गुरुपादुका स्तोत्र | Guru Paduka Stotram PDF in Sanskrit

गुरुपादुका स्तोत्र | Guru Paduka Stotram Sanskrit PDF Download

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गुरुपादुका स्तोत्र | Guru Paduka Stotram PDF Details
गुरुपादुका स्तोत्र | Guru Paduka Stotram
PDF Name गुरुपादुका स्तोत्र | Guru Paduka Stotram PDF
No. of Pages 4
PDF Size 1.35 MB
Language Sanskrit
CategoryEnglish
Source pdffile.co.in
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गुरुपादुका स्तोत्र | Guru Paduka Stotram Sanskrit

Dear readers, here we are going to share गुरुपादुका स्तोत्रम् / Guru Paduka Stotram PDF in Sanskrit for all of you. Guru Paduka Stotram is one of the most miraculous and very powerful Hymns. It is dedicated to the Guru. As you know that in the Sanatan Hindu Dharma, Guru is considered very important and significant. On the day of Guru Purnima Guru is worshipped by their devotees.

It is said that Guru is always considered a source of inspiration for human life which always leads the life of man towards progress and spirituality. It is believed that the Guru shows the way to remove the darkness from our life. Did you know what is the real meaning of a Guru? If you want to know it then here you can know about the meaning of Guru. Through our post, you can easily get the guru paduka stotram lyrics in sanskrit with meaning in an easy way.

Gu means darkness and Ru means destroyer. It means the Guru is the one who can remove the darkness from life. The Guru Paduka Stotram is considered very important. By reciting the Guru Paduka hymn people get a peaceful and prosperous life. If you want special blessings of Guru in your life then you recite Guru Paduka Stotram with full devotion.

गुरुपादुका स्तोत्रम् / Guru Paduka Stotram Lyrics in Sanskrit PDF

अनंत संसार समुद्र तार नौकायिताभ्यां गुरुभक्तिदाभ्यां।
वैराग्य साम्राज्यद पूजनाभ्यां नमो नमः श्री गुरु पादुकाभ्यां॥१॥

जिसका कहीं अंत नहीं है, ऐसे इस संसार सागर से जो तारने वाली नौका के समान हैं, जो गुरु की भक्ति प्रदान करती हैं,  जिनके पूजन से वैराग्य रूपी आधिपत्य  प्राप्त होता है, [मेरे] उन श्री गुरुदेव की पादुकाओं को नमस्कार है।

कवित्व वाराशि निशाकराभ्यां दौर्भाग्यदावांबुदमालिक्याभ्यां।
दूरीकृतानम्र विपत्तिताभ्यां नमो नमः श्री गुरु पादुकाभ्यां॥२॥

अज्ञान के अंधकार में जो पूर्ण चन्द्र के समान उज्जवल हैं, दुर्भाग्य की अग्नि के  लिए जो वर्षा करने वाले मेघ के समान हैं (अर्थात जो दुर्भाग्य रुपी अग्नि को बुझा देती हैं) जो सभी विपत्तियों को दूर कर देती हैं, उन श्री गुरुदेव की पादुकाओं को नमस्कार है।

नता ययोः श्रीपतितां समीयुः कदाचिदप्याशु दरिद्रवर्याः।
मूकाश्च वाचसपतितां हि ताभ्यां नमो नमः श्री गुरु पादुकाभ्यां॥३॥

जिनके आगे नतमस्तक होने से श्री (धन आदि समृद्धि) की प्राप्ति होती है, दरिद्रता के कीचड़ में डूबा हुआ व्यक्ति भी समृद्ध हो जाता है, जो मूक (अज्ञानी, बिना सोचे समझे बोलने वाला) व्यक्ति को भी कुशल वक्ता बना देती हैं, उन श्री गुरुदेव की पादुकाओं को नमस्कार है।

नाली कनी काशपदाहृताभ्यां नानाविमोहादिनिवारिकाभ्यां।
नमज्जनाभीष्टततिब्रदाभ्यां नमो नमः श्री गुरु पादुकाभ्यां॥४॥

श्री गुरदेव के आकर्षक चरण कमल इस संसार से उत्पन्न हुए मोह और लोभ का नाश करते हैं, जो लोग इनके सम्मुख झुकते हैं उन्हें अभीष्ट (मनचाहा) फल की प्राप्ति होती है, [मैं] श्री गुरुदेव की इन पादुकाओं को नमस्कार है।

नृपालिमौलि ब्रज रत्न कांति सरिद्विराज्झषकन्यकाभ्यां।
नृपत्वदाभ्यां नतलोकपंक्ते: नमो नमः श्री गुरु पादुकाभ्यां॥५॥

