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जितिया व्रत पूजा विधि PDF | Jitiya Vrat Puja Vidhi PDF in Hindi

जितिया व्रत पूजा विधि PDF | Jitiya Vrat Puja Vidhi Hindi PDF Download

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जितिया व्रत पूजा विधि PDF | Jitiya Vrat Puja Vidhi PDF Details
जितिया व्रत पूजा विधि PDF | Jitiya Vrat Puja Vidhi
PDF Name जितिया व्रत पूजा विधि PDF | Jitiya Vrat Puja Vidhi PDF
No. of Pages 5
PDF Size 1.42 MB
Language Hindi
Categoryहिन्दी | Hindi
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जितिया व्रत पूजा विधि PDF | Jitiya Vrat Puja Vidhi Hindi

नमस्कार मित्रों, आज इस लेख के माध्यम से हम आप सभी के लिए जितिया (जीवित्पुत्रिका) व्रत पूजा विधि PDF / Jitiya (Jivitputrika) Vrat Puja Vidhi in Hindi PDF प्रदान करने जा रहे हैं। जैसा कि आप सभी जानते होंगे कि सनातन हिन्दू धर्म में अनेकों व्रतों का पालन किया जाता है तथा सभी व्रतों को अत्यंत लाभकारी तथा भिन्न-भिन्न फल प्राप्त करने के लिए किया जाता है। उसी प्रकार जितिया व्रत का भी हिन्दू धर्म में बहुत अधिक महत्व माना जाता है।

कहा जाता है कि इस व्रत को करने से संतान की सुरक्षा होती है तथा उसे अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। इसीलिए हिंदू पंचांग के अनुसार, अश्विन मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जितिया व्रत रखा जाता है। इस व्रत को जीवित्पुत्रिका के नाम से भी जाना जाता है। महिलाएं इस दिन अपने बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए इस व्रत का पूर्ण विधि-विधान से पालन करती हैं। माताएँ इस दिन संतान की लंबी आयु और सुखी निरोग जीवन की कामना हेतु पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं।

हिन्दू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जितिया या जीवित्पुत्रिका व्रत का पालन करने से नि:संतान स्त्री को संतान की प्राप्ति होती है। इस व्रत को करने से संतान के ऊपर आने वाले सभी प्रकार के कष्ट शीघ्र ही दूर हो जाते हैं। इसीलिए आप भी अपने संतान की दीर्घ आयु एवं सुखी जीवन के लिए इस व्रत का पालन अवश्य करें। इस व्रत को पूर्ण विधि-विधान से करने के लिए आप हमारे इस लेख के माध्यम से जितिया व्रत पूजा विधि पीडीएफ प्रारूप में आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।

जीवित्पुत्रिका (जितिया) व्रत पूजा विधि PDF / Jivitputrika (Jitiya) Vrat Puja Vidhi PDF

  • जितिया व्रत के पहले दिन महिलाएं सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें।
  • उसके बाद पूजा करें।
  • इसके बाद महिलाएं भोजन ग्रहण करती हैं और उसके बाद पूरे दिन वो कुछ भी नहीं खाती हैं।
  • दूसरे दिन सुबह स्नान के बाद महिलाएं पहले पूजा पाठ करती हैं और फिर पूरा दिन निर्जला व्रत रखती हैं।
  • इस व्रत का पारण छठ व्रत की तरह तीसरे दिन किया जाता है।
  • पारण से पहले महिलाएं सूर्य को अर्घ्य देती हैं, जिसके बाद ही वह कुछ खाना खा सकती हैं।
  • इस व्रत के तीसरे दिन झोर भात, मरुआ की रोटी और नोनी का साग खाया जाता है।
  • अष्टमी के दिन प्रदोष काल में महिलाएं जीमूत वाहन की पूजा करती हैं।
  • पूजा के बाद जीवित्पुत्रिका व्रत की कथा सुनी जाती है।

जिउतिया व्रत की पौराणिक कथा PDF / Jivitputrika Vrat Katha in Hindi PDF

इस व्रत की कहानी जीमूतवाहन से जुड़ी है। गन्धर्वराज जीमूतवाहन बड़े धर्मात्मा और त्यागी पुरुष थे।इसलिए उन्होंने अपना राज्य आदि छोड़ दिया और वो अपने पिता की सेवा करने के लिए वन में चले गए थे। वन में एक बार उन्हें घूमते हुए नागमाता मिली। नागमाता विवाप कर रही थी, जब जीमूतवाहन ने उनके विलाप करने का कारण पूछा, तो उन्होंने बताया कि नागवंश गरुड़ से काफी परेशान है, वंश की रक्षा करने के लिए वंश ने गरुड़ से समझौता किया है।

