हरियाली तीज व्रत कथा | Hariyali Teej Vrat Katha PDF in Hindi

हरियाली तीज व्रत कथा | Hariyali Teej Vrat Katha Hindi PDF Download

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हरियाली तीज व्रत कथा | Hariyali Teej Vrat Katha PDF Details
हरियाली तीज व्रत कथा | Hariyali Teej Vrat Katha
PDF Name हरियाली तीज व्रत कथा | Hariyali Teej Vrat Katha PDF
No. of Pages 15
PDF Size 1.54 MB
Language Hindi
Categoryहिन्दी | Hindi
Source pdffile.co.in
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हरियाली तीज व्रत कथा | Hariyali Teej Vrat Katha Hindi

नमसकार मित्रों, आज इस लेख के माध्यम से हम आप सभी के लिए हरियाली तीज की कथा / Hariyali Teej Katha in Hindi PDF प्रदान करने जा रहे हैं। हिन्दू धर्म में हरियाली तीज के पर्व की बहुत अधिक मान्यता है। हरियाली तीज का पर्व श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को बड़े ही धूम-धाम से मनाया जाता है। हरियाली तीज का त्यौहार माता पार्वती एवं शिव जी को समर्पित होता है।

हरियाली तीज को छोटी तीज या श्रावण तीज के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन माता पार्वती व भगवान शंकर का पूजन श्रद्धापूर्वक किया जाता है। हिन्दू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हरियाली तीज के दिन माता पार्वती की कठोर तपस्या का फल उन्हें मिला था। इस दिन माता पार्वती को भगवान शिव ने दर्शन दिए थे और उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया था।

इसलिए हरियाली तीज का दिन माता पार्वती को अत्यंत ही प्रिय है। इसीलिए इस दिन सुहागिन स्त्रियाँ अपने सुहाग की रक्षा के लिए माता गौरी व भगवान शंकर की पूजा करती हैं। ऐसा माना जाता है कि जिन कुँवारी कन्याओं का किसी बाधा के कारण विवाह नहीं हो पा रहा हो अगर वह हरियाली तीज का व्रत पूरे भक्ति-भाव से करें तो उनकी इस समस्या का निवारण हो सकता है। माता पार्वती व शिव जी का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए आप भी हरियाली तीज का व्रत पूरे श्रद्धा-भाव से अवश्य करें साथ ही हरियाली तीज की कथा भी अवश्य पढ़ें।

हरियाली तीज व्रत कथा PDF / Hariyali Teej Vrat Katha Hindi PDF

भगवान भोलेनाथ माता पार्वती को अपना पूर्व जन्म याद दिलाते हुए कहते हैं, कि हे पार्वती ! तुमने मुझे पति के रूप में पाने के लिए वर्षों तक कठोर तप किया। अन्न और जल का भी त्याग कर दिया और सर्दी, गर्मी, बरसात जैसे मौसम की भी कोई फिक्र नहीं की। उसके बाद तुम्हें वर के रूप में मैं प्राप्त हुआ।

महादेव कथा सुनाते हुए कहते हैं कि हे पार्वती ! एक बार नारद मुनि तुम्हारे घर पधारे और उन्होंने तुम्हारे पिता से कहा कि मैं विष्णुजी के भेजने पर यहां आया हूं। भगवान विष्णु स्वयं आपकी तेजस्वी कन्या पार्वती से विवाह करना चाहते हैं। नारद मुनि की बात सुनकर पर्वतराज बेहद प्रसन्न हुए और उन्होंने शादी के इस प्रस्ताव को तुरंत स्वीकार कर लिया। लेकिन जब तुम्हारे पिता पर्वतराज ने ये बात तुम्हें बताई तो तुम बहुत दुखी हुईं।

भोलेनाथ कथा सुनाते हुए आगे कहते हैं कि जब तुमने अपनी सखी को यह बात बताई तो उसने घननघोर जंगल में तुम्हें तप करने की सलाह दी। सखी की बात मानकर तुम मुझे पति के रूप में प्राप्त करने के लिए जंगल में एक गुफा के अंदर रेत की शिवलिंग बनाकर तप करने लगीं।  शिवजी माता पार्वती से आगे कहते हैं कि तुम्हारे पिता पर्वतराज ने तुम्हारी खोज में धरती और पाताल एक कर दिया, लेकिन तुम्हें ढूंढ नहीं पाए।

तुम गुफा में सच्चे मन से तप करने में लगी रहीं। सावन मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर प्रसन्न होकर मैंने तुम्हें दर्शन दिए और तुम्हारी मनोकामना को पूरा करने का वचन देते हुए तुम्हें पत्नी के रूप में स्वीकार कर लिया। इसके बाद तुम्हारे पिता भी ढूंढते हुए गुफा तक पहुंच गए।  तुमने अपने पितासे कहा कि मैं आपके साथ तभी चलूंगी, जब आप मेरा विवाह शिव के साथ करवाएंगे।

