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हरछठ व्रत कथा | Harchat Katha PDF in Hindi

हरछठ व्रत कथा | Harchat Katha Hindi PDF Download

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हरछठ व्रत कथा | Harchat Katha PDF Details
हरछठ व्रत कथा | Harchat Katha
PDF Name हरछठ व्रत कथा | Harchat Katha PDF
No. of Pages 5
PDF Size 0.57 MB
Language Hindi
Categoryहिन्दी | Hindi
Source pdffile.co.in
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हरछठ व्रत कथा | Harchat Katha Hindi

नमस्कार मित्रों, आज इस लेख के माध्यम से हम आप सभी के लिए हरछठ व्रत कथा / Harchat Katha in Hindi PDF प्रदान करने जा रहे हैं। हिन्दू धर्म में हरछठ व्रत को बहुत अधिक महत्वपूर्ण एवं फलदायक व्रत माना जाता है। हरछठ को हलषष्ठी या ललही छठ नाम से भी जाना जाता है। यह व्रत भगवान श्री कृष्ण के बड़े भाई बलराम जी को समर्पित हैं। इस दिन सुहागिन स्त्रियाँ विधि-विधान से बलराम जी की पूजा करती हैं तथा व्रत का श्रद्धापूर्वक पालन करती हैं।

यह त्यौहार बलराम जी के जन्मदिन के उपलक्ष में मनाया जाता हैं। बलराम जी का प्रिय शस्त्र हल था इसीलिए बलराम भगवान को हलधर के नाम से भी जाना जाता हैं। इस दिन हल की पूजा की जाती हैं साथ ही बैल की भी पूजा की जाती हैं। इसीलिए हरछठ को किसानो का मुख्य त्यौहार भी कहते हैं। हिन्दू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हरछठ के व्रत का पालन सुहागिन एवं पुत्रवती स्त्रियाँ करती हैं।

विशेष रूप से छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में सुहागिन स्त्रियाँ बड़े ही भक्ति-भाव से इस व्रत का पालन करती हैं। यह चमत्कारी व्रत को पुत्रों की दीर्घायु तथा सम्पन्नता के लिए किया जाता है। जो गर्भवती स्त्रियॉं हैं और पुत्री की छह रखती हैं वह भी इस व्रत का पालन कर सकती हैं तथा व्रत के दिन हरछठ व्रत की कथा अवश्य पढ़ें या सुनें क्योंकि बिना कथा पढ़ें या सुने व्रत का पूर्ण लाभ नहीं मिलता।

हरछठ व्रत की कथा / Harchat Vrat Katha in Hindi PDF

  • प्राचीन काल में एक ग्वालिन थी। उसका प्रसवकाल अत्यंत निकट था। एक ओर वह प्रसव से व्याकुल थी तो दूसरी ओर उसका मन गौ-रस (दूध-दही) बेचने में लगा हुआ था। उसने सोचा कि यदि प्रसव हो गया तो गौ-रस यूं ही पड़ा रह जाएगा। यह सोचकर उसने दूध-दही के घड़े सिर पर रखे और बेचने के लिए चल दी किन्तु कुछ दूर पहुंचने पर उसे असहनीय प्रसव पीड़ा हुई।
  • वह एक झरबेरी की ओट में चली गई और वहां एक बच्चे को जन्म दिया। वह बच्चे को वहीं छोड़कर पास के गांवों में दूध-दही बेचने चली गई। संयोग से उस दिन हलषष्ठी थी। गाय-भैंस के मिश्रित दूध को केवल भैंस का दूध बताकर उसने सीधे-सादे गांव वालों में बेच दिया।
  • उधर जिस झरबेरी के नीचे उसने बच्चे को छोड़ा था, उसके समीप ही खेत में एक किसान हल जोत रहा था। अचानक उसके बैल भड़क उठे और हल का फल शरीर में घुसने से वह बालक मर गया।
  • इस घटना से किसान बहुत दुखी हुआ, फिर भी उसने हिम्मत और धैर्य से काम लिया। उसने झरबेरी के कांटों से ही बच्चे के चिरे हुए पेट में टांके लगाए और उसे वहीं छोड़कर चला गया। कुछ देर बाद ग्वालिन दूध बेचकर वहां आ पहुंची। बच्चे की ऐसी दशा देखकर उसे समझते देर नहीं लगी कि यह सब उसके पाप की सजा है।
  • वह सोचने लगी कि यदि मैंने झूठ बोलकर गाय का दूध न बेचा होता और गांव की स्त्रियों का धर्म भ्रष्ट न किया होता तो मेरे बच्चे की यह दशा न होती। अतः मुझे लौटकर सब बातें गांव वालों को बताकर प्रायश्चित करना चाहिए। ऐसा निश्चय कर वह उस गांव में पहुंची, जहां उसने दूध-दही बेचा था। वह गली-गली घूमकर अपनी करतूत और उसके फलस्वरूप मिले दंड का बखान करने लगी।
  • तब स्त्रियों ने स्वधर्म रक्षार्थ और उस पर रहम खाकर उसे क्षमा कर दिया और आशीर्वाद दिया। बहुत-सी स्त्रियों द्वारा आशीर्वाद लेकर जब वह पुनः झरबेरी के नीचे पहुंची तो यह देखकर आश्चर्यचकित रह गई कि वहां उसका पुत्र जीवित अवस्था में पड़ा है।
  • तभी उसने स्वार्थ के लिए झूठ बोलने को ब्रह्म हत्या के समान समझा और कभी झूठ न बोलने का प्रण कर लिया।

