चन्द्र ग्रहण कथा | Chandra Grahan Ki Katha PDF in Hindi

चन्द्र ग्रहण कथा | Chandra Grahan Ki Katha Hindi PDF Download

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चन्द्र ग्रहण कथा | Chandra Grahan Ki Katha PDF Details
चन्द्र ग्रहण कथा | Chandra Grahan Ki Katha
PDF Name चन्द्र ग्रहण कथा | Chandra Grahan Ki Katha PDF
No. of Pages 5
PDF Size 0.90 MB
Language Hindi
CategoryEnglish
Source pdffile.co.in
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चन्द्र ग्रहण कथा | Chandra Grahan Ki Katha Hindi

नमस्कार मित्रों, आज इस लेख के माध्यम से हम आप सभी के लिए चन्द्र ग्रहण कथा PDF / Chandra Grahan Ki Katha Hindi PDF प्रदान करने जा रहे हैं। ज्योतिष शास्‍त्र की दृष्टि के अनुसार चंद्र ग्रहण को अत्यंत ही अशुभ माना जाता है। मान्‍यता है कि इस दौरान चंद्रमा पीड़ित हो जाता है। चंद्र ग्रहण से जुड़ी कुछ धार्मिक कथाएं बहुत ही प्रचलित हैं। मान्‍यता है कि जब राहु और केतु चंद्रमा को जकड़ लेते हैं, तथा कष्ट पहुंचाते हैं, तब चंद्र ग्रहण लगता है।

चन्द्र ग्रहण से जुड़ी एक कहानी अत्यंत ही प्रचलित है जो कि समुद्र मंथन के दौरान भगवान विष्णु द्वारा स्वर्ग लोक देवताओं के अमृतपान से जुड़ी हुई है। कहते हैं कि समुद्र मंथन के दौरान जब भगवान विष्‍णु देवताओं को अमृत पिला रहे थे तब स्वर्भानु नामक एक दैत्य ने छल से अमृत पान करने की कोशिश की थी। लेकिन इस दैत्य की हरकत को देख चंद्रमा और सूर्य ने विष्णु जी को इसकी जानकारी दी।

इसके बाद भगवान विष्णु ने अपना सुर्दशन चक्र चलाया और दैत्य का सिर काट कर धड़ से अलग कर दिया। लेकिन दैत्‍य के गले की नीचे अमृत की कुछ बंदें जा चुकीं थीं। इस कारण सिर व धड़ अमर होकर दो दैत्य बन गए। जिन्हें राहू एवं केतू जे नाम से जाना है। चंद्र ग्रहण के नौ घंटे पहले से ग्रहण की समाप्ति तक सूतक काल रहता है। ज्योतिष शस्त्र के अनुसार इस बार का चंद्र ग्रहण भारत में पड़ेगा। इसी विषय  पर और अधिक जानकारी के लिए पूरा लेख ध्यानपूर्वक पढ़ें।

चन्द्र ग्रहण की कहानी / Chandra Grahan Ki Kahani in Hindi

विज्ञान के अनुसार जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीधी रेखा में आ जाते हैं तो चंद्रमा को पृथ्वी की छाया पूरी तरह से ढक लेती है। ऐसे में पूर्ण चंद्रग्रहण लगता है वहीं जब पृथ्वी की छाया चंद्रमा के कुछ भाग को ढकती हैं तो आंशिक चंद्रग्रहण लगता है। विज्ञान के अनुसार इस दौरान चंद्रमा लाल दिखाई पड़ता है।

दूसरे शब्दों में कहें तो जब सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी आ जाती है तब चंद्रमा पर प्रकाश पढ़ना बंद हो जाता है जिसे चंद्र ग्रहण कहते हैं। धार्मिक दृष्टिकोण से यह एक बहुत ही अशुभ घटना मानी जाती है इसलिए इस दौरान किसी भी प्रकार का शुभ कार्य नहीं किया जाता है और पूजा पाठ भी नहीं की जाती है।

ग्रहण के दौरान निकलने वाली किरणें बहुत ही हानिकारक होती है इसलिए हिंदू धर्मग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि ग्रहण के दौरान व्यक्ति को बाहर नहीं निकलना चाहिए और नंगी आँखों से ग्रहण नहीं देखना चाहिए क्योंकि इससे आँखों की रौशनी भी जा सकती है। आज हम आपको वह पौराणिक कथा बताएंगे जिसमे ग्रहण लगने का कारण छिपा है।

आइये जानते हैं क्या है वह पौराणिक कथा पौराणिक कथा में उल्लेख मिलता है कि जब समुद्र मंथन के दौरान अमृत निकला था तो अमृतपान के लिए देवताओं और असुरों के बीच युद्ध हुआ था कि अमृत पान कौन करेगा। तब भगवान विष्णु ने मोहिनी अवतार धारण करके देवताओं और असुरों को अमृत पान कराने के लिए अलग अलग पंक्ति में बैठा दिया था।

भगवान विष्णु ने असुरों से बचाकर देवताओं को अमृतपान करा दिया था परंतु राहु नामक राक्षस देवताओं की पंक्ति में जाकर बैठ गया था और उसने अमृत पान कर लिया था। जब चंद्रमा और सूर्य ने राहु को अमृतपान करते हुए देखा तो उन्होंने यह बात भगवान विष्णु को बता दी थी। जब भगवान विष्णु को यह बात पता चली तो उन्हें क्रोध आ गया और उन्होंने अपने सुदर्शन चक्र से राहु पर वार कर दिया था।

परन्तु राहु अमृत पान कर चुका था जिसके कारण सुदर्शन के वार का असर उस पर नहीं हुआ और वह फिर से जीवित हो गया तब भगवान विष्णु ने राहु के दो टुकड़े कर दिए उसका एक हिस्सा शरीर का ऊपरी भाग राहु कहलाया और बाकी का आधा हिस्सा केतु कहलाता है। सूर्य और चंद्रमा ने ही भगवान विष्णु को जाकर बताया था कि राहु ने अमृत पान कर लिया है और उन दोनों के बताने के कारण ही उसकी ये दुर्दशा हुई थी। इसलिए वह चंद्रमा और सूर्य को अपना शत्रु मानता है।

कहते हैं कि इसी शत्रुता के कारण हर पूर्णिमा के दिन राहु-केतु चन्द्रमा को घेर लेते हैं और उसकी रौशनी रोक देते हैं। वहीं अमावस्या के दिन यह सूर्य की रौशनी रोकते हैं। जब वह इसमें सफल हो जाते है तो चंद्रग्रहण और सूर्यग्रहण लगता है। इसी कारण के चलते ग्रहण को धार्मिक दृष्टिकोण से शुभ नहीं माना जाता है। कहते हैं की जब ग्रहण लगता है तो देवता संकट में होते हैं इसलिए ग्रहण के दौरान देवी देवताओं की पूजा की मनाही होती है।

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