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माँ कुष्मांडा देवी कथा | Maa Kushmanda Devi Katha & Pooja Vidhi PDF in Hindi

माँ कुष्मांडा देवी कथा | Maa Kushmanda Devi Katha & Pooja Vidhi Hindi PDF Download

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माँ कुष्मांडा देवी कथा | Maa Kushmanda Devi Katha & Pooja Vidhi PDF Details
माँ कुष्मांडा देवी कथा | Maa Kushmanda Devi Katha & Pooja Vidhi
PDF Name माँ कुष्मांडा देवी कथा | Maa Kushmanda Devi Katha & Pooja Vidhi PDF
No. of Pages 4
PDF Size 0.68 MB
Language Hindi
Categoryहिन्दी | Hindi
Source pdffile.co.in
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माँ कुष्मांडा देवी कथा | Maa Kushmanda Devi Katha & Pooja Vidhi Hindi

नमस्कार मित्रों, आज इस लेख के माध्यम से हम आप सभी के लिए माँ कुष्मांडा देवी कथा PDF / Maa Kushmanda Devi Katha & Pooja Vidhi PDF in Hindi प्रदान करने जा रहे हैं। सनातन हिन्दू धर्म में नवरात्रि के पर्व को बहुत अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। नवरात्रि का पर्व नौ दिनों तक चलने वाला अत्यंत ही प्रचलित एवं सुंदर उत्सव है।

नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में चतुर्थी तिथि को अष्ट भुजाओं वाली मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। इस उत्सव में दुर्गा माँ के नौ स्वरूपों की पूरे श्रद्धा-भाव से पूजा-अर्चना की जाती है। मां कूष्मांडा को लाल फूल बहुत ही प्रिय होता है इसीलिए उनकी पूजा के समय उन्हें लाल फूल या गुड़हल का फूल ही चढ़ाएं।

आदिशक्ति मां दुर्गा ने राक्षसों का दमन करने के लिए कुष्मांडा का रूप धारण किया था। इसीलिए कहा जाता है कि माता कुष्मांडा अपने भक्तों के सभी प्रकार के कष्टों एवं दुखों का शीघ्र ही नाश करती हैं। नवरात्रि के चौथे दिन मां कुष्मांडा की विधिवत पूजा एवं व्रत करके आप भी आसानी से माँ कुष्मांडा को प्रसन्न करके मनचाहा फल प्राप्त कर सकते हैं।

इसीलिए यदि आप माँ कुष्मांडा का व्रत एवं पूजा करके माँ की अत्यंत कृपा प्राप्त करना चाहते हैं तो हमारे इस लेख के माध्यम से कूष्माण्डा माता कथा PDF प्रारूप में प्राप्त करके माँ कुष्मांडा की पूर्ण विधि-विधान से पूजा करते हुए व्रत कथा भी अवश्य पढ़ें या सुनें। क्योंकि बिना कथा पढ़ें अथवा सुने व्रत का पूर्ण लाभ नहीं मिलता है।

माँ कुष्मांडा देवी कथा PDF | Kushmanda Mata Ki Katha PDF in Hindi

कूष्माण्डा देवी की आठ भुजाएं हैं, इसलिए अष्टभुजा कहलाईं। इनके सात हाथों में क्रमशः कमण्डल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र तथा गदा हैं। आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जप माला है। इस देवी का वाहन सिंह है और इन्हें कुम्हड़े की बलि प्रिय है। संस्कृति में कुम्हड़े को कूष्माण्ड कहते हैं इसलिए इस देवी को कूष्माण्डा कहते हैं।

इस देवी का वास सूर्यमंडल के भीतर लोक में है। सूर्यलोक में रहने की शक्ति क्षमता केवल इन्हीं में है। इसीलिए इनके शरीर की कांति और प्रभा सूर्य की भांति ही दीप्यमान है। इनके ही तेज से दसों दिशाएं आलोकित हैं। ब्रह्मांड की सभी वस्तुओं और प्राणियों में इन्हीं का तेज व्याप्त है।

