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श्री महागौरी चालीसा PDF | Shri Mahagauri Chalisa PDF in Hindi

श्री महागौरी चालीसा PDF | Shri Mahagauri Chalisa Hindi PDF Download

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श्री महागौरी चालीसा PDF | Shri Mahagauri Chalisa PDF Details
श्री महागौरी चालीसा PDF | Shri Mahagauri Chalisa
PDF Name श्री महागौरी चालीसा PDF | Shri Mahagauri Chalisa PDF
No. of Pages 8
PDF Size 1.22 MB
Language Hindi
Categoryहिन्दी | Hindi
Source pdffile.co.in
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श्री महागौरी चालीसा PDF | Shri Mahagauri Chalisa Hindi

नमस्कार मित्रों, आज इस लेख के माध्यम से हम आप सभी के लिए श्री महागौरी चालीसा PDF / Mahagauri Chalisa PDF in Hindi प्रदान करने जा रहे हैं। जैसा कि आप सभी जानते होंगे कि नवरात्रि के पर्व में माता दुर्गा के भिन्न-भिन्न स्वरूपों का चिंतन-मनन विशेष रूप से किया जाता है। इसी में से आठवाँ दिन माँ महागौरी को समर्पित होता है।

माँ महागौरी माता दुर्गा का अत्यंत शालीन एवं दयालु स्वरूप मानी जाती हैं। नवरात्रि के उत्सव के आठवें दिन माता महागौरी की भक्तिपूर्वक पूजा-आराधना की जाती है। महागौरी माता का स्वरूप अत्यधिक गौर वर्ण का होने के कारण इन्हें महागौरी के नाम से जाना जाता है। जो भी व्यक्ति इस महागौरी चालीसा का पाठ श्रद्धा-भक्ति से करता है उसके समस्त कष्ट नष्ट हो जाता हैं।

कहा जाता है जो भी भक्त किसी भी प्रकार की बीमारी से ग्रसित हो तो महागौरी चालीसा का पाठ नवरात्रि के नौ दिनों तक भक्ति-भाव से  करने से बीमारी से छुटकारा मिल जाता है। ऐसा कहा जाता है कि जिस जातक के जीवन में विवाह संबंधी समस्या आ रही हो उसके लिए भी महागौरी चालीसा का पाठ अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है। इसीलिए यदि आप भी माता महागौरी की कृपा अपने जीवन में प्राप्त करना चाहते हैं महागौरी चालीसा का पाठ हृदयपूर्वक अवश्य करें।

श्री महागौरी चालीसा PDF | Mahagauri Chalisa Lyrics in Hindi PDF

॥मां महागौरी की चालीसा॥

मन मंदिर मेरे आन बसो, आरम्भ करूं गुणगान,
गौरी माँ मातेश्वरी, दो चरणों का ध्यान।
पूजन विधी न जानती, पर श्रद्धा है आपर,
प्रणाम मेरा स्विकारिये, हे माँ प्राण आधार।

नमो नमो हे गौरी माता, आप हो मेरी भाग्य विधाता,
शरनागत न कभी गभराता, गौरी उमा शंकरी माता।
आपका प्रिय है आदर पाता, जय हो कार्तिकेय गणेश की माता,
महादेव गणपति संग आओ, मेरे सकल कलेश मिटाओ।

सार्थक हो जाए जग में जीना, सत्कर्मो से कभी हटु ना,
सकल मनोरथ पूर्ण कीजो, सुख सुविधा वरदान में दीज्यो।
हे माँ भाग्य रेखा जगा दो, मन भावन सुयोग मिला दो,
मन को भाए वो वर चाहु, ससुराल पक्ष का स्नेहा मै पायु।

परम आराध्या आप हो मेरी, फ़िर क्यूं वर मे इतनी देरी,
हमरे काज सम्पूर्ण कीजियो, थोडे में बरकत भर दीजियो।
अपनी दया बनाए रखना, भक्ति भाव जगाये रखना,
गौरी माता अनसन रहना, कभी न खोयूं मन का चैना।

देव मुनि सब शीश नवाते, सुख सुविधा को वर मै पाते,
श्रद्धा भाव जो ले कर आया, बिन मांगे भी सब कुछ पाया।
हर संकट से उसे उबारा, आगे बढ़ के दिया सहारा,
जब भी माँ आप स्नेह दिखलावे, निराश मन मे आस जगावे।

शिव भी आपका काहा ना टाले, दया द्रष्टि हम पे डाले,
जो जन करता आपका ध्यान, जग मे पाए मान सम्मान।
सच्चे मन जो सुमिरन करती, उसके सुहाग की रक्षा करती,
दया द्रष्टि जब माँ डाले, भव सागर से पार उतारे।

जपे जो ओम नमः शिवाय, शिव परिवार का स्नेहा वो पाए,
जिसपे आप दया दिखावे, दुष्ट आत्मा नहीं सतावे।
सता गुन की हो दता आप, हर इक मन की ग्याता आप,
काटो हमरे सकल कलेश, निरोग रहे परिवार हमेश।

दुख संताप मिटा देना माँ, मेघ दया के बरसा देना माँ,
जबही आप मौज में आय, हठ जय माँ सब विपदाए।
जीसपे दयाल हो माता आप, उसका बढ़ता पुण्य प्रताप,
फल-फूल मै दुग्ध चढ़ाऊ, श्रद्धा भाव से आपको ध्यायु।

अवगुन मेरे ढक देना माँ, ममता आँचल कर देना माँ,
कठिन नहीं कुछ आपको माता, जग ठुकराया दया को पाता।
बिन पाऊ न गुन माँ तेरे, नाम धाम स्वरूप बहू तेरे,
जितने आपके पावन धाम, सब धामो को माँ प्राणम।

आपकी दया का है ना पार, तभी को पूजे कुल संसार,
निर्मल मन जो शरण मे आता, मुक्ति की वो युक्ति पाता।
संतोष धन्न से दामन भर दो, असम्भव को माँ सम्भव कर दो,
आपकी दया के भारे, सुखी बसे मेरा परिवार।

अपकी महिमा अती निराली, भक्तो के दुःख हरने वाली,
मनो कामना पुरन करती, मन की दुविधा पल मे हरती।
चालीसा जो भी पढे-सुनाया, सुयोग वर् वरदान मे पाए,
आशा पूर्ण कर देना माँ, सुमंगल साखी वर देना माँ।

गौरी माँ विनती करूँ, आना आपके द्वार,
ऐसी माँ कृपा किजिये, हो जाए उद्धहार।
हीं हीं हीं शरण मे, दो चरणों का ध्यान,
ऐसी माँ कृपा कीजिये, पाऊँ मान सम्मान।

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