनं मारुतिस्तोत्रं संपूर्णम् ।।

मारुती स्तोत्र PDF / Maruti Stotram in Sanskrit PDF

ॐ नमो भगवते विचित्रवीरहनुमते प्रलयकालानलप्रभाप्रज्वलनाय।

प्रतापवज्रदेहाय। अंजनीगर्भसंभूताय।

प्रकटविक्रमवीरदैत्यदानवयक्षरक्षोगणग्रहबंधनाय।

भूतग्रहबंधनाय। प्रेतग्रहबंधनाय। पिशाचग्रहबंधनाय।

शाकिनीडाकिनीग्रहबंधनाय। काकिनीकामिनीग्रहबंधनाय।

ब्रह्मग्रहबंधनाय। ब्रह्मराक्षसग्रहबंधनाय। चोरग्रहबंधनाय।

मारीग्रहबंधनाय। एहि एहि। आगच्छ आगच्छ। आवेशय आवेशय।

मम हृदये प्रवेशय प्रवेशय। स्फुर स्फुर। प्रस्फुर प्रस्फुर। सत्यं कथय।

व्याघ्रमुखबंधन सर्पमुखबंधन राजमुखबंधन नारीमुखबंधन सभामुखबंधन

शत्रुमुखबंधन सर्वमुखबंधन लंकाप्रासादभंजन। अमुकं मे वशमानय।

क्लीं क्लीं क्लीं ह्रुीं श्रीं श्रीं राजानं वशमानय।

श्रीं हृीं क्लीं स्त्रिय आकर्षय आकर्षय शत्रुन्मर्दय मर्दय मारय मारय

चूर्णय चूर्णय खे खे

श्रीरामचंद्राज्ञया मम कार्यसिद्धिं कुरु कुरु

ॐ हृां हृीं ह्रूं ह्रैं ह्रौं ह्रः फट् स्वाहा

विचित्रवीर हनुमत् मम सर्वशत्रून् भस्मीकुरु कुरु।

हन हन हुं फट् स्वाहा॥

एकादशशतवारं जपित्वा सर्वशत्रून् वशमानयति नान्यथा इति॥

इति श्रीमारुतिस्तोत्रं संपूर्णम्॥

भीमरूपी महारुद्र पाठ विधि / Bhimrupi Maharudra Vidhi in Hindi PDF

  1. मारुति स्तोत्र का पाठ प्रातःकाल के समय अथवा संध्या वंदन के समय करना शुभ माना जाता है।
  2. भीमरूपी महारुद्र का पाठ करने के लिए सबसे पहले स्वयं को स्नान आदि से शुद्ध कर लें।
  3. तत्पश्चात आसन लगाकर हनुमान जी की प्रतिमा के सामने आसन पर बैठ जाएँ।
  4. इसके बाद हनुमान जी की विधिवत पूजा करें।
  5. उसके बाद श्रद्धापूर्वक पाठ प्रारंभ करें।
  6. पूर्ण फल प्राप्ति के लिए इस स्तोत्र का पाठ 1100 बार अवश्य करें।
  7. इस स्तोत्र का पाठ करते समय मन में हनुमान जी का ध्यान अवश्य करते रहें।
  8. भीमरूपी महारुद्र स्तोत्र का एक स्वर में लयबद्ध तरीके से पाठ करें।
  9. ऐसा कहा जाता है कि अधिक ऊँची आवाज में चिल्लाकर पाठ न करें।
  10. पाठ करने वाले जातक को माँस का सेवन नहीं करना चाहिए।
  11. इसके अतिरिक्त जातक को शराब, सिगरेट, पान-मसाला या अन्य मादक पदार्थ का सेवन भी नहीं करना चाहिए।

मारुती स्तोत्र के लाभ / Bhimrupi Maharudra Benefits

  • भीमरूपी महारुद्र मारुती स्तोत्र का पाठ करने से हनुमान जी शीघ्र ही प्रसन्न हो जाते हैं।
  • इस दिव्य स्तोत्र का पाठ करने से हनुमान जी के साथ-साथ प्रभु श्री राम जी का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है।
  • इसके पाठ से भक्तों के जीवन में सभी प्रकार की सुख-शांति एवं समृद्धि की प्राप्ति होती है।
  • इस चमत्कारी स्तोत्र के पाठ से जातक के मन से हर प्रकार के भय का नाश हो जाता है।
  • मारुती स्तोत्र के पाठ से हनुमान जी अपने की कृपा से भक्तों के सभी कष्टों का निवारण हो जाता है।
  • इस दिव्य स्तोत्र के पाठ से जातक के जीवन में धन-धान्य की वृद्धि होती है।
  • मारुती स्तोत्रम् का प्रतिदिन पाठ करने से साधक के चारों ओर स्थित सभी तरह की नकारात्मक शक्तियों का नाश हो जाता है।
  • भीमरूपी महारुद्र मारुती स्तोत्र का पाठ हनुमान जी के भक्तों के चारों तरफ़ सकारात्मक उर्जा का प्रवाह करता है।
  • इस अद्भुत स्तोत्र का पाठ करने से व्यक्ति के सभी प्रकार के रोग एवं शोक का नाश हो जाता है।
  • भीमरूपी महारुद्रा स्तोत्र PDF का पाठ करने से मनुष्य की शारीरिक एवं मानसिक शांति में वृद्धि होती है।x

भीमरूपी महारुद्र स्तोत्र क्या है?

जैसा कि आप सभी जानते हैं कि किसी भी देवी-देवता के स्तोत्र में उनकी स्तुति गायी जाती है। उनके स्वरूप का गुणगान किया जाता है। उसी प्रकार समर्थ गुरु रामदास जी ने भी भीमरूपी महारुद्र मारुती स्तोत्र में भी ऐसा ही किया है। समर्थ गुरु रामदास जी ने इस स्तोत्र के पहले 13 श्लोकों में मारुति अर्थात हनुमान जी का विशेष रूप से वर्णन किया है।

इसके पश्चात अंत के चार श्लोंकों में हनुमान के प्रति चरणश्रुति का वर्णन आता है साथ ही उन्होंने यह भी बताया है कि जो भक्त मारुति स्तोत्रम का पाठ श्रद्धापूर्वक करेंगे उसे किस प्रकार के फल या लाभ प्राप्त होंगे। ऐसा माना जाता है कि जो मनुष्य मारुति स्तोत्र का पाठ भक्ति-भाव करते हैं, उनकी सभी परेशानियां, संकट और चिंताएँ श्री हनुमान के आशीर्वाद से समाप्त हो जाती हैं।

वे सभी भक्त अपने सभी दुश्मनों और बुरी आदतों से मुक्त हो जाते हैं। कहा जाता है कि इस स्तोत्र का 1100 बार पाठ करने पर जातक की सभी प्रकार मनोकामनाएं शीघ्र ही पूर्ण हो जाती हैं।

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