अचंचल और पवित्र मन से नवरात्रि के चौथे दिन इस देवी की पूजा-आराधना करना चाहिए। इससे भक्तों के रोगों और शोकों का नाश होता है तथा उसे आयु, यश, बल और आरोग्य प्राप्त होता है। ये देवी अत्यल्प सेवा और भक्ति से ही प्रसन्न होकर आशीर्वाद देती हैं। सच्चे मन से पूजा करने वाले को सुगमता से परम पद प्राप्त होता है।

विधि-विधान से पूजा करने पर भक्त को कम समय में ही कृपा का सूक्ष्म भाव अनुभव होने लगता है। ये देवी आधियों-व्याधियों से मुक्त करती हैं और उसे सुख-समृद्धि और उन्नति प्रदान करती हैं। अंततः इस देवी की उपासना में भक्तों को सदैव तत्पर रहना चाहिए।

कूष्माण्डा देवी पूजा विधि PDF | Maa Kushmanda Devi Pooja Vidhi PDF in Hindi

  • इस दिन भी आप सबसे पहले कलश और उसमें उपस्थित देवी-देवता की पूजा करें।
  • फिर देवी की प्रतिमा के दोनों तरफ विराजमान देवी-देवताओं की पूजा करें।
  • इनकी पूजा के पश्चात देवी कूष्‍मांडा की पूजा करें। पूजा की विधि शुरू करने से पहले हाथों में फूल लेकर देवी को प्रणाम कर इस मंत्र ‘सुरासम्पूर्णकलशं रूधिराप्लुतमेव च।
  • दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्‍मांडा शुभदास्तु मे।’ का ध्यान करें।
  • इसके बाद सप्तशती मंत्र, उपासना मंत्र, कवच और अंत में आरती करें। आरती करने के बाद देवी मां से क्षमा प्रार्थना करना न भूलें।

माँ कुष्मांडा मंत्र PDF / Maa Kushmanda Mantra PDF

वन्दे वांछित कामर्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्।
सिंहरूढ़ा अष्टभुजा कूष्माण्डा यशस्वनीम्॥

भास्वर भानु निभां अनाहत स्थितां चतुर्थ दुर्गा त्रिनेत्राम्।
कमण्डलु, चाप, बाण, पदमसुधाकलश, चक्र, गदा, जपवटीधराम्॥

पटाम्बर परिधानां कमनीयां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्।
मंजीर, हार, केयूर, किंकिणि रत्नकुण्डल, मण्डिताम्॥

प्रफुल्ल वदनांचारू चिबुकां कांत कपोलां तुंग कुचाम्।
कोमलांगी स्मेरमुखी श्रीकंटि निम्ननाभि नितम्बनीम्॥

माँ कुष्मांडा कवच PDF / Maa Kushmanda Kavach PDF

हंसरै में शिर पातु कूष्माण्डे भवनाशिनीम्।
हसलकरीं नेत्रेच, हसरौश्च ललाटकम्॥

कौमारी पातु सर्वगात्रे, वाराही उत्तरे तथा,पूर्वे पातु वैष्णवी इन्द्राणी दक्षिणे मम।
दिगिव्दिक्षु सर्वत्रेव कूं बीजं सर्वदावतु॥

माँ कुष्मांडा आरती / Maa Kushmanda Aarti

आद्य शक्ति कहते जिन्हें, अष्टभुजी है रूप।
इस शक्ति के तेज से कहीं छांव कहीं धूप॥

कुम्हड़े की बलि करती है तांत्रिक से स्वीकार।
पेठे से भी रीझती सात्विक करें विचार॥

क्रोधित जब हो जाए यह उल्टा करे व्यवहार।
उसको रखती दूर मां, पीड़ा देती अपार॥

सूर्य चंद्र की रोशनी यह जग में फैलाए।
शरणागत की मैं आया तू ही राह दिखाए॥

नवरात्रों की मां कृपा कर दो मां
नवरात्रों की मां कृपा करदो मां॥

जय मां कूष्मांडा मैया।
जय मां कूष्मांडा मैया॥

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