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अनंत चतुर्दशी व्रत कथा | Anant Chaturdashi Vrat Katha & Pooja Vidhi PDF in Hindi

अनंत चतुर्दशी व्रत कथा | Anant Chaturdashi Vrat Katha & Pooja Vidhi Hindi PDF Download

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अनंत चतुर्दशी व्रत कथा | Anant Chaturdashi Vrat Katha & Pooja Vidhi PDF Details
अनंत चतुर्दशी व्रत कथा | Anant Chaturdashi Vrat Katha & Pooja Vidhi
PDF Name अनंत चतुर्दशी व्रत कथा | Anant Chaturdashi Vrat Katha & Pooja Vidhi PDF
No. of Pages 7
PDF Size 1.11 MB
Language Hindi
Categoryहिन्दी | Hindi
Source pdffile.co.in
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अनंत चतुर्दशी व्रत कथा | Anant Chaturdashi Vrat Katha & Pooja Vidhi Hindi

नमस्कार मित्रों, आज इस लेख कए माध्यम से हम आप सभी के लिए अनंत चतुर्दशी व्रत कथा PDF / Anant Chaturdashi Vrat Katha PDF in Hindi प्रदान करने जा रहे हैं। जैसा कि आप सभी जानते होंगे कि गणेश चतुर्थी का पर्व सर्वाधिक लोकप्रिय त्योहारों में से एक है। इसी पर्व के दस दिन बाद अनंत चतुर्दशी व्रत का पालन बड़े ही श्रद्धा-भाव से किया जाता है।

सनातन हिन्दू धर्म में अनंत चतुर्दशी के व्रत का पालन भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को किया जाता है। इस व्रत को भगवान श्री हरी विष्णु जी की कृपा प्राप्त करने के लिए रखा जाता है। शास्त्रों के अनुसार अनंत चतुर्दशी के पर्व के दिन भगवान श्री हरी विष्णु ने अनंत अवतार धारण किए थे। इसीलिए इस दिन भगवान विष्णु के अनंत अवतारों की विधि-विधान से पूजा की जाती है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, अंनत चतुर्दशी के व्रत का महत्व द्वापर युग से माना गया है। कहा जाता है जब पांडव अपना सारा राजपाट जुए में हार चुके थे, तब भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें अनंत चतुर्दशी का व्रत करने की सलाह दी। श्री कृष्ण के कहे अनुसार पांडवों ने अनंत चतुर्दशी का व्रत विधि-विधान सहित किया जिसके फलस्वरूप उन्हें अपने सारा राजपाट वापस मिल गया।

इसीलिए यह माना जाता है कि जो भी भक्त बहुत समय से किसी भी प्रकार की समस्या से ग्रसित हैं तो अनंत चतुर्दशी के दिन व्रत का पालन भक्ति-भाव से करें। इस व्रत को करने से भक्तों की सभी समस्याओं का निवारण भगवान श्री हरी विष्णु जी की कृपा से अति शीघ्र ही हो जाता है। इसीलिए यदि आप भगवान विष्णु जी को प्रसन्न करके आशीर्वाद ग्रहण करना चाहते हैं तो हमारे इस लेख के द्वारा अनंत चतुर्दशी व्रत कथा पूजा विधि पीडीएफ़ प्रारूप में प्राप्त करके इस व्रत का विधि-विधान से पालन कर सकते हैं।

अनंत चतुर्दशी व्रत कथा PDF / Anant Chaturdashi Vrat Katha in Hindi PDF Download

प्राचीन काल में सुमंत नाम का एक नेक तपस्वी ब्राह्मण था। उसकी पत्नी का नाम दीक्षा था। उसकी एक परम सुंदरी धर्मपरायण तथा ज्योतिर्मयी कन्या थी। जिसका नाम सुशीला था। सुशीला जब बड़ी हुई तो उसकी माता दीक्षा की मृत्यु हो गई।

पत्नी के मरने के बाद सुमंत ने कर्कशा नामक स्त्री से दूसरा विवाह कर लिया। सुशीला का विवाह ब्राह्मण सुमंत ने कौंडिन्य ऋषि के साथ कर दिया। विदाई में कुछ देने की बात पर कर्कशा ने दामाद को कुछ ईंटें और पत्थरों के टुकड़े बांध कर दे दिए। कौंडिन्य ऋषि दुखी हो अपनी पत्नी को लेकर अपने आश्रम की ओर चल दिए। परंतु रास्ते में ही रात हो गई। वे नदी तट पर संध्या करने लगे।