एक राजा के मुकुट की मणि के समान जिनकी चमक होती है, मगरमच्छों से भरी नदी के समीप मनभावन कन्या के समान (अभय का सौन्दर्य प्रकट करते हुए) जो उपस्थित होती हैं, जो इनके सामने झुकते वाले लोगों को नृपत्व (राजा की भांति सम्मान)  प्रदान करती हैं, उन श्री गुरुदेव की पादुकाओं को मेरा नमस्कार है।

पापांधकारार्क परंपराभ्यां तापत्रयाहीन्द्र खगेश्वराभ्यां।
जाड्याब्धि संशोषण वाड्वाभ्यां नमो नमः श्री गुरु पादुकाभ्यां॥६॥

जो पाप के असीम अन्धकार को नष्ट करने वाले सूर्य के समान है, जो संसार के तीनों ताप (दैहिक, दैविक और भौतिक ये तीन प्रकार के कष्ट होते हैं) रुपी सर्पोंको नष्ट करने वाले पक्षीराज गरुड़ के समान हैं, जो अज्ञान रुपी महासागर को सोखने वाली अग्नि रूप हैं, उन श्री गुरुदेव की पादुकाओं को नमस्कार है।

शमादिषट्क प्रदवैभवाभ्यां समाधि दान व्रत दीक्षिताभ्यां।
रमाधवांघ्रि स्थिरभक्तिदाभ्यां नमो नमः श्री गुरु पादुकाभ्यां॥७॥

जो मन के नियंत्रण से प्राप्त होने वाले छः प्रकार के वैभवों को प्रदान करती हैं, जिनकी कृपा से समाधि व्रत के मार्ग की ओर अग्रसर होते हैं, जो मोक्ष का मार्ग दिखाती हैं और भक्ति रस प्रदान करती हैं, उन श्री गुरुदेव की पादुकाओं को नमस्कार है।

स्वार्चा पराणामखिलेष्टदाभ्यां स्वाहासहायाक्ष धुरंधराभ्यां।
स्वान्ताच्छ भावप्रदपूजनाभ्यां नमो नमः श्री गुरु पादुकाभ्यां॥८॥

जो पुण्यात्मा लोग स्वयं को दूसरों की सहायता के लिए अर्पण कर देते हैं ये उनकी सभी इच्छाएं पूर्ण करती हैं, सच्चे भाव से पूजन करने पर जो मन को स्वछन्द कर देती हैं, उन श्री गुरुदेव की पादुकाओं को नमस्कार है।

कामादिसर्प व्रजगारुडाभ्यां विवेक वैराग्य निधि प्रदाभ्यां।
बोध प्रदाभ्यां दृत मोक्ष दाभ्यां नमो नमः श्री गुरु पादुकाभ्यां॥९॥

काम आदि दुर्गुण रुपी सर्पों के लिए ये गरुड़ के समान हैं, ये विवेक और वैराग्य की निधि प्रदान करती हैं, बुद्धि प्रदान करती हैं और तुरंत मोक्ष देती हैं, श्री गुरुदेव की इन चरण पादुकाओं को मेरा नमस्कार है।

।इति श्रीगुरुपादुकास्तोत्रं संपूर्णम्।

Guru Paduka Stotram Lyrics in English

Anantha samsara samudhra thara naukayithabhyam guru bhakthithabhyam,
Vairagya samrajyadha poojanabhyam, namo nama sri guru padukabhyam.

Kavithva varahsini sagarabhyam, dourbhagya davambudha malikabhyam,
Dhoorikrutha namra vipathithabhyam, namo nama sri guru padukabhyam.

Natha yayo sripatitam samiyu kadachidapyashu daridra varya,
Mookascha vachaspathitham hi thabhyam, namo nama sri guru padukabhyam.

Naleeka neekasa pada hrithabhyam, nana vimohadhi nivarikabyam,
Nama janabheeshtathathi pradhabhyam namo nama sri guru padukabhyam.

Nrupali mouleebraja rathna kanthi saridvi raja jjashakanyakabhyam,
Nrupadvadhabhyam nathaloka pankhthe, namo nama sri guru padukabhyam.

Papandhakara arka paramparabhyam, thapathryaheendra khageswarabhyam,
Jadyabdhi samsoshana vadawabhyam namo nama sri guru padukabhyam.

Shamadhi shatka pradha vaibhavabhyam, Samadhi dhana vratha deeksithabhyam,
Ramadhavangri sthira bhakthidabhyam, namo nama sri guru padukabhyam.

Swarchaparana makhileshtathabhyam, swaha sahayaksha durndarabhyam,
Swanthacha bhava pradha poojanabhyam, namo nama sri guru padukabhyam.

Kaamadhi sarpa vraja garudabhyam, viveka vairagya nidhi pradhabhyam,
Bhodha pradhabhyam drutha mokshathabhyam, namo nama sri guru padukabhyam.

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