तुम्हारी हठ के आगे पिता की एक न चली और उन्होंने ये विवाह करवाने के लिए हामी भर दी। शिव जी आगे कहते हैं कि श्रावण तीज के दिन तुम्हारी इच्छा पूरी हुई और तुम्हारे कठोर तप की वजह से ही हमारा विवाह संभव हो सका।

शिव जी ने कहा कि जो भी महिला श्रावणी तीज पर व्रत रखेगी, विधि विधान से पूजा करेगी, तुम्हारी इस कथा का पाठ सुनेगी या पढ़ेगी, उसके वैवाहिक जीवन के सारे संकट दूर होंगे और उसकी मनोकामना मैं जरूर पूरी करूंगा।

हरियाली तीज पूजा विधि / Hariyali Teej Puja Vidhi in Hindi

  • हरियाली तीज के व्रत में भगवान शिव और माता पार्वती की पूर्ण विधि-विधान से पूजा अर्चना करनी चाहिए।
  • इस दिन ब्रह्म मुहूर्त के दौरान (सूर्योदय से लगभग दो घंटे पहले) जल्दी उठें।
  • सुबह जल्दी उठने के बाद स्नान करें और पूजा के लिए हरे रंग के कपड़े पहनें।
  • पूजा के लिए चौकी को गंगाजल से साफ करें।
  • चौकी को सफेद या लाल कपड़े से ढक दें।
  • मिट्टी से भगवान शिव, देवी पार्वती और भगवान गणेश की मूर्तियां बनाएं।
  • मूर्तियाँ न होने पर आप तस्वीर अथवा प्रतिमा का भी उपयोग कर सकते हैं।
  • चौकी पर भगवान शिव और पार्वती की मूर्ति या प्रतिमा रखें।
  • एक तेल (तिल या सरसों) या घी का दीपक जलाकर देवताओं के दाहिनी ओर रखें।
  • भगवान गणेश का आह्वान करें और उनका आशीर्वाद लें।
  • इसके बाद मूर्ति के सामने कुछ अक्षत् रखें और फिर चारों ओर मौली के साथ एक कलश रखें।
  • कलश में सुपारी, हल्दी, कुमकुम और पानी डालें।
  • फिर पान के पत्ते या आम के पेड़ के पत्तों का प्रयोग करें और कलश में डाल दें।
  • फिर पंचपात्र में से थोड़ा सा पानी हाथ में लें।
  • फिर भगवान शिव और पार्वती के चरणों में जल चढ़ाकर पूजा आरंभ करें।
  • चंदन लगाएं, फिर भगवान शिव को धतूरा और सफेद मुकुट के फूल और बेलपत्र और देवी पार्वती को गुलाब का फूल चढ़ाएं।
  • इस दिन आप देवी पार्वती को सुहाग सामग्री चढ़ा सकते हैं।
  • फिर नैवेद्य या भोग अर्पित करें।
  • अगरबत्ती और धूप-दीप प्रज्वलित करें।
  • तत्पश्चात हरियाली तीज की व्रत कथा का पाठ करें।
  • अंत में आरती गाकर पूजा का समापन करें।
  • आरती के बाद अपने तथा अपने परिवार के लिए आशीर्वाद ग्रहण करें।

हरियाली तीज पूजा सामग्री / Hariyali Teej Puja Samagri

1. काली मिट्टी या रेत,
2. चौकी,
3. लाल कपड़ा,
4. केले के पत्ते,
5. कच्चा सूत,
6. धतूरा,
7. शमी पत्र,
8.  बेलपत्र,
9. फूल,
10. भांग,
11. दूर्वा,
12. तांबे का कलश,
13. गंगाजल,
14. दूध,
15. दही,
16. घी,
17. शहद,
18. चीनी,
19. पंचामृत,
20. अक्षत,
21. जनेऊ,
22. सुपारी,
23. अबीर,
24. गुलाल,
25. नारियल,
26. सफेद चंदन,
27. तेल,
28. कपूर,
29. फल,
30. मिठाई,
31. दीपक,
सोलह श्रृंगार में
1. हरे रंग की साड़ी,
2. बिंदी,
3. सिंदूर,
4. कुमकुम,
5. हरी चूड़ियां,
6. मेहंदी,
7. शीशा,
8. कंघी,
9. काजल,
10. बिछिया
11. इत्र

पार्वती माता की आरती / Parvati Mata Ki Aarti Lyrics in Hindi

ॐ जय पार्वती माता मैया जय पार्वती माता
ब्रह्म सनातन देवी शुभ फल की दाता
ॐ जय पार्वती माता
ॐ जय पार्वती माता मैया जय पार्वती माता
ब्रह्म सनातन देवी शुभ फल की दाता
ॐ जय पार्वती माता

अरिकुल पद्म विनाशिनि जय सेवक त्राता
जग जीवन जगदम्बा, हरिहर गुण गाता
ॐ जय पार्वती माता

