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बृहस्पति देव की आरती PDF | Brihaspati Dev Ki Arti PDF in Hindi

बृहस्पति देव की आरती PDF | Brihaspati Dev Ki Arti Hindi PDF Download

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बृहस्पति देव की आरती PDF | Brihaspati Dev Ki Arti PDF Details
बृहस्पति देव की आरती  PDF | Brihaspati Dev Ki Arti
PDF Name बृहस्पति देव की आरती PDF | Brihaspati Dev Ki Arti PDF
No. of Pages 24
PDF Size 0.98 MB
Language Hindi
CategoryEnglish
Source pdffile.co.in
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Tags: , If बृहस्पति देव की आरती PDF | Brihaspati Dev Ki Arti is a illigal, abusive or copyright material Report a Violation. We will not be providing its PDF or any source for downloading at any cost.

बृहस्पति देव की आरती PDF | Brihaspati Dev Ki Arti Hindi

नमस्कार पाठकों, यहाँ हम उन सभी जातकों के लिए बृहस्पति देव की आरती PDF | Brihaspati Dev Ki Arti PDF in Hindi लाये हैं, जिनकी कुंडली में या तो बृहस्पति नीच का है या तो वह गुरु बृहस्पति की महदशा व अन्तर्दशा से पीड़ित हैं। इस व्रत का पालन करने से मनुष्य की कुंडली से गुरु सम्बंधित दोष दूर हो जाते हैं।

यदि आप विवाह संबधी समस्याओं से ग्रसित हैं अथवा आपका विवाह होने में विभिन्न प्रकार की बाधएँ उत्पन्न हो रही हैं, तो आपको भी नियमित रूप से पुराण विधि – विधान के साथ इस चमत्कारी गुरुवार व्रत का पालन करना चाहिए। कोई भी व्रत बिना व्रत कथा के अधूरा होता है अतः आपको इस व्रत का पालन करते हुए बृहस्पतिवार व्रत कथा PDF को भी पढ़ना व परिवारजनों को सुनना किये।

हमने यहाँ न केवल बृहस्पति व्रत कथा आरती उपलब्ध करवाई है अपितु आप यह से निशुल्क बृहस्पति व्रत आरती PDF / Brihaspativar Aarti PDF Hindi भाषा में डाउनलोड कर सकते हैं। तो अभी डाउनलोड कीजिये इस दिव्य कथा व आरती को और इसका लाभ उठाईये।

brihaspati dev puja vidhi worship jupiter dev ritual this day stars luck shine nchr | Brihaspati Dev Puja Vidhi: आज के दिन इस विधि-विधान के साथ करें बृहस्पति देव की पूजा, चमकेंगे

बृहस्पति देव की आरती PDF | Brihaspati Dev Ki Arti PDF in Hindi :

।। श्री बृहस्पति जी की आरती ।।

ऊँ जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा।

छिन छिन भोग लगाऊँ, कदली फल मेवा॥

ऊँ जय बृहस्पति देवा॥

तुम पूर्ण परमात्मा,तुम अन्तर्यामी।

जगतपिता जगदीश्वर,तुम सबके स्वामी॥

ऊँ जय बृहस्पति देवा॥

चरणामृत निज निर्मल,सब पातक हर्ता।

सकल मनोरथ दायक,कृपा करो भर्ता॥

ऊँ जय बृहस्पति देवा॥

तन, मन, धन अर्पण कर,जो जन शरण पड़े।

प्रभु प्रकट तब होकर,आकर द्वार खड़े॥

ऊँ जय बृहस्पति देवा॥

दीनदयाल दयानिधि,भक्तन हितकारी।

पाप दोष सब हर्ता,भव बन्धन हारी॥

ऊँ जय बृहस्पति देवा॥

बृहस्पतिवार व्रत कथा पूजा विधि | Brihaspativar Vrat Katha Puja Vidhi

  • गुरूवार की पूजा करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि पूजा विधि-विधान के अनुसार हो।
  • व्रत वाले दिन प्रात: काल उठकर बृहस्पति देव का पूजन करना चाहिए।
  • वृ्हस्पति देव का पूजन पीली वस्तुएं, पीले फूल, चने की दान, पीली मिठाई, पीले चावल आदि का भोग लगाकर किया जाता है।
  • इस व्रत में केले का पूजन ही करें. कथा और पूजन के समय मन, कर्म और वचन से शुद्घ होकर मनोकामना पूर्ति के लिये वृहस्पतिदेव से प्रार्थना करनी चाहिए।
  • दिन में एक समय ही भोजन करें. भोजन चने की दाल आदि का करें, नमक न खा‌एं, पीले वस्त्र पहनें, पीले फलों का प्रयोग करें, पीले चंदन से पूजन करें।
  • पूजन के बाद भगवान बृहस्पति की कथा और आरती करनी चाहिये।

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