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गायत्री चालीसा | Gayatri Chalisa PDF in Hindi

गायत्री चालीसा | Gayatri Chalisa Hindi PDF Download

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गायत्री चालीसा | Gayatri Chalisa PDF Details
गायत्री चालीसा | Gayatri Chalisa
PDF Name गायत्री चालीसा | Gayatri Chalisa PDF
No. of Pages 5
PDF Size 0.70 MB
Language Hindi
CategoryEnglish
Source pdffile.co.in
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गायत्री चालीसा | Gayatri Chalisa Hindi

नमस्कार मित्रों, आज इस लेख के माध्यम से हम आप सभी को गायत्री चालीसा PDF / Gayatri Chalisa PDF in Hindi प्रदान करने जा रहे हैं। सनातन हिन्दू धर्म में माता गायत्री का अत्यधिक महत्व माना गया है। माता गायत्री को वेदमाता के नाम से भी जाना जाता है। अर्थात सभी वेदों की उत्पत्ति माता गायत्री से ही हुई है। गायत्री माता को भारतीय संस्कृति की जननी भी कहा जाता है।

शास्त्रों के अनुसार ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी को माता गायत्री का अवतरण दिवस माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि गायत्री माता को शीघ्र प्रसन्न एवं उनकी आराधना करने के लिए गायत्री चालीसा एक सुन्दर एवं सुलभ उपाय है। इसमें चालीस श्लोकों का एक समूह है। जिसके माध्यम से आप माता गायत्री को आसानी से प्रसन्न करके उनकी विशेष कृपा प्राप्त कर सकते हो।

श्री गायत्री चालीसा PDF | Gayatri Chalisa in Hindi PDF

|| दोहा ||

हीं श्रीं, क्लीं, मेधा, प्रभा, जीवन ज्योति प्रचण्ड |
शांति, क्रांति, जागृति, प्रगति, रचना शक्ति अखण्ड ||
जगत जननि, मंगल करनि, गायत्री सुखधाम |
प्रणवों सावित्री, स्वधा, स्वाहा पूरन काम ||

|| चौपाई ||

भूर्भुवः स्वः ॐ युत जननी |
गायत्री नित कलिमल दहनी ||
अक्षर चौबिस परम पुनीता |
इनमें बसें शास्त्र, श्रुति, गीता ||

शाश्वत सतोगुणी सतरुपा |
सत्य सनातन सुधा अनूपा ||
हंसारुढ़ सितम्बर धारी |
स्वर्णकांति शुचि गगन बिहारी ||

पुस्तक पुष्प कमंडलु माला |
शुभ्र वर्ण तनु नयन विशाला ||
ध्यान धरत पुलकित हिय होई |
सुख उपजत, दुःख दुरमति खोई ||

कामधेनु तुम सुर तरु छाया |
निराकार की अदभुत माया ||
तुम्हरी शरण गहै जो कोई |
तरै सकल संकट सों सोई ||

सरस्वती लक्ष्मी तुम काली |
दिपै तुम्हारी ज्योति निराली ||
तुम्हरी महिमा पारन पावें |
जो शारद शत मुख गुण गावें ||

चार वेद की मातु पुनीता |
तुम ब्रहमाणी गौरी सीता ||
महामंत्र जितने जग माहीं |
कोऊ गायत्री सम नाहीं ||

सुमिरत हिय में ज्ञान प्रकासै |
आलस पाप अविघा नासै ||
सृष्टि बीज जग जननि भवानी |
काल रात्रि वरदा कल्यानी ||

ब्रहमा विष्णु रुद्र सुर जेते |
तुम सों पावें सुरता तेते ||
तुम भक्तन की भक्त तुम्हारे |
जननिहिं पुत्र प्राण ते प्यारे ||

महिमा अपरम्पार तुम्हारी |
जै जै जै त्रिपदा भय हारी ||
पूरित सकल ज्ञान विज्ञाना |
तुम सम अधिक न जग में आना ||

तुमहिं जानि कछु रहै न शेषा |
तुमहिं पाय कछु रहै न क्लेषा ||
जानत तुमहिं, तुमहिं है जाई |
पारस परसि कुधातु सुहाई ||

तुम्हरी शक्ति दिपै सब ठाई |
माता तुम सब ठौर समाई ||
ग्रह नक्षत्र ब्रहमाण्ड घनेरे |
सब गतिवान तुम्हारे प्रेरे ||

सकलसृष्टि की प्राण विधाता |
पालक पोषक नाशक त्राता ||
मातेश्वरी दया व्रत धारी |
तुम सन तरे पतकी भारी ||

जापर कृपा तुम्हारी होई |
तापर कृपा करें सब कोई ||
मंद बुद्घि ते बुधि बल पावें |
रोगी रोग रहित है जावें ||

दारिद मिटै कटै सब पीरा |
नाशै दुःख हरै भव भीरा ||
गृह कलेश चित चिंता भारी |
नासै गायत्री भय हारी ||

संतिति हीन सुसंतति पावें |
सुख संपत्ति युत मोद मनावें ||
भूत पिशाच सबै भय खावें |
यम के दूत निकट नहिं आवें ||

जो सधवा सुमिरें चित लाई |
अछत सुहाग सदा सुखदाई ||
घर वर सुख प्रद लहैं कुमारी |
विधवा रहें सत्य व्रत धारी ||

