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गणपती स्थापना पूजा विधि PDF

गणपती स्थापना पूजा विधि PDF Download

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गणपती स्थापना पूजा विधि PDF Details
गणपती स्थापना पूजा विधि
PDF Name गणपती स्थापना पूजा विधि PDF
No. of Pages 32
PDF Size 0.50 MB
Language English
Categoryहिन्दी | Hindi
Source pdffile.co.in
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गणपती स्थापना पूजा विधि

नमस्कार मित्रों, आज इस लेख के माध्यम से हम आप सभी के लिए गणपती स्थापना पूजा विधि PDF प्रदान करने जा रहे हैं। जो लोग गणेश चतुर्थी के दिन अपने घर में गणेश स्थापना कर रहे हैं या करना चाहते हैं उन सभी के लिए यह लेख अत्यंत ही उपयोगी एवं लाभकारी सिद्ध हो सकता है। हिन्दू धर्म में गणपती स्थापना पूजा को बहुत अधिक महत्वपूर्ण माना गया है।

यह तो आप सभी जानते ही होंगे कि सनातन हिन्दू धर्म में मनाए जाने वाले अनेकों प्रसिद्ध त्योहारों में से गणेश चतुर्थी भी सबसे लोकप्रिय एवं प्रचलित त्योहारों में से एक है। यह पर्व भारत सहित पूरे विश्वभर में बड़े ही धूम-धाम से मनाया जाता है। इस दिन अनेकों भक्त अपने-अपने घरों में गणेश स्थापना करते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस स्थापना को करने से घर में शीघ्र ही सुख, समृद्धि का आगमन होता है।

इसीलिए यदि आप भी अपने घर में गणपती स्थापना पूजा विधि-विधान से करना चाहते हैं तो आप हमारे इस लेख के द्वारा इस स्थापना की पूजा विधि को पीडीएफ प्रारूप में फ्री में डाउनलोड कर सकते हैं। इस स्थापना के दिन भगवान गणेश की विधिवत पूजा करने से भगवान गणेश अपने भक्तों को मनचाहा वरदान अति शीघ्र प्रदान करते हैं।

गणपती स्थापना पूजा विधि Download PDF

  • चौकी पर लाल या पीला कपड़ा विछाकर भगवान गणेश की मूर्ती को विराजमान करें।
  • गणेश जी के चरणों को धोएं और उन्हें जल प्रदान करें।
  • अब आचमन करें और स्नान कराएं।
  • दूध, दही, घी, शहद, शक्कर, सुगंधित तेल और फिर जल से स्नान कराएं।
  • स्नान के बाद गणेशजी को वस्त्र भेंट करें।
  • गणेशजी को वस्त्र के रुप में धोती, पट्टका और जनेऊ दें।
  • गंध का अर्पण करें।
  • इत्र भेंट कर अक्षत अर्पण करें।
  • अक्षत अर्पण के बाद पुष्पार्पण करें।
  • गणेश जी को फूलों की माला पहनाए।
  • गणेशजी को दूर्वा भेंट करें और सिंदूर का तिलक करें।
  • एक थाली में पांच दीपक रखकर गणेशजी की आरती उतारें।
  • आरती उतारने के बाद गणेशजी को नैवेद्य दें।
  • पान, नारियल, सुपारी गणेशजी को भेंट करें।
  • गणेशजी का प्रदक्षिणा करें।
  • प्रदक्षिणा करने के बाद ऊं गं गणपताय नम: का जप करें।

Ganesh (Ganpati) Sthapana Puja Vidhi Rules PDF

एक से ज्यादा मूर्ति‍ स्थापित ना करें

गणेश चतुर्थी के दिन विघ्नहर्ता भगवान गणेश जी की केवल एक ही मूर्ति‍ स्थापित करें। पौराणिक कथाओं के अनुसार एक से ज्यादा मूर्ति‍ स्थापित करने से गणेश जी की पत्नी रिद्धि सिद्धि नाराज हो जाती हैं। ऐसे में भूलकर भी मंदिर में भगवान गणेश की एक से ज्यादा मूर्ति‍ स्थापित ना करें।

मूर्ति‍ स्थापित करते समय रखें ध्यान

शास्त्रों के अनुसार बाजार से भगवान गणेश की मूर्ति‍ खरीदते समय विशेष ध्यान रखें। घर पर भगवान गणेश की वही मूर्ति‍ लाएं जिसकी सूंढ़ बांई ओर झुकी हुई हो। साथ ही यदि आप घर पर भगवान गणेश की मूर्ति‍ स्थापित करना चाहते हैं तो हमेशा बैठी हुई मुद्रा में रखें।