हलछठ व्रत पूजा विधि / Harchat Pooja Vidhi in Hindi

  • हल छठ व्रत में हल से जुती हुई अनाज और सब्जियों का इस्तेमाल नहीं किया जाता।
  • इस व्रत में उन्हीं चीजों का सेवन किया जाता है जो तालाब या मैदान में पैदा होती हैं। जैसे तिन्नी का चावल, केर्मुआ का साग, पसही के चावल आदि।
  • हल छठ व्रत में भैंस का दूध, दही और घी का प्रयोग किया जाता है।
  • इस व्रत में गाय के किसी भी उत्पाद जैसे दूध, दही, गोबर आदि का इस्तेमाल वर्जित माना जाता है।
  • हरछठ व्रत के दिन घर या बाहर कहीं भी दीवाल पर भैंस के गोबर से छठ माता का चित्र बनाते हैं।
  • तत्पश्चात गणेश और माता गौरी की श्रद्धापूर्वक पूजा करते हैं।
  • इसके बाद महिलाएं घर में ही तालाब बनाकर, उसमें झरबेरी, पलाश और कांसी के पेड़ लगाती हैं।
  • तत्पश्चात वहां पर बैठकर पूजा अर्चना करती हैं और हल षष्ठी की कथा सुनती हैं।
  • अंत में सुहागिन स्त्रियाँ भगवान को प्रणाम करके पूजा समाप्त करती हैं एवं आशीर्वाद ग्रहण करती हैं।

हर छठ की पूजा सामग्री / Hal Chhath Puja Samagri

क्र. सामग्री
1. भेंस का दूध, घी, दही गोबर.
2. महुये का फल, फुल एवम पत्ते
3. जवार की धानी
4. ऐपन
5. कुल्वे (छोते से मिट्टी के कुल्हड़ )
6. देवली छेवली (बांस और महुये के पत्ते से बना होता हैं)

हरछठ व्रत की आरती / Harchat Vrat Aarti

जय छठी मैया

ऊ जे केरवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए।
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए॥जय॥

हरछठ व्रत 2022 / Harchat Vrat 2022 Date

इस वर्ष हलछठ या हरछठ व्रत 17 अगस्त को मनाया जाएगा। हलछठ के दिन सुहागिन महिलाएं पुत्र के अनुसार ही छह छोटे मिट्टी के बर्तन या पात्र में पांच या सात अनाज या मेवा भरती हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रति व्रश भाद्रपद या भादो मास की कृष्ण पक्ष की पष्ठी तिथि को हलछठ या ललही छठ का त्योहार बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम का जन्म हुआ था इसीलिए इस दिन सुहागिन स्त्रियाँ अपने पुत्र की लंबी आयु और समृद्धि की कामना के लिए हलछठ का उपवास रखती हैं।

हरछठ का महत्व / Har Chhath Vrat Ka Mahatva

  • कहा जाता हैं जब बच्चा पैदा होता हैं तब से लेकर छः माह तक छठी माता बच्चे की देखभाल करती हैं।
  • उसे हँसाती हैं, उसका पूरा ध्यान रखती हैं।
  • बच्चे के जन्म के छः दिन बाद छठी की पूजा भी की जाती हैं।
  • इसीलिए हर छठ माता को बच्चों की रक्षा करने वाली माता भी कहा जाता हैं।

हरछठ व्रत का शुभ मुहूर्त

षष्ठी तिथि प्रारम्भ – अगस्त 16, 2022 को 08:17 पी एम बजे

षष्ठी तिथि समाप्त – अगस्त 17, 2022 को 08:24 पी एम बजे

हरछठ व्रत कब है?

भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को हलषष्ठी अथवा हरछठ मनाई जाएगी। इस वर्ष हरछठ या हलषष्ठी व्रत एवं पूजन विधान दिनांक 17 अगस्त को होगा। इस दिन महिलाएं संतान प्राप्ति के लिए एवं अपनी संतान की रक्षा के लिए व्रत और उपवास करती हैं।

हरछठ कब मनाई जाएगी?

हरछठ भाद्रपद की छठ के दिन मनाया जाता है अर्थात रक्षाबंधन के 6 दिन बाद इस व्रत का पालन बड़े ही विधि-विधान से किया जाता है।

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