जयति जयति जगदम्ब भवानी |
तुम सम और दयालु न दानी ||
जो सदगुरु सों दीक्षा पावें |
सो साधन को सफल बनावें ||

सुमिरन करें सुरुचि बड़भागी |
लहैं मनोरथ गृही विरागी ||
अष्ट सिद्घि नवनिधि की दाता |
सब समर्थ गायत्री माता ||

ऋषि, मुनि, यती, तपस्वी, जोगी |
आरत, अर्थी, चिंतित, भोगी ||
जो जो शरण तुम्हारी आवें |
सो सो मन वांछित फल पावें ||

बल, बुद्घि, विघा, शील स्वभाऊ |
धन वैभव यश तेज उछाऊ ||
सकल बढ़ें उपजे सुख नाना |
जो यह पाठ करै धरि ध्याना ||

|| दोहा ||

यह चालीसा भक्तियुत, पाठ करे जो कोय |
तापर कृपा प्रसन्नता, गायत्री की होय ||

श्री गायत्री जी की आरती / Gayatri Mata Ki Aarti Lyrics in Hindi

जयति जय गायत्री माता,जयति जय गायत्री माता।
सत् मारग पर हमें चलाओ,जो है सुखदाता॥

जयति जय गायत्री माता…।

आदि शक्ति तुम अलख निरञ्जनजग पालन कर्त्री।
दुःख, शोक, भय, क्लेश,कलह दारिद्रय दैन्य हर्त्री॥

जयति जय गायत्री माता…।

ब्रहृ रुपिणी, प्रणत पालिनी,जगतधातृ अम्बे।
भवभयहारी, जनहितकारी,सुखदा जगदम्बे॥

जयति जय गायत्री माता…।

भयहारिणि भवतारिणि अनघे,अज आनन्द राशी।
अविकारी, अघहरी, अविचलित,अमले, अविनाशी॥

जयति जय गायत्री माता…।

कामधेनु सत् चित् आनन्दा, जय गंगा गीता।
सविता की शाश्वती शक्ति, तुम सावित्री सीता॥

जयति जय गायत्री माता…।

ऋग्, यजु, साम, अथर्व,प्रणयिनी, प्रणव महामहिमे।
कुण्डलिनी सहस्त्रार,सुषुम्ना, शोभा गुण गरिमे॥

जयति जय गायत्री माता…।

स्वाहा, स्वधा, शची,ब्रहाणी, राधा, रुद्राणी।
जय सतरुपा, वाणी, विघा,कमला, कल्याणी॥

जयति जय गायत्री माता…।

जननी हम है, दीन, हीन, दुःख, दरिद्र के घेरे।
यदपि कुटिल, कपटी कपूत, तऊ बालक है तेरे॥

जयति जय गायत्री माता…।

स्नेहसनी करुणामयि माता,चरण शरण दीजै।
बिलख रहे हम शिशु सुत तेरे,दया दृष्टि कीजै॥

जयति जय गायत्री माता…।

काम, क्रोध, मद, लोभ,दम्भ, दुर्भाव, द्वेष हरिये।
शुद्ध बुद्धि, निष्पाप हृदय,मन को पवित्र करिये॥

जयति जय गायत्री माता…।

तुम समर्थ सब भाँति तारिणी,तुष्टि, पुष्टि त्राता।
सत् मार्ग पर हमें चलाओ,जो है सुखदाता॥

जयति जय गायत्री माता…।

गायत्री चालीसा पाठ की विधि

  • गायत्री चालीसा का पाठ करना सुबह के समय अत्यंत ही शुभ माना जाता है।
  • इसके पाठ के लिए माता की प्रतिमा या तस्वीर पूजा स्थल पर रखें।
  • चालीसा का पाठ शुरु करने से पहले स्नान-ध्यान करना चाहिए।
  • तत्पश्चात पूजा स्थल के पास आसन बिछाना चाहिए।
  • आसन श्वेत रंग का ही हो तो बेहतर होगा।
  • इसके बाद धूप-दीप और फूल माता गायत्री को अर्पित करें।
  • तत्पश्चात श्रद्धापूर्वक गायत्री चालीसा का पाठ करें।
  • गायत्री चालीसा के पाठ के अंतर्गत आस-पास जितनी शांति हो उतना अच्छा होता है।

गायत्री चालीसा के लाभ / Gayatri Chalisa Benefits in Hindi

  • गायत्री चालीसा नियमित रूप से पाठ करने से आपको शांति भरा जीवन प्राप्त होता है।
  • इस दिव्य चालीसा के पाठ से भक्तों को सतगुणों की प्राप्ति भी होती है।
  • इसका पाठ व्यक्ति को शक्तिशाली एवं बुद्धिमान बना देता है।
  • इस चालीसा का श्रद्धापूर्वक पाठ करने माता गायत्री का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
  • इसके प्रतिदिन विधि – विधान से पाठ करने पर मनुष्य को मनचाहे फल की प्राप्ति होती है।
  • इसके पाठ साधक के चारों ओर एक रक्षा कवच का निर्माण करता है तथा विपत्तियों के समय उसकी रक्षा करता है।
  • गायत्री चालीसा का पाठ करने से भक्तों के दुख – दर्द शीघ्र ही दूर हो जाते हैं।
  • इसका पाठ करने से जीवन में आ रही परेशानियों से मुक्ति मिलती है और व्यक्ति के जीवन में आनंद बना रहता है।

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