नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय स्तुति | Nagendra Haraya Trilochanaya Lyrics PDF in Hindi

नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय स्तुति | Nagendra Haraya Trilochanaya Lyrics Hindi PDF Download

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नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय स्तुति | Nagendra Haraya Trilochanaya Lyrics PDF Details
नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय स्तुति | Nagendra Haraya Trilochanaya Lyrics
PDF Name नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय स्तुति | Nagendra Haraya Trilochanaya Lyrics PDF
No. of Pages 2
PDF Size 0.08 MB
Language Hindi
Categoryहिन्दी | Hindi
Source pdffile.co.in
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नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय स्तुति | Nagendra Haraya Trilochanaya Lyrics Hindi

नमस्कार मित्रों, आज इस लेख के माध्यम से हम आप सभी के लिए नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय स्तुति अर्थ सहित / Nagendra Haraya Trilochanaya Lyrics PDF in Hindi प्रदान करने जा रहे हैं। नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय स्तुति एक बहुत ही सुंदर एवं चमत्कारी मंत्र है। इस स्तोत्र अथवा स्तुति को शिव पंचाक्षर स्तोत्र के नाम से भी जाना जाता है। यह दिव्य स्तोत्र भगवान शिव जी को समर्पित है।

शिव पंचाक्षर स्तोत्र के रचयिता श्री आदि शंकराचार्य जी हैं जो कि एक महान शिव भक्त, अद्वैतवादी, एवं धर्मचक्रप्रवर्तक थे। सनातनी विद्वानों के अनुसार श्री आदि शंकराचार्य जी भगवान शिव के अवतार थे। इन्होनें अनेक दिव्य स्त्रोतों की रचना की थी। नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय स्तुति को मूल रूप से संस्कृत भाषा में लिखा गया था। इस दिव्य स्तोत्र के माध्यम से भगवान शिव जी की प्रार्थना की गई है।

नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय स्तुति (पंचाक्षरी मंत्र) के मध्य से लेखक ने (ॐ नमः शिवाय) के पवित्र अक्षरों (न-म-शि-वा-य) का विस्तृत रूप से वर्णन किया है। ॐ नम: शिवाय पर निर्धारित यह मंत्र इसीलिए भी अत्यंत मनमोहक है क्योंकि इसका जाप करने से भगवान शिव शीघ्र ही प्रसन्न होकर अपने भक्तों को विशेष आशीर्वाद प्रदान करते हैं। अगर आप भी अपने जीवन में भगवान शिव जी की कृपा पाना चाहते हैं तो इस स्तोत्र का श्रद्धापूर्वक पाठ अवश्य करें।

नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय स्तुति लिरिक्स / Nagendra Haraya Trilochanaya Lyrics in Hindi PDF

नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय भस्मांगरागाय महेश्वराय।
नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै "न" काराय नमः शिवाय॥
मंदाकिनी सलिल चंदन चर्चिताय नंदीश्वर प्रमथनाथ महेश्वराय।
मंदारपुष्प बहुपुष्प सुपूजिताय तस्मै "म" काराय नमः शिवाय॥
शिवाय गौरी वदनाब्जवृंद सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय।
श्री नीलकण्ठाय वृषध्वजाय तस्मै "शि" काराय नमः शिवाय॥
वसिष्ठ कुम्भोद्भव गौतमार्य मुनींद्र देवार्चित शेखराय।
चंद्रार्क वैश्वानर लोचनाय तस्मै "व" काराय नमः शिवाय॥
यक्षस्वरूपाय जटाधराय पिनाकहस्ताय सनातनाय।
दिव्याय देवाय दिगम्बराय तस्मै "य" काराय नमः शिवाय॥
पंचाक्षरमिदं पुण्यं यः पठेत् शिव सन्निधौ।
शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते॥

॥ इति श्रीमच्छंकराचार्यविरचितं श्रीशिवपंचाक्षरस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥

नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय स्तुति का अर्थ / Nagendra Haraya Trilochanaya PDF

वे जिनके पास साँपों का राजा उनकी माला के रूप में है, और जिनकी तीन आँखें हैं,
जिनके शरीर पर पवित्र राख मली हुई है और जो महान प्रभु है,
वे जो शाश्वत है, जो पूर्ण पवित्र हैं और चारों दिशाओं को
जो अपने वस्त्रों के रूप में धारण करते हैं,
उस शिव को नमस्कार, जिन्हें शब्दांश “न” द्वारा दर्शाया गया है

वे जिनकी पूजा मंदाकिनी नदी के जल से होती है और चंदन का लेप लगाया जाता है,
वे जो नंदी के और भूतों-पिशाचों के स्वामी हैं, महान भगवान,
वे जो मंदार और कई अन्य फूलों के साथ पूजे जाते हैं,
उस शिव को प्रणाम, जिन्हें शब्दांश “म” द्वारा दर्शाया गया है

वे जो शुभ है और जो नए उगते सूरज की तरह है, जिनसे गौरी का चेहरा खिल उठता है,
वे जो दक्ष के यज्ञ के संहारक हैं,
वे जिनका कंठ नीला है, और जिनके प्रतीक के रूप में बैल है,
उस शिव को नमस्कार, जिन्हें शब्दांश “शि” द्वारा दर्शाया गया है

वे जो श्रेष्ठ और सबसे सम्मानित संतों – वशिष्ट, अगस्त्य और गौतम, और देवताओं द्वारा भी पूजित है, और जो ब्रह्मांड का मुकुट हैं,
वे जिनकी चंद्रमा, सूर्य और अग्नि तीन आंखें हों,
उस शिव को नमस्कार, जिन्हें शब्दांश “वा” द्वारा दर्शाया गया है
वे जो यज्ञ (बलिदान) का अवतार है और जिनकी जटाएँ हैं,

जिनके हाथ में त्रिशूल है और जो शाश्वत हैं,
वे जो दिव्य हैं, जो चमकीला हैं, और चारों दिशाएँ जिनके वस्त्र हैं,
उस शिव को नमस्कार, जिन्हें शब्दांश “य” द्वारा दर्शाया गया है

जो कोई भगवान शिव के इस पंचाक्षर मंत्र का नित्य उनके समक्ष पाठ करता है,
वह शिव के पुण्य लोक को प्राप्त करता है तथा शिव के साथ सुखपूर्वक निवास करता है।

शिव पंचाक्षर स्तोत्र के लाभ / Shiv Panchakshar Stotra Ke Labh

  • इस दिव्य मंत्र के जाप से भगवान शिव के भक्तों के सभी प्रकार के रोग, शोक, दुःख, दर्द शीघ्र ही समाप्त हो जाते हैं।
  • शिव पंचाक्षर स्तोत्र के जाप से भगवान भोलेनाथ शीघ्र ही प्रसन्न होते हैं एवं आपे जातक को मनचाहा वर प्रदान करते हैं।
  • यदि कोई व्यक्ति गृह-क्लेश से बहुत समय से दुखी हो तो इस दिव्य मंत्र का पाठ हर समस्या से छुटकारा दिलाता है।
  • कुंडली में कालसर्प दोष के कारण अगर आप परेशान रहते हैं और कार्यों में सफलता नहीं मिलती है तो इस मंत्र का प्रतिदिन जाप अवश्य करें।
  • इसी के साथ जिन जातकों को मानसिक परेशानी रहती है तथा मेहनत करने के बाद भी फल नहीं मिलता है उन्हें भी इस दिव्य स्तोत्र का नियमित रूप से पाठ करने से शीघ्र लाभ मिलता है।
  • भगवान शिव की पूजा-आराधना करने के साथ-साथ जो भी भक्त नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय स्तुति का जाप करते हैं तो वह हर क्षेत्र में उन्नति पा लेते हें।

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