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हरतालिका तीज व्रत कथा | Hartalika Teej Vrat Katha Book PDF in Hindi

हरतालिका तीज व्रत कथा | Hartalika Teej Vrat Katha Book Hindi PDF Download

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हरतालिका तीज व्रत कथा | Hartalika Teej Vrat Katha Book PDF Details
हरतालिका तीज व्रत कथा | Hartalika Teej Vrat Katha Book
PDF Name हरतालिका तीज व्रत कथा | Hartalika Teej Vrat Katha Book PDF
No. of Pages 3
PDF Size 1.19 MB
Language Hindi
Categoryहिन्दी | Hindi
Source pdffile.co.in
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हरतालिका तीज व्रत कथा | Hartalika Teej Vrat Katha Book Hindi

नमस्कार पाठकों, इस लेख के माध्यम से आप हरतालिका तीज व्रत कथा बुक इन हिंदी पीडीएफ / Hartalika Teej Vrat Katha Book in Hindi PDF प्राप्त कर सकते हैं। जैसा कि आप जानते ही होंगे भारत उत्सवों व पर्वों की भूमि है। यहाँ दिन प्रतिदिन किसी न किसी प्रकार के उत्सव व पर्व आते रहते हैं। यह उत्सव हीं सनातन संस्कृति की पहचान हैं।

हरतालिका तीज भी भारत में मनाए जाने वाले सर्वाधिक प्रचलित त्यौहारों में से एक हैं। हिन्दू लोकमान्यताओं के अनुसार जो भी विवाहित स्त्री  अपने हृदय में पूर्ण श्रद्धाभाव रखते हुये निष्ठा व संकल्प के साथ यदि हरतालिका व्रत का पालन करती है तो उस स्त्री का पति दीर्घायु होता है तथा उसे वैवाहिक जीवन में किसी भी प्रकार का कष्ट उत्पन्न नही होता है।

हिन्दू पौराणिक कथाओं की मानें तो सर्वप्रथम माता पार्वती ने यह व्रत भगवान भोलेनाथ को अपने पति के रूप में प्राप्त करने के लिए धारण किया था। इस व्रत के नियमित व विधिवत पालन व माता पार्वती की अनंत निष्ठा के फलस्वरूप उन्हें भगवान शिव शंकर की प्राप्ति हुई। अतः इस व्रत का पालना सुयोग्य वर की प्राप्ति हेतु भी किया जाता है।

हरतालिका तीज व्रत कथा बुक इन हिंदी पीडीएफ / Hartalika Teej Vrat Katha Book in Hindi PDF

कथा के अऩुसार माता पार्वती ने भगवान शिव के लिए कठोर तपस्या की। माता पार्वती का बचपन से ही माता पार्वती का भगवान शिव को लेकर अटूट प्रेम था। माता पार्वती अपने कई जन्मों से भगवान शिव को पति के रूप में पाना चाहती थी। इसके लिए उन्होंने हिमालय पर्वत के गंगा तट पर बचपन से ही कठोर तपस्या शुरू की। माता पार्वती ने इस तप में अन्न और जल का त्याग कर दिया था। खाने में वे मात्र सूखे पत्ते चबाया करती थीं। माता पार्वती की ऐसी हालत को देखकर उनके माता-पिता बहुत दुखी हो गए थे।

एक दिन देवऋषि नारद भगवान विष्णु की तरफ से पार्वती जी के विवाह के लिए प्रस्ताव लेकर उनके पिता के पास गए। माता पार्वती के माता और पिता को उनके इस प्रस्ताव से बहुत खुशी हुई। इसके बाद उन्होंने इस प्रस्ताव के बारे में मां पार्वती को सुनाया। माता पार्वती इश समाचार को पाकर बहुत दुखी हुईं, क्योंकि वो अपने मन में भगवान शिव को अपना पति मान चुकी थीं। माता पार्वती ने अपनी सखी को अपनी समस्या बताई। माता पार्वती ने यह शादी का प्रस्ताव ठुकरा दिया। पार्वती जी ने अपनी एक सखी से कहा कि वह सिर्फ भोलेनाथ को ही पति के रूप में स्वीकार करेंगी। सखी की सलाह पर पार्वती जी ने घने वन में एक गुफा में भगवान शिव की अराधना की।

भाद्रपद तृतीया शुक्ल के दिन हस्त नक्षत्र में पार्वती जी ने मिट्टी से शिवलिंग बनकर विधिवत पूजा की और रातभर जागरण किया। पार्वती जी के तप से खुश होकर भगवान शिव ने माता पार्वती को पत्नी के रूप में स्वीकार कर लिया था। कहा जाता है कि जिस कठोर कपस्या से माता पार्वती ने भगवान शिव को पाया, उसी तरह इस व्रत को करने वाली सभी महिलाओं के सुहाग की उम्र लंबी हो और उनका वैवाहिक जीवन खुशहाल रहे। माना जाता है की जो इस व्रत को पूरे विधि-विधान और श्रद्धापूर्वक व्रत करती है, उन्हें इच्छानुसार वर की प्राप्ति होती है।

