गंगा दशहरा व्रत कथा | Ganga Dussehra Ki Katha & Puja Vidhi PDF in Hindi

गंगा दशहरा व्रत कथा | Ganga Dussehra Ki Katha & Puja Vidhi Hindi PDF Download

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गंगा दशहरा व्रत कथा | Ganga Dussehra Ki Katha & Puja Vidhi PDF Details
गंगा दशहरा व्रत कथा | Ganga Dussehra Ki Katha & Puja Vidhi
PDF Name गंगा दशहरा व्रत कथा | Ganga Dussehra Ki Katha & Puja Vidhi PDF
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PDF Size 0.99 MB
Language Hindi
CategoryReligion & Spirituality
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गंगा दशहरा व्रत कथा | Ganga Dussehra Ki Katha & Puja Vidhi Hindi

नमस्कार मित्रों, आज इस लेख के माध्यम से हम आप सभी के लिए गंगा दशहरा व्रत कथा / Ganga Dussehra Ki Katha PDF in Hindi प्रदान करने जा रहे हैं। सनातन हिंदू धर्म में गंगा दशहरा के पावन पर्व को प्रमुख त्योहार माना जाता है इसीलिए इस दिन का हिन्दू धर्म में विशेष महत्व माना गया है। हिन्दू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गंगा दशहरा के पर्व पर माँ गंगा की विधि- विधान से पूजा- अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन माँ गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर आईं थीं।

मान्यता है कि इस दिन गंगा नदी में स्नान करने से मनुष्य को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है तथा पापों से मुक्ति मिलती है। इसीलिए गंगा दशहरा के दिन लाखों भक्त अपने पापों से छुटकारा पाने के लिए एवं माँ गंगा का आशीर्वाद पाने के लिए गंगा नदी में स्नान करते हैं। भारत में प्रति वर्ष ज्येष्ठ माह की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के दिन गंगा दशहरा का पावन पर्व बड़े ही धूम-धाम से मनाया जाता है। इस वर्ष गंगा दशहरा का पर्व 09 जून को मनाया जाएगा।

भविष्य पुराण के अनुसार जो मनुष्य गंगा दशहरा के दिन गंगा नदी में खड़े होकर दस बार शिव ताण्डव स्तोत्र का श्रद्धापूर्वक पाठ करता है, वह हर प्रकार के दुख, दरिद्र से शीघ्र ही छुटकारा पा लेता है। ऐसा माना जाता है कि स्कंद पुराण में वर्णित इस दिन गंगा स्तोत्र का पाठ करने से व्यक्ति को माँ गंगा की विशेष कृपा प्राप्त होती है, और वह पापों से एवं जीवन में आने वाले कष्टों से शीघ्र ही मुक्ति पा लेता है। नीचे आप गंगा दशहरा पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, आरती, स्नान की विधि आदि के बारे में सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त करते हैं।