सिंह का वाहन साजे, कुण्डल है साथा
देव बंधू जस गावत, नृत्य करत ताथा
ॐ जय पार्वती माता

सतयुग रूपशील अतिसुन्दर, नाम सती कहलाता
हेमांचल घर जन्मी, सखियन संग राता
ॐ जय पार्वती माता

शुम्भ निशुम्भ विदारे, हेमांचल स्थाता
सहस्त्र भुजा तनु धरि के, चक्र लियो हाथा
ॐ जय पार्वती माता

सृष्टि रूप तुही जननी शिवसंग रंगराता
नन्दी भृंगी बीन लाही है हाथन मदमाता
ॐ जय पार्वती माता

देवन अरज करत हम कवचित को लाता
गावत दे दे ताली, मन में रंगराता
ॐ जय पार्वती माता

श्री प्रताप आरती मैया की, जो कोई गाता
सदा सुखी नित रहता, सुख सम्पत्ति पाता
ॐ जय पार्वती माता

ॐ जय पार्वती माता मैया जय पार्वती माता
ब्रह्म सनातन देवी शुभ फल की दाता
ॐ जय पार्वती माता

भगवान शिव की आरती लिरिक्स / Bhagwan Shiv Ki Aarti PDF

।। शिव आरती ।।

ॐ जय शिव ओंकारा स्वामी हर शिव ओंकारा, ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अर्द्धांगी धारा ।।
ॐ हर हर हर महादेव ।।

एकानन चतुरानन पंचानन राजे, हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे ।।
ॐ हर हर हर महादेव ।।

दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे, तीनो रूप निरखता त्रिभुवन जन मोहे ।।
ॐ हर हर हर महादेव ।।

अक्षमाला बनमाला रूण्डमाला धारी, चंदन मृगमद चंदा भाले शुभकारी ।।
ॐ हर हर हर महादेव ।।

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघाम्बर अंगे, सनकादिक ब्रम्हादिक भूतादिक संगे ।।
ॐ हर हर हर महादेव ।।

कर मध्ये कमण्डलु चक्र त्रिशूल धर्ता, जगकरता जगहरता जगपालन कर्ता ।।
ॐ हर हर हर महादेव ।।

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका, प्रणवाक्षर के मध्ये यह तीनो एका ।।
ॐ हर हर हर महादेव ।।

श्री त्रिगुणत्मक स्वामी जी की आरती जो कोइ नर गावे,
कहत शिवानन्द स्वामी मनवान्छित फल पावे ।।
ॐ हर हर हर महादेव ।।

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी हर शिव ओंकारा,
स्वामी पार्वती का प्यारा, स्वामी पी के भंगप्याला,
स्वामी रहते मतवाला, जटा में गंग विराजे,
मस्तक पर चन्द्रमा साजे, ओढ़े मृगछाला ।।
ॐ हर हर हर महादेव ।।

हरियाली तीज पर शृंगार का महत्व

  • हरियाली तीज का दिन सुहाग की लंबी आयु और सुहाग के साथ बेहतर जीवन की कामना के लिए रखा जाता है।
  • इसलिए इस दिन महिलाओं के लिए शृंगार का खास महत्व माना गया है।
  • इस दिन सुहागिन स्त्रियाँ सोलह शृंगार करती हैं।
  • हरियाली तीज के दिन कुंवारी कन्याएं भी शृंगार से सजती संवरती हैं।
  • तत्पश्चात महादेव और माता पार्वती का पूजन किया जाता है।
  • गांवों में हरियाली तीज के दिन झूला झूलने का विशेष महत्व है इसीलिए महिलाएं इस दिन झूले झूलती हैं।
  • झूला झूलने के अतिरिक्त इस दिन महिलाओं द्वारा कजरी गीत भी गाए जाते हैं।

हरियाली तीज व्रत के लाभ

  • मान्यताओं के अनुसार हरियाली तीज का व्रत भगवान शिव तथा पार्वती जी के पुर्नमिलन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।
  • ऐसी मान्यता है कि कल्याणकारी भगवान शिव को अपने पति रूप में पाने के लिए माता पार्वती ने 107 जन्म लिए थे।
  • अंत में माँ पार्वती के कठोर तप के कारण उनके 108वें जन्म में भगवान शंकर ने माता पार्वती को अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार कर लिया था।
  • हरियाली तीज का व्रत हृदयपूर्वक करने से माता पार्वती प्रसन्न होकर स्त्रियों को उनके पति की लम्बी उम्र का आशीर्वाद प्रदान करती हैं।

हरियाली तीज व्रत पूजा मुहूर्त:

हरियाली तीज रविवार, जुलाई 31, 2022 को
तृतीया तिथि प्रारम्भ – जुलाई 31, 2022 को 02:59 ए एम बजे
तृतीया तिथि समाप्त – अगस्त 01, 2022 को 04:18 ए एम बजे

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