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नाग पंचमी व्रत कथा | Nag Panchami Vrat Katha PDF in Hindi

नाग पंचमी व्रत कथा | Nag Panchami Vrat Katha Hindi PDF Download

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नाग पंचमी व्रत कथा | Nag Panchami Vrat Katha PDF Details
नाग पंचमी व्रत कथा | Nag Panchami Vrat Katha
PDF Name नाग पंचमी व्रत कथा | Nag Panchami Vrat Katha PDF
No. of Pages 9
PDF Size 1.32 MB
Language Hindi
Categoryहिन्दी | Hindi
Source pdffile.co.in
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नाग पंचमी व्रत कथा | Nag Panchami Vrat Katha Hindi

नमस्कार मित्रों, आज इस लेख के माध्यम से हम आप सभी के लिए नाग पंचमी व्रत कथा / Nag Panchami Vrat Katha PDF प्रदान करने जा रहे हैं। जैसा कि आप सभी जानते होगे कि हिन्दू धर्म में नाग पंचमी के त्यौहार को बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। इसी के साथ नाग पंचमी के दिन नाग पंचमी व्रत का भी विधान माना गया है। नाग पंचमी व्रत को अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।

इस व्रत को करने से न केवल नाग देवता बल्कि देवों के देव महादेव जी की भी विशेष कृपा प्राप्त होती है। क्योंकि महादेव ने नागों के देवता को आभूषण के रूप में गले में धारण कर रखा है। नाग पंचमी के अवसर पर भारतवर्ष में अनेकों भक्तों द्वारा नाग देवता के विभिन्न रूपों का बड़े ही भक्ति-भाव से पूजन किया जाता है। माना जाता है कि ऐसा करने से नाग देवता प्रसन्न हो जाते हैं तथा सदैव अपने भक्तों की हर परिस्थिति में रक्षा करते हैं।

हिन्दू धर्म के अनुसार नाग पंचमी के पर्व में वासुकि नाग सहित अनन्त, पद्म, महापद्म, तक्षक, कुलीर, कर्कट, शंख, कालिया और पिंगल नामक देव नागों की पूजा-आराधना की जाती है। अगर आप भी नाग देवता की कृपा अपने जीवन में पाना चाहते हैं तो नाग पंचमी व्रत का पालन अवश्य करें, साथ ही नाग पंचमी व्रत कथा को पढ़ें अथवा श्रवण करें। क्योंकि बिना कथा पढ़ें या सुने व्रत का पूर्ण लाभ नहीं मिलता।