गंगा दशहरा व्रत कथा / Ganga Dussehra Ki Katha PDF

  • युधिष्ठिर ने लोमश ऋषि से पूछा, “हे मुनिवर! राजा भगीरथ गंगा को किस प्रकार पृथ्वी पर ले आये? कृपया इस प्रसंग को भी सुनायें।” लोमश ऋषि ने कहा, “धर्मराज! इक्ष्वाकु वंश में सगर नामक एक बहुत ही प्रतापी राजा हुये। उनके वैदर्भी और शैव्या नामक दो रानियाँ थीं।
  • राजा सगर ने कैलाश पर्वत पर दोनों रानियों के साथ जाकर शंकर भगवान की घोर आराधना की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शंकर ने उनसे कहा कि हे राजन्! तुमने पुत्र प्राप्ति की कामना से मेरी आराधना की है।
  • अतएव मैं वरदान देता हूँ कि तुम्हारी एक रानी के साठ हजार पुत्र होंगे किन्तु दूसरी रानी से तुम्हारा वंश चलाने वाला एक ही सन्तान होगा। इतना कहकर शंकर भगवान अन्तर्ध्यान हो गये।
  • “समय बीतने पर शैव्या ने असमंज नामक एक अत्यन्त रूपवान पुत्र को जन्म दिया और वैदर्भी के गर्भ से एक तुम्बी उत्पन्न हुई जिसे फोड़ने पर साठ हजार पुत्र निकले। कालचक्र बीतता गया और असमंज का अंशुमान नामक पुत्र उत्पन्न हुआ। असमंज अत्यन्त दुष्ट प्रकृति का था इसलिये राजा सगर ने उसे अपने देश से निष्कासित कर दिया। फिर एक बार राजा सगर ने अश्वमेघ यज्ञ करने की दीक्षा ली।
  • अश्वमेघ यज्ञ का श्यामकर्ण घोड़ा छोड़ दिया गया और उसके पीछे-पीछे राजा सगर के साठ हजार पुत्र अपनी विशाल सेना के साथ चलने लगे। सगर के इस अश्वमेघ यज्ञ से भयभीत होकर देवराज इन्द्र ने अवसर पाकर उस घोड़े को चुरा लिया और उसे ले जाकर कपिल मुनि के आश्रम में बाँध दिया। उस समय कपिल मुनि ध्यान में लीन थे अतः उन्हें इस बात का पता ही न चला।
  • इधर सगर के साठ हजार पुत्रों ने घोड़े को पृथ्वी के हरेक स्थान पर ढूँढा किन्तु उसका पता न लग सका। वे घोड़े को खोजते हुये पृथ्वी को खोद कर पाताल लोक तक पहुँच गये जहाँ अपने आश्रम में कपिल मुनि तपस्या कर रहे थे और वहीं पर वह घोड़ा बँधा हुआ था।
  • सगर के पुत्रों ने यह समझ कर कि घोड़े को कपिल मुनि ही चुरा लाये हैं, कपिल मुनि को कटुवचन सुनाना आरम्भ कर दिया। अपने निरादर से कुपित होकर कपिल मुनि ने राजा सगर के साठ हजार पुत्रों को अपने क्रोधाग्नि से भस्म कर दिया।
  • “जब सगर को नारद मुनि के द्वारा अपने साठ हजार पुत्रों के भस्म हो जाने का समाचार मिला तो वे अपने पौत्र अंशुमान को बुलाकर बोले कि बेटा! तुम्हारे साठ हजार दादाओं को मेरे कारण कपिल मुनि की क्रोधाग्नि में भस्म हो जाना पड़ा।
  • अब तुम कपिल मुनि के आश्रम में जाकर उनसे क्षमाप्रार्थना करके उस घोड़े को ले आओ। अंशुमान अपने दादाओं के बनाये हुये रास्ते से चलकर कपिल मुनि के आश्रम में जा पहुँचे। वहाँ पहुँच कर उन्होंने अपनी प्रार्थना एवं मृदु व्यवहार से कपिल मुनि को प्रसन्न कर लिया।
  • कपिल मुनि ने प्रसन्न होकर उन्हें वर माँगने के लिये कहा। अंशुमान बोले कि मुने! कृपा करके हमारा अश्व लौटा दें और हमारे दादाओं के उद्धार का कोई उपाय बतायें। कपिल मुनि ने घोड़ा लौटाते हुये कहा कि वत्स! जब तुम्हारे दादाओं का उद्धार केवल गंगा के जल से तर्पण करने पर ही हो सकता है।
  • “अंशुमान ने यज्ञ का अश्व लाकर सगर का अश्वमेघ यज्ञ पूर्ण करा दिया। यज्ञ पूर्ण होने पर राजा सगर अंशुमान को राज्य सौंप कर गंगा को स्वर्ग से पृथ्वी पर लाने के उद्देश्य से तपस्या करने के लिये उत्तराखंड चले गये इस प्रकार तपस्या करते-करते उनका स्वर्गवास हो गया।
  • अंशुमान के पुत्र का नाम दिलीप था। दिलीप के बड़े होने पर अंशुमान भी दिलीप को राज्य सौंप कर गंगा को स्वर्ग से पृथ्वी पर लाने के उद्देश्य से तपस्या करने के लिये उत्तराखंड चले गये किन्तु वे भी गंगा को स्वर्ग से पृथ्वी पर लाने में सफल न हो सके। दिलीप के पुत्र का नाम भगीरथ था।
  • भगीरथ के बड़े होने पर दिलीप ने भी अपने पूर्वजों का अनुगमन किया किन्तु गंगा को लाने में उन्हें भी असफलता ही हाथ आई। “अन्ततः भगीरथ की तपस्या से गंगा प्रसन्न हुईं और उनसे वरदान माँगने के लिया कहा। भगीरथ ने हाथ जोड़कर कहा कि माता! मेरे साठ हजार पुरखों के उद्धार हेतु आप पृथ्वी पर अवतरित होने की कृपा करें।
  • इस पर गंगा ने कहा वत्स! मैं तुम्हारी बात मानकर पृथ्वी पर अवश्य आउँगी, किन्तु मेरे वेग को भगवान शिव के अतिरिक्त और कोई सहन नहीं कर सकता। इसलिये तुम पहले भगवान शिव को प्रसन्न करो। यह सुन कर भगीरथ ने भगवान शिव की घोर तपस्या की और उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर शिव जी हिमालय के शिखर पर गंगा के वेग को रोकने के लिये खड़े हो गये।
  • गंगा जी स्वर्ग से सीधे शिव जी की जटाओं पर जा गिरीं। इसके बाद भगीरथ गंगा जी को अपने पीछे-पीछे अपने पूर्वजों के अस्थियों तक ले आये जिससे उनका उद्धार हो गया। भगीरथ के पूर्वजों का उद्धार करके गंगा जी सागर में जा गिरीं और अगस्त्य मुनि द्वारा सोखे हुये समुद्र में फिर से जल भर गया।”