इस दिशा में स्थापित करें मूर्ती

वास्तु शास्त्र के अनुसार भगवान गणेश की मूर्ति‍ दक्षिण या उत्तर दिशा में स्थापित करना चाहिए। वहीं यदि आपके घर का मेन दरवाजा इस दिशा में है तो भगवान गणेश की प्रतिमा मेन गेट पर स्थापित करें। साथ ही इस बात का ध्यान रखें कि जहां पर आप भगवान गणेश की मूर्ति‍ स्थापित करें उनकी पीठ नहीं दिखनी चाहिए।

मूर्ति‍ स्थापित करने की विधि

गणपति की स्थापना करते समय सबसे पहले चौकी पर गंगा जल छिड़कें और इसे शुद्ध करें। इसके बाद चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं और उस पर अक्षत रखें। अब विघ्नहर्ता भगवान गणेश की मूर्ति‍ चौकी पर स्थापित करें। इसके बाद गंगाजल से भगवान को स्नान कराएं। मूर्ति‍ के दाईं और बाईं ओर रिद्धि सिद्धि के रूप में एक-एक सुपारी रखें। तथा गणपति के दाईं ओर कलश स्थापित करें और कलश पर एक जटा वाला नारियल रखें। इसके बाद धूप दीप कर भगवान गणेश की पूजा अर्चना करें।

गणेश स्थापना पूजन विधि मंत्र सहित PDF

भगवान गणेश जी की पूजन में वेद मंत्र का उच्चारण किया जाता है। जिन्हें वेद मंत्र न आता हो, उनकों नाम-मंत्रों से पूजन करना चाहिए।

स्नान करने के पश्चात अपने पास समस्त सामग्री रख लें फिर आसन पर पूर्व दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठकर तीन बार निम्न मंत्र बोलकर आचमन करें।

ॐ केशवाय नम:
ॐ नारायणाय नम:
ॐ माधवाय नम:

आचमन के पश्चात हाथ में जल लेकर ‘ॐ ऋषिकेशाय नम: बोलकर हाथ धो लें।

हाथ धोने के बाद पवित्री धारण करें, पवित्री के बाद बाएं हाथ में जल लेकर दाहिने हाथ से अपने ऊपर और पूजन सामग्री पर छिड़क ले।

ॐ पुण्डरीकाक्ष पुनातु, ॐ पुण्डरीकाक्ष पुनातु, ॐ पुण्डरीकाक्ष पुनातु बोलकर गणेश जी एवं अम्बिका (सुपारी में मौली लपेटकर) को स्थापित करें निम्न मंत्र बोलकर आवाहन करें।

ॐ गणेशाम्बिकाभ्यां नम:!!

फिर कामना-विशेष का नाम लेकर संकल्प ले लें, अर्थात दाहिने हाथ में जल, सुपारी, सिक्का, फूल एवं चावल लेकर जिस निमित्त पूजन कर रहे है उसका मन में उच्चारण करके थाली या गणेश जी के सामने छोड़ दें।

अब हाथ में चावल लेकर गणेश अम्बिका का ध्यान करें।

ॐ भूर्भुव:स्व: सिध्दिबुध्दिसहिताय गणपतये नम:,
गणपतिमावाहयामि, स्थापयामि, पूजयामि च!

ॐ भूर्भुव:स्व:गौर्ये नम:,गौरीमावाहयामि, स्थापयामि, पूजयामि च!

 

आसन के लिए चावल चढ़ाएं,

ॐ गणेश-अम्बिके नम:आसनार्थे अक्षतान समर्पयामि!

 

फिर स्नान के लिए जल चढ़ाएं,

ॐ गणेशाम्बिकाभ्यां नम:स्नानार्थ जलं समर्पयामि!

 

फिर दूध चढ़ाएं,

ॐ भूर्भुव:स्व:गणेशाम्बिकाभ्यां नम:,पय:स्नानं समर्पयामि!

 

फिर दही चढ़ाएं

ॐ भूर्भुव:स्व:गणेशाम्बिकाभ्यां नम:, दधिस्नानं समर्पयामि!

 

फिर घी चढ़ाएं

ॐ भूर्भुव:स्व:गणेशाम्बिकाभ्यां नम:,घृतस्नानं समर्पयामि!

 

फिर शहद चढ़ाएं।

ॐ भूर्भुव:स्व:गणेशाम्बिकाभ्यां नम:,मधुस्नानं समर्पयामि।

फिर शक्कर चढ़ाएं।

ॐ भूर्भुव:स्व:गणेशाम्बिकाभ्यां नम:,शर्करास्नानं समर्पयामि।

 

फिर पंचामृत चढ़ाएं। (दूध, दही, शहद, शक्कर एवं घी को मिलाकर)

ॐ भूर्भुव:स्व:गणेशाम्बिकाभ्यां नम:,पंचामृतस्नानं समर्पयामि!