नाग पंचमी व्रत कथा PDF / Nag Panchami Vrat Katha in Hindi PDF

  • प्राचीन काल में एक नगर में एक बहुत ही धनवान सेठजी थे रहते थे। जिनके सात पुत्र हुए। सातों ही पुत्रों की शादी हो चुकी थी। सबसे छोटे पुत्र की पत्नी उत्तम  चरित्र की थी, पर उनका एक भी भाई नहीं था। एक दिन घर की सबसे बड़ी बहू ने घर लीपने और पोतने के लिए पीली मिट्टी लाने के लिए सभी बहुओं से साथ चलने के लिए कहा, उनके बहुएं सभी धलिया और खुरपी लेकर एक जगह की मिट्टी खोदना शुरू कर दिया। तभी वहां एक विशाल नाग निकला, जिसे देखकर बड़ी बहू घबराकर खुरपी से उसे मारने की कोशिश करने लगी।
  • यह देखकर छोटी बहू ने उसे नहीं मारने को कहा और उसे मारने से रोक लिया। यह सुनकर बड़ी बहू ने उसे बिना मारे ही छोड़ दिया मारा। कुछ दूर जाकर नाग एक ओर जाकर बैठ गया। तब चुपचाप से छोटी बहू नाग के पास जाकर बोली -‘मैं अभी फिर लौट कर आती हैं तुम यहां से कहीं मत जाना। यह कहकर वह सबके साथ वापस घर चली गई और वहां कामकाज में फंसकर नाग से किया वादा भूल गई।
  • जब छोटी बहू को एक दिन बाद दिन वह बात याद आई तो वह बिना किसी को बताये  नाग के पास पहुंची और नाग को उसी जगह पर बैठा देख बोली – भैया नमस्कार! नाग ने कहा- ‘अब तू मुझे भैया कह चुकी है, इसलिए तुझे मांफ कर देता हूं, नहीं तो झूठी बोलने के कारण तुझे डस लेता।
  • वह बोली – भैया मुझसे भूल हो गई, आपसे क्षमा मांगती हूँ, नाग बोला- अच्छा, तू आज से मेरी बहन है और मैं तेरा भाई बन गया हूँ। तुझे जो भी मांगना हो, मुझसे मांग ले। वह बोली- भैया! मेरा कोई भी भाई नहीं है, अच्छा हुआ जो आप मेरे भाई बन गये और मुझे अब कुछ नहीं चाहिए। कुछ समय बीतने पर वह नाग इंसान का रूप लेकर उसके घर आया और बोला कि ‘मेरी बहन को मेरे साथ भेज दो।’
  • सब हैरान हो गए क्योंकि सभी यही जानते थे कि ‘बहु का तो कोई भाई नहीं है, तो नाग बोला-  मैं इसका चचेरा भाई हूं, बचपन से ही मैं बाहर चला गया था। ऐसा सुनकर ससुराल वालो ने छोटी बहू को उसके साथ भेज दिया। उसने मार्ग में बताया कि ‘बहन मैं वही नाग हूं जिसे तूने उस दिन भाई बनाया था, इसलिए तू डरना नहीं और जहां तुझे कुछ कठिनाई हो वहां मेरी पूंछ पकड़ लेना। छोटी बहू उसकी बात मानते मानते  उसके घर तक पहुंच गई।
  • वहां के धन-ऐश्वर्य को देखकर छोटी बहु चकित हो गई।एक दिन की बात हैं नाग की माता को कुछ काम था तो उन्होंने कहा- ‘मैं किसी काम से कुछ समय के लिए घर से बाहर जा रही हूँ, तू तेरे भाई को दूध ठंडा कर के जरूर पिला देना। लेकिन छोटी बहू ये बात भूल गयी और उसने गलती से नाग को थोड़ा ज्यादा गर्म दूध पिला दिया, जिसमें उसका मुँह बुरी तरह जल गया।
  • यह देखकर नाग की माता बहुत गुस्सा हो गयी। पर नाग के समझाने पर उनका गुस्सा शांत हो गई। तब नाग ने कहा कि बहुत दिन हुए बहन को अब उसके ससुराल भेज देना चाहिए। तब नाग और उसके माता – पिता ने उसे कई तरह के गहने, चांदी, सोना और कई तरह के जवाहरात, वस्त्र-भूषण आदि देकर उसके वापस उसके ससुराल पहुंचा दिया।
  • इतने सारे स्वर्ण आभूषण देखकर देखकर बड़ी बहू को बहुत जलन होती है और छोटी बहु को कहती है – तेरा भाई तो बड़ा धनी है, तुझे तो उनसे और भी आभूषण और धन लाना चाहिए। नाग ने यह वचन सुना तो अपनी बहन के खातिर सभी वस्तुएं सोने की बनाली और उसे लाकर दे दीं। यह देखकर बड़ी बहू ने कहा- ‘मुझे तो लगता है की घर झाड़ने की झाड़ू भी सोने की होनी चाहिए’। तब नाग ने झाडू भी सोने की बना कर रख दी। नाग ने अपनी इस बहन को हीरों और मणियों से बना का एक अद्भुत और विचित्र हार दिया था।
  • उसकी तारीफ़ उनके राज्य की रानी तक भी पहुंच गयी और वह राजा से बोली कि – सेठ की छोटी बहू का हार मुझे चाहिए किसी भी तरह से। ’राजा ने मंत्री को आदेश दिया कि उससे वह किसी भी मूल्य पर लेकर आओ। मंत्री ने सेठजी से जाकर कहा कि राजा ने किसी भी मूल्य पर वह हार मंगवाया है क्यों की महारानीजी को अब आपको बहू का हार पहनना चाहती उन्हें वह बहुत पसंद आया है, तो वह आप उनसे लेकर अभी ही मुझे दे दो’।
  • सेठजी ने डरकर कर छोटी बहू से हार मंगवाकर दे दिया। छोटी बहू को यह बात बहुत बिलकुल भी अच्छी नहीं लगी और उसने अपने भाई को मन ही मन बहुत याद किया और आने की प्रार्थना की – भैया ! महारानी ने मुझसे मेरा  हार जबरदस्ती छीन लिया है, आपके द्वारा दिया गया हार मुझे बहुत प्रिय है आप कुछ ऐसा करे कि जब वह हार रानी गले पहनाया जाए, तब तक के लिए वह हार सर्प रूपी दिखने लगे और जब वह मुझे फिर लौटा दे तब फिर से वह वैसा ही अतभुत हार बन जाये जैसा पहले था।
  • नाग ने उस हार के साथ बिलकुल ही अद्भुत चमत्कार करना शुरू कर कर दिया। जैसे ही महारानी ने वह हार पहनती, वैसे ही वह सर्प रूपी बन जाता। यह देखकर रानी डर कर जोर चीख पड़ी और डर कर ज़ोर ज़ोर से रोने लगी। रानी की बातें सुनकर राजा ने उस सेठ को बुलाकर कहा की आप आपकी छोटी बहू लेकर आये।
  • सेठजी डर के मारे सोच में पड गए कि राजा न जाने अब क्या करेगा? वे घर जाकर छोटी बहू और बेटे को समझाकर उनके साथ फिर राजभवन उपस्थित हुआ। राजा ने छोटी बहू से कहा – तुमने क्या जादू टोना किया है, मैं तुम्हे इसी समय दंड दूंगा। छोटी बहू बोली- हे महाराज ! कृपया आप मुझे क्षमा कर दीजिये, किन्तु यह अपनी तरह का एकलौता हार है जो मेरे भाई ने मुझे उपहार स्वरुप भेंट किया है इसकी अद्भुतता ही ऐसी है कि मेरे गले में आते ही हीरों और मणियों का बन जाता है और किसी और के गले में पहनते ही सर्प सा बन जाता है।
  • यह सुनकर राजा ने वह सर्प रूपी हार उसे देकर कहा- तुम अपनी बात की सच्चाई बताओ और मुझे अभी ही पहनकर दिखाओ। छोटी बहू ने जैसे ही वह सर्प रूपी  हार पहना वैसे ही फिर से हीरों-मणियों का हो गया। यह देखकर राजा छोटी बहु की बातों का विश्वास हो गया और उसे उसका भाग्य समझ उसे वापस दे दिया तथा अपनी भूल को सुधारने के लिए उसे ढेर सारी स्वर्ण मुद्राएं पुरस्कार के तौर पर दी।
  • छोटी बहू फिर अपने  घर लौट आई। उसके पास स्वर्ण मुद्राये देखकर बड़ी बहू को फिर से ईर्ष्या हुई और उसने बाकी सभी बहुओं और घर के पुरुषों भड़काना शुरू कर दिया हुए सभी को सिखाया कि छोटी बहू के पास कहीं से धन आया है पता नहीं वह कहा से लाती है और किस से लाती है।
  • यह सुनकर छोटी बहु के पति ने अपनी पत्नी से पूछा कि आज मुझे तू सत्य बता यह धन तु कहा से लाती है और कौन देता है? वह दुखी होकर अपने भाई को याद करती है अपनी बहन को परेशान जानकर वह तुरंत ही उपस्थित हो जाता हैं और सारी बातें सुनकर गुस्से में विशाल नाग का रूप धारण करने लगता और फुँकारते हुए कहता हैं की – ये सारी स्वर्ण और रत्न जड़ीत वस्तुए और धन तथा मुद्राएं मुझसे ही मेरी प्रिय बहन तक पहुँचती है और अब जो भी मेरी प्रिय बहन के चरित्र पर संदेह करेगा मैं उसे अवश्य ही खा लूंगा।
  • यहाँ दृश्य देख कर छोटी बहु चिंतित होते हुए कहती है भाई आप शांत हो जाए और सभी छोटी बहु से माफ़ी मांगते है। अपनी प्रिय बहन को डरा देख नाग तुरंत ही फिर मनुष्य रूप ले कर कहता की बहन तेरा निच्छल प्रेम और विश्वास के कारण ही तू मुझे इतनी प्रिय है अतः आज से जो भी स्त्री मुझमे निच्छल प्रेम और विश्वास दिखाएगी मैं उसमे तुझे देख कर उसकी सभी तरह से सहायता और रक्षा करूँगा।
  • ऐसी मान्यता है कि वह दिन ही नागपंचमी के त्योहार के रूप में मनाया जाने लगा और स्त्रियां नाग अपना भाई मानकर उसका बड़े ही विश्वास ले साथ पूजन करती हैं।