गंगा दशहरा पूजा विधि / Ganga Dussehra 2022 Pooja Vidhi

  • गंगा दशहरा के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो लें।
  • इस दिन गंगा नदी में स्नान करने का विशेष महत्व होता है, इसीलिए विशेष फल की प्राप्ति हेतु गंगा नदी में स्नान करें यदि किसी कारणवश नदी में स्नान करने में असमर्थ हैं, तो केवल घर के नहाने के पानी में गंगा जल डालकर माँ गंगा का ध्यान करके स्नान करें।
  • स्नान आदि से शुद्ध होकर घर में गंगा जल का छिड़काव करें।
  • इसके बाद घर के मंदिर में माँ गंगा का नाम लेके दीप प्रज्वलित करें।
  • इस दिन हो सके तो माँ गंगा का अधिक से अधिक ध्यान करें।
  • तत्पश्चात माँ गंगा को भोग लगाएँ।
  • भोग से पहले यह अवश्य ध्यान रहे कि भगवान को सिर्फ सात्विक चीजों का ही भोग लगाया जाता है।
  • गंगा दशहरा के दिन दान करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है।
  • इस दिन अपनी क्षमतानुसार दान अवश्य करें।
  • तत्पश्चात माँ गंगा की भक्ति-भाव से आरती करें।
  • इस दिन गंगा चालीसा एवं गंगा स्तोत्र का पाठ करने से माँ गंगा भक्तों पर विशेष कृपा करती हैं।

माँ गंगा आरती / Ganga Dussehra 2022 Aarti PDF

ॐ जय गंगे माता, श्री गंगे माता।
जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता।

ॐ जय गंगे माता…

चन्द्र-सी ज्योत तुम्हारी जल निर्मल आता।
शरण पड़े जो तेरी, सो नर तर जाता।

ॐ जय गंगे माता…

पुत्र सगर के तारे सब जग को ज्ञाता।
कृपा दृष्टि तुम्हारी, त्रिभुवन सुख दाता।

ॐ जय गंगे माता…

एक ही बार भी जो नर तेरी शरणगति आता।
यम की त्रास मिटा कर, परम गति पाता।

ॐ जय गंगे माता…

आरती मात तुम्हारी जो जन नित्य गाता।
दास वही जो सहज में मुक्ति को पाता।

ॐ जय गंगे माता…
ॐ जय गंगे माता…।।

मां गंगा का मंत्र

  1. ॐ नमो गंगायै विश्वरूपिण्यै नारायण्यै नमो नमः
  2. नमो भगवते दशपापहराये गंगाये नारायण्ये रेवत्ये शिवाये दक्षाये अमृताये विश्वरुपिण्ये नंदिन्ये ते नमो नम:

अर्थ – हे भगवती, दसपाप हरने वाली गंगा, नारायणी, रेवती, शिव, दक्षा, अमृता, विश्वरूपिणी, नंदनी को को मेरा नमन।

इन 5 शुभ मुहूर्तों में करें मां गंगा की पूजा- अर्चना

  • ब्रह्म मुहूर्त- 04:03ए एम से 04:44 ए एम
  • अभिजित मुहूर्त- 11:55ए एम से 12:51 पी एम
  • विजय मुहूर्त- 02:42पी एम से 03:38 पी एम
  • गोधूलि मुहूर्त – 07:08पी एम से 07:32 पी एम
  • अमृत काल- 12:52पी एम से 02:21 पी एम

गंगा दशहरा का महत्व

  • इस दिन माँ गंगा की पूजा-अर्चना करने से जातक को शुभ फल की प्राप्ति होती है।
  • गंगा दशहरा के पावन पर्व पर माँ गंगा की पूजा- अर्चना करने से सभी प्रकार के दोषों से मुक्ति मिलती है।
  • श्रद्धापूर्वक इस दिन माँ गंगा की पूजा करने से भक्तों को अंत समय में मोक्ष की प्राप्ति होती है।
  • जो भी व्यक्ति इस दिन भक्ति-भाव से गंगा स्तोत्र का पाठ करता है, वह जीवन में आने वाली समस्याओं से छुटकारा पा लेता है।

गंगा स्नान का शुभ मुहूर्त / Ganga Dussehra Shubh Muhurt 2022

  • दशमी तिथि प्रारम्भ – जून 09, 2022 को 08:21 ए एम बजे
  • दशमी तिथि समाप्त – जून 10, 2022 को 07:25 ए एम बजे
  • हस्त नक्षत्र प्रारम्भ – जून 09, 2022 को 04:31 ए एम बजे
  • हस्त नक्षत्र समाप्त – जून 10, 2022 को 04:26 ए एम बजे
  • व्यतीपात योग प्रारम्भ – जून 09, 2022 को 03:27 ए एम बजे
  • व्यतीपात योग समाप्त – जून 10, 2022 को 01:50 ए एम बजे

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