 

फिर चंदन घोलकर चढ़ाएं।

ॐ भूर्भुव:स्व:गणेशाम्बिकाभ्यां नम:,गंधोदकस्नानं समर्पयामि!

 

फिर शुद्ध जल डालकर शुद्ध करें।

ॐ भूर्भुव:स्व:गणेशाम्बिकाभ्यां नम:,शुध्दोदकस्नानं समर्पयामि!

फिर उनको आसन पर विराजमान करें।

 

फिर वस्त्र चढ़ाएं।

ॐ भूर्भुव:स्व:गणेशाम्बिकाभ्यां नम:,वस्त्रं समर्पयामि!

फिर आचमनी जल छोड़ दें,

 

उसके बाद उपवस्त्र (मौली) चढ़ाएं।

ॐ भूर्भुव:स्व:गणेशाम्बिकाभ्यां नम:, उपवस्त्रं समर्पयामि!

 

फिर आचमनी जल छोड़ दे,

 

फिर गणेश जी को यज्ञोपवित (जनेऊ) चढ़ाएं!

ॐ भूर्भुव:स्व:गणेशाभ्यां नम:यज्ञोपवितं समर्पयामि!

 

फिर आचमनी जल छोड़ दें।

फिर चन्दन लगाएं।

ॐ भूर्भुव:स्व:गणेशाम्बिकाभ्यां नम:,चंदनानुलेपनं समर्पयामि!

 

फिर चावल चढ़ाएं।

ॐ भूर्भुव:स्व:गणेशाम्बिकाभ्यां नम:,अक्षतान समर्पयामि!

 

फिर फूल-फूलमाला चढ़ाएं।

ॐ भूर्भुव:स्व:गणेशाम्बिकाभ्यां नम:,पुष्पमालां समर्पयामि!

 

फिर दूर्वा चढ़ाएं।

ॐ भूर्भुव:स्व:गणेशाम्बिकाभ्यां नम:, दुर्वाकरान समर्पयामि।

 

फिर सिन्दूर चढ़ाएं!

ॐ भूर्भुव:स्व:गणेशाम्बिकाभ्यां नम:, सिन्दूरं समर्पयामि!

 

फिर अबीर, गुलाल, हल्दी आदि चढ़ाएं।

ॐ भूर्भुव:स्व:गणेशाम्बिकाभ्यां नम:, नानापरिमलद्रव्याणि समर्पयामि!

 

फिर सुगंधित (इत्र) चढ़ाएं।

ॐ भूर्भुव:स्व:गणेशाम्बिकाभ्यां नम:, सुंगधिद्रव्यं समर्पयामि!

 

फिर धूप-दीप दिखाएं।

ॐ भूर्भुव:स्व:गणेशाम्बिकाभ्यां नम:,धूप-दीपं दर्शयामि!

फिर ऋषि केशाय नम: बोलकर हाथ धोकर नैवेद्य लगाए।

 

ॐ प्राणाय स्वाहा! ॐ अपानाय स्वाहा! ॐ समानाय स्वाहा!

ॐ भूर्भुव:स्व:गणेशाम्बिकाभ्यां नम:, नैवेद्यं निवेदयामि!

 

फिर ऋतुफल चढ़ाएं।

ॐ भूर्भुव:स्व:गणेशाम्बिकाभ्यां नम:,ऋतुफलानि समर्पयामि!

फिर लौंग-इलायची, सुपारी अर्पित करें।

फिर दक्षिणा चढ़ाकर भगवान गणेश जी की आरती करें।

फिर परिक्रमा करें! तत्पश्चात भगवान गणेश-अम्बिका से प्रार्थना करें!

फिर दाहिने हाथ में जल लेकर पृथ्वी पर छोड़ दें।

यह बोलकर अन्य पूज्य गणेशाम्बिके प्रीयेताम न मम!

इस प्रकार श्री गणेश जी की पूजन कर अपने संपूर्ण मनोरथ पूर्ण करें।

गणेश चतुर्थी 2022 शुभ मुहूर्त / Ganesh Chaturthi 2022 Shubh Muhurat

इस बार गणेश चतुर्थी 30 अगस्त 2022 मंगलवार को दोपहर 3 बजकर 33 मिनट से शुरू होकर अगले दिन 31 अगस्त 2022 बुधवार को दोपहर 3 बजकर 22 मिनट पर समाप्त होगी।

गणेश स्थापना मुहूर्त – सुबह 11.05 – दोपहर 1.38 (31 अगस्त 2022)

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