हरतालिका तीज पूजा विधि / Hartalika Teej Vrat Puja Vidhi PDF

  • हरतालिका पूजन प्रदोष काल में किया जाता हैं।
  • हरतालिका पूजन के लिए शिव, पार्वती एवं गणेश जी की प्रतिमा बालू रेत अथवा काली मिट्टी से हाथों से बनाई जाती हैं।
  • फुलेरा बनाकर उसे सजाया जाता हैं, उसके भीतर रंगोली डालकर उस पर पटा अथवा चौकी रखी जाती हैं।
  • चौकी पर एक सातिया बनाकर उस पर थाल रखते हैं।
  • उस थाल में केले के पत्ते को रखते हैं।
  • तीनो प्रतिमाओं को केले के पत्ते पर आसीत किया जाता हैं।
  • सर्वप्रथम कलश बनाया जाता हैं जिसके लिए एक लौटा अथवा घड़ा लेते हैं, उसके उपर श्रीफल रखते हैं अथवा एक प्रज्वलित दीप रखते हैं।
  • घड़े के मुंह पर लाल कलावा बाँधते हैं। घड़े पर सातिया बनाकर उर पर अक्षत चढ़ाया जाता हैं।
  • कलश का पूजन किया जाता हैं। सर्वप्रथम जल अर्पित करते हैं, कालवा बाँधते हैं, कुमकुम, हल्दी चावल चढ़ाते हैं तथा पुष्प अर्पित करते हैं।
  • तत्पश्चात शिव जी की पूजा – अर्चना जी जाती हैं।
  • कलश पूजन के उपरांत गणेश जी का पूजन किया जाता है।
  • अब माता गौरी की पूजा की जाती हैं तथा उन्हें सम्पूर्ण श्रृंगार अर्पित किया जाता हैं।
  • तदोपरान्त हरतालिका व्रत की कथा पढ़ी जाती तथा उसका श्रवण किया जाता हैं।
  • तत्पश्चात सभी मिलकर आरती की जाती हैं जिसमे सर्प्रथम गणेश जी कि आरती फिर शिव जी की आरती फिर माता गौरी की आरती की जाती हैं।
  • पूजा के उपरांत भगवान की परिक्रमा की जाती हैं।
  • रात्री जागरण कर पञ्च पूजा एवं आरती की जाती हैं।
  • सुबह अंतिम पूजन के पश्चात माता गौरा को जो सिंदूर अर्पित किया जाता हैं।
  • उस सिंदूर से सुहागन स्त्री सुहाग लेती हैं।
  • ककड़ी एवं हलवे का भोग लगाया जाता हैं एवं उसी ककड़ी का सेवन कर उपवास तोडा जाता हैं।
  • अंत में सभी सामग्री को एकत्र कर पवित्र नदी एवं कुण्ड में विसर्जित किया जाता हैं।

हरतालिका तीज पूजा सामग्री लिस्ट PDF / Hartalika Teej Puja Samagri PDF

क्रमांक

सामग्री 

1. भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की मिट्टी अथवा बालू से निर्मित प्रतिमाएँ।
2. पीला वस्त्र
3. रोली
4. केले का पत्ता
5. सुपारी
6. बेलपत्र
7. धतूरा
8. शमी के पत्ते
9. दूर्वा
10. कलश
11. अक्षत
12. घी
13. कपूर
14. गंगाजल
15. दही शहद
16. जनेऊ

16 श्रृंगार की सामग्री

1. सिंदूर
2. बिंदिया
3. मेंहदी
4. कुमकुम
5. काजल
6. लाल जोड़ा
7. गजरा
8. मांग टीका
9. नथ
10. झुमके
11. मंगल सूत्र
12. बाजूबंद
13. चूड़ियां
14. कमरबंद
15. बिछुआ
16. पायल

हरतालिका तीज व्रत का महत्व / Hartalika Teej Vrat Ka Mahatva

मान्यता है कि इस व्रत को रखने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इस दिन सुहागिन महिलाएं निर्जला और निराहार व्रत रखकर पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं। हरतालिका तीज व्रत को सुहागिनों के अलावा कुंवारी कन्याएं रखती हैं। मान्यता है कि इस व्रत के पुण्य प्रभाव से कुंवारी कन्याओं को मनचाहा वर मिलता है। रिश्तों के लगाव का यह पारंपरिक पर्व जीवन को नए उमंग-उल्लास और प्रेम के रंग में रंग देता है।

हरतालिका तीज 2022 पूजा मुहूर्त / Hartalika Teej 2022 Puja Muhurt

हरितालिका तीज मंगलवार, अगस्त 30, 2022 को

प्रातःकाल हरितालिका पूजा मुहूर्त – 05:58 ए एम से 08:31 ए एम

अवधि – 02 घण्टे 33 मिनट्स

तृतीया तिथि प्रारम्भ – अगस्त 29, 2022 को 03:20 पी एम बजे

तृतीया तिथि समाप्त – अगस्त 30, 2022 को 03:33 पी एम बजे

हरतालिका तीज पूजा मंत्र / Hartalika Teej 2022 Puja Mantra

नमस्त्यै शिवायै शर्वाण्यै सौभाग्यं संतति शुभा।

प्रयच्छ भक्तियुक्तानां नारीणां हरवल्लभे।

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