समझौते के अनुसार वे प्रतिदिन उसे एक नाग खाने के लिए देंगे और बदले में वो हमारा सामूहिक शिकार नहीं करेगा। उन्होंने आगे बताया कि इस प्रक्रिया में आज उसके पुत्र को गरुड़ के सामने जाना है। नागमाता की पूरी बात सुनकर जीमूतवाहन ने उन्हें वचन दिया कि वे उनके पुत्र को कुछ नहीं होने देंगे। उसकी जगह कपड़े में लिपटकर खुद गरुड़ के सामने उस शिला पर लेट जाएंगे, जहां से गरुड़ अपना आहार उठाता है और उन्होंने ऐसा ही किया।

गरुड़ ने जीमूतवाहन को अपने पंजों में दबाकर पहाड़ की तरफ उड़ गया। जब गरुड़ ने देखा कि हमेशा की तरह नाग चिल्ला नहीं रहा है और उसकी कोई आवाज नहीं आ रही है। गरुड़ ने कपड़ा हटाया, ऐसे में उसने जीमूतवाहन को सामने पाया। जीमूतवाहन ने सारी कहानी गरुड़ को बता दी, जिसके बाद उसने जीमूतवाहन को छोड़ दिया और नागों को ना खाने का भी वचन दिया।

जीवित्पुत्रिका व्रत 2022 नियम / Jivitputrika vrat 2022 Niyam PDF

  • जीवित्पुत्रिका व्रत रखने वाली महिलाओं को एक दिन पहले से ही तामसिक नहीं भोजन करना चाहिए।
  • इस व्रत के दौरान एक घूंट पानी का भी सेवन नहीं किया जाता है।
  • इस व्रत के दिन छल-कपट तथा क्रोध आदि से भी दूर रहें।

जितिया व्रत पूजा सामग्री (Jitiya Vrat Puja Samagri)

  • इस व्रत में भगवान जीमूत वाहन, गाय के गोबर से चील-सियारिन की पूजा का विधान है।
  • जीवित्पुत्रिका व्रत में खड़े अक्षत (चावल) का प्रयोग किया जाता है।
  • पेड़ा,
  • दूर्वा की माला
  • पान
  • लौंग
  • इलायची
  • पूजा की सुपारी
  • श्रृंगार का सामान
  • सिंदूर
  • पुष्प
  • गांठ का धागा
  • कुशा से बनी जीमूत वाहन की मूर्ति
  • धूप
  • दीप
  • मिठाई
  • फल
  • बांस के पत्ते
  • सरसों का तेल
  • खली
  • गाय का गोबर पूजा में जरूरी है।

जितिया व्रत की आरती PDF / Jitiya Vrat Aarti Lyrics in Hindi PDF

ओम जय कश्यप नन्दन, प्रभु जय अदिति नन्दन।

त्रिभुवन तिमिर निकंदन, भक्त हृदय चन्दन॥

ओम जय कश्यप…

सप्त अश्वरथ राजित, एक चक्रधारी।

दु:खहारी, सुखकारी, मानस मलहारी॥

ओम जय कश्यप…

सुर मुनि भूसुर वन्दित, विमल विभवशाली।

अघ-दल-दलन दिवाकर, दिव्य किरण माली॥

ओम जय कश्यप…

सकल सुकर्म प्रसविता, सविता शुभकारी।

विश्व विलोचन मोचन, भव-बंधन भारी॥

ओम जय कश्यप…

कमल समूह विकासक, नाशक त्रय तापा।

सेवत सहज हरत अति, मनसिज संतापा॥

ओम जय कश्यप…

नेत्र व्याधि हर सुरवर, भू-पीड़ा हारी।

वृष्टि विमोचन संतत, परहित व्रतधारी॥

ओम जय कश्यप…

जितिया पूजन का शुभ मुहूर्त 2022 / Jitiya Puja Ka Shubh Muhurt 2022

हिंदू पंचांग के अनुसार, 17 सितंबर को दोपहर 2 बजकर 14 मिनट पर अष्टमी तिथि प्रारंभ हो रही है और 18 सितंबर को दोपहर 04 बजकर 32 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार, जीवित्पुत्रिका व्रत 18 सितंबर को रखा जाएगा। 19 सितंबर की सुबह 06 बजकर 10 मिनट के बाद व्रत पारण कर सकते हैं।

  • जितिया व्रत की शुरुआत नहाय खाए से होती है।
  • इस साल 17 सितंबर 2022 शनिवार को नहाए खाए होगा।
  • 18 सितंबर 2022 रविवार को निर्जला व्रत रखा जाएगा।
  • 19 सितंबर को सूर्य उदय के बाद व्रत का पारण किया जाएगा।

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