सुशीला ने देखा- वहां पर बहुत-सी स्त्रियां सुंदर वस्त्र धारण कर किसी देवता की पूजा पर रही थीं। सुशीला के पूछने पर उन्होंने विधिपूर्वक अनंत व्रत की महत्ता बताई। सुशीला ने वहीं उस व्रत का अनुष्ठान किया और चौदह गांठों वाला डोरा हाथ में बांध कर ऋषि कौंडिन्य के पास आ गई।

कौंडिन्य ने सुशीला से डोरे के बारे में पूछा तो उसने सारी बात बता दी। उन्होंने डोरे को तोड़ कर अग्नि में डाल दिया, इससे भगवान अनंत जी का अपमान हुआ। परिणामत: ऋषि कौंडिन्य दुखी रहने लगे। उनकी सारी सम्पत्ति नष्ट हो गई।

इस दरिद्रता का उन्होंने अपनी पत्नी से कारण पूछा तो सुशीला ने अनंत भगवान का डोरा जलाने की बात कहीं। पश्चाताप करते हुए ऋषि कौंडिन्य अनंत डोरे की प्राप्ति के लिए वन में चले गए। वन में कई दिनों तक भटकते-भटकते निराश होकर एक दिन भूमि पर गिर पड़े।

तब अनंत भगवान प्रकट होकर बोले- ‘हे कौंडिन्य! तुमने मेरा तिरस्कार किया था, उसी से तुम्हें इतना कष्ट भोगना पड़ा। तुम दुखी हुए। अब तुमने पश्चाताप किया है। मैं तुमसे प्रसन्न हूं। अब तुम घर जाकर विधिपूर्वक अनंत व्रत करो।

चौदह वर्षपर्यंत व्रत करने से तुम्हारा दुख दूर हो जाएगा। तुम धन-धान्य से संपन्न हो जाओगे। कौंडिन्य ने वैसा ही किया और उन्हें सारे क्लेशों से मुक्ति मिल गई।’ श्रीकृष्ण की आज्ञा से युधिष्ठिर ने भी अनंत भगवान का व्रत किया जिसके प्रभाव से पांडव महाभारत के युद्ध में विजयी हुए तथा चिरकाल तक राज्य करते रहे।

अनंत चतुर्दशी पूजा विधि / Anant Chaturdashi Pooja Vidhi PDF

  • इस दिन प्रातःकाल स्नान के बाद पूजा स्थल पर कलश स्थापित करें।
  • इसके बाद कलश पर भगवान विष्णु की तस्वीर भी लगाएं।
  • एक धागे को कुमकुम, केसर और हल्दी से रंगकर अनंत सूत्र बनाएं।
  • अनंत सितरा में 14 गांठें लगी होनी चाहिए।
  • इस सूत्रो भगवान विष्णु की तस्वीर के सामने रखें।
  • अब भगवान विष्णु और अनंत सूत्र की पूजा करें और ‘अनंत संसार महासुमद्रे मग्रं समभ्युद्धर वासुदेव। अनंतरूपे विनियोजयस्व ह्रानंतसूत्राय नमो नमस्ते।।’ मंत्र का जाप करें।
  • इसके बाद अनंत सूत्र को बाजू में बांध लें।
  • माना जाता है कि इस सूत्र को धारण करने से समस्त संकटों का नाश होता है।

अनंत चतुर्दशी व्रत कथा PDF Download – शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार इस वर्ष अनंत चतुर्दशी का पर्व 9 सितंबर को पड़ रहा है। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि 19 सितंबर को सुबह 06 बजकर 07 मिनट से शुरू होकर अगले दिन 20 सितंबर को सुबह 5 बजकर 28 मिनट तक रहेगी।

इसके बाद पूर्णिमा की तिथि लग जाएगी। अनंत चतुर्दशी के पूजन का शुभ मुहूर्त नीचे दिया गया है:

  • अभिजीत मुहूर्त – 11:56 AM – 12:44 PM
  • अमृत काल – 08:14 PM – 09:50 PM
  • ब्रह्म मुहूर्त – 04:42 AM – 05:30 AM

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