नाग पंचमी 2022 पूजा विधि / Nag panchami puja vidhi

  • सूर्योदय से पूर्व स्नान के बाद भगवान भोलेनाथ का स्मरण करें।
  • मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से सर्प भय से मुक्ति मिलती है।
  • भगवान शिव का जलाभिषेक कर, षोडोपचार से उनकी विधि वत पूजा करें।
  • तत्पश्चात बेलपत्र, धतूरा पुष्प आदि अर्पित करें।
  • अब शिव जी के गले में विराजमान नाग देवता को तांबे के लोटे से जल और पीतल के लोटे से दूध चढ़ाएं।
  • अगर संभव हो तो चांदी के नाग-नागिन का जोड़ा मंदिर में रखकर इनका पूजन-अभिषेक करें।
  • मान्यता है इससे नाग देवता और शिव जी दोनों प्रसन्न होते हैं।
  • घर के द्वार पर गोबर से नाग देवता की आठ आकृतियां बनाएं।
  • इसके बाद इनकी रोली, हल्दी, अक्षत, फूल, फल, मिठाई अर्पित करें।
  • नाग देवता की पूजा में ऊं कुरू कुल्ले फट स्वाहा  मंत्र का जाप करें।
  • अब गुड़ में घी मिलाकर नाग देवता को अर्पित करें।

नाग पंचमी 2022 मुहूर्त – Nag panchami 2022 Muhurat

नाग पंचमी तिथि आरंभ – 2 अगस्त 2022 सुबह 05 बजकर 13 मिनट से

नाग पंचमी तिथि समाप्त – 3 अगस्त 2022 सुबह 05 बजकर 41 मिनट तक

नाग पंचमी पूजा मूहूर्त – सुबह 06 बजकर 05 – 08 बजकर 41 मिनट तक

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