शनि चालीसा आरती PDF in Hindi

शनि चालीसा आरती Hindi PDF Download

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शनि चालीसा आरती PDF Details
शनि चालीसा आरती
PDF Name शनि चालीसा आरती PDF
No. of Pages 9
PDF Size 1.32 MB
Language Hindi
Categoryहिन्दी | Hindi
Source pdffile.co.in
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शनि चालीसा आरती Hindi

नमस्कार मित्रों, आज इस लेख के माध्यम से हम आप सभी के लिए शनि चालीसा आरती PDF प्रदान करने जा रहे हैं। शनि चालीसा एक अत्यधिक दिव्य एवं महत्वपूर्ण चालीसा है। इस चालीसा का हिन्दू धर्म में बहुत अधिक चमत्कारी एवं प्रभावशाली चालीसा माना जाता है। यह चालीसा शनि देव जी को समर्पित है। शनि देव सूर्य देव के सबसे बड़े पुत्र माने जाते हैं। शनि देव का संबंध शनि ग्रह से माना जाता है।

सनातन हिन्दू धर्म में शनि देव को न्याय का देवता माना गया है। साथ ही शनि देव जी को कर्मफल देवता भी माना जाता है। क्योंकि वह मनुष्य को उसके शुभ कर्म तथा अशुभ कर्म के अनुसार ही अच्छा या बुरा फल देते हैं। ऐसा माना जाता है कि जो भी भक्त शनि चालीसा का हृदयपूर्वक जाप करते हैं उनके पापों का नाश हो जाता है तथा वह शीघ्र ही अनेकों प्रकार के दुख तथा कष्ट से छुटकारा भी पा लेते हैं।

इस दिव्य शनि चालीसा का प्रतिदिन श्रद्धापूर्वक पाठ करने शनि देव के भक्तों को शनि देव का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यदि आप अपने जीवेन में शनि ग्रह से समबन्धित ढैया या साढ़े साटी संबंधी समस्या से बहुत समय से ग्रसित हैं तो नियमित रूप से शनि देव की पूजा करें तथा पूजा समाप्त होने के पश्चात शनि चालीसा का पाठ बिना किसी त्रुटि के करें तो इस समस्या से शीघ्र ही निजात पा सकते हैं।

शनि चालीसा आरती PDF / Shani Chalisa Aarti PDF

॥ दोहा ॥

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल।
दीनन के दुःख दूर करि, कीजै नाथ निहाल।।
जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज।
करहूँ कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज।।

॥ चौपाई ॥

जयति जयति शनिदेव दयाला, करत सदा भक्तन प्रतिपाला,
चारि भुजा, तनु श्याम विराजै, माथे रतन मुकुट छवि छाजै।
परम विशाल मनोहर भाला, टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला,
कुण्डल श्रवन चमाचम चमके, हिये माल मुक्तन मणि दमकै।।

कर में गदा त्रिशूल कुठारा, पल बिच करैं अरिहिं संहारा,
पिंगल, कृष्णो, छाया नन्दन, यम, कोणस्थ, रौद्र, दुःख भंजन।
सौरी, मन्द शनि दश नामा, भानु पुत्र पूजहिं सब कामा,
जा पर प्रभु प्रसन्न ह्वै जाहीं, रंकहुं राव करैं क्षण माहीं।।

पर्वतहूँ तृण होइ निहारत, तृणहूँ को पर्वत करि डारत,
राज मिलत वन रामहिं दीन्हयो, कैकेइहुँ की मति हरि लीन्हयो।
वनहूँ में मृग कपट दिखाई, मातु जानकी गई चुराई,
लखनहिं शक्ति विकल करिडारा, मचिगा दल में हाहाकारा।।

रावण की गति-मति बौराई, रामचन्द्र सों बैर बढ़ाई,
दियो कीट करि कंचन लंका, बजि बजरंग बीर की डंका।
नृप विक्रम पर तुहि पगु धारा, चित्र मयूर निगलि गै हारा,
हार नौलखा लाग्यो चोरी, हाथ पैर डरवायो तोरी।।

भारी दशा निकृष्ट दिखायो, तेलहिं घर कोल्हू चलवायो,
विनय राग दीपक महँ कीन्हों, तब प्रसन्न प्रभु ह्वै सुख दीन्हयों।
हरिश्चन्द्र नृप नारि बिकानी, आपहूँ भरे डोम घर पानी,
तैसे नल पर दशा सिरानी, भूंजी-मीन कूद गई पानी।।

श्री शंकरहिं गह्यो जब जाई, पारवती को सती कराई,
तनिक विकलोकत ही करि रीसा, नभ उड़ि गयो गौरिसुत सीसा।
पाण्डव पर भै दशा तुम्हारी, बची द्रोपदी होति उघारी,
कौरव के भी गति मति मारयो, युद्ध महाभारत करि डारयो।।

रवि कहँ मुख महँ धरि तत्काला, लेकर कूदि परयो पाताला,
शेष देव-लखि विनती लाई, रवि को मुख ते दियो छुड़ाई।
वाहन प्रभु के सात सुजाना, हय, दिग्गज, गर्दभ, मृग, स्वाना,
जम्बुक सिंह आदि नख धारी, सो फल ज्योतिष कहत पुकारी।।

गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं, हय ते सुख सम्पत्ति उपजावै,
गर्दभ हानि करै बहु काजा, सिंह सिद्ध करै राज समाजा।
जम्बुक बुद्धि नष्ट करि डारै, मृग दे कष्ट प्राण संहारै,
जब आवहिं प्रभु स्वान सवारी, चोरी आदि होय डर भारी।।

तैसहिं चारि चरण यह नामा, स्वर्ण लौह चाँदी अरु तामा,
लौह चरण पर जब प्रभु आवैं, धन जन सम्पत्ति नष्ट करावैं।
समता ताम्र, रजत शुभकारी, स्वर्ण सर्वसुख मंगल भारी,
जो यह शनि चरित्र नित गावै, कबहूँ न दशा निकृष्ट सतावै।।

अद्भुत नाथ दिखावैं लीला, करैं शत्रु के नशि बलि ढीला,
जो पण्डित सुयोग्य बुलवाई, विधिवत शनि ग्रह शांति कराई।
पीपल जल शनि दिवस चढ़ावत, दीप दान दै बहु सुख पावत,
कहत ‘राम सुन्दर’ प्रभु दासा, शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा।।

॥ दोहा ॥

पाठ शनिश्चर देव को, की हों विमल तैयार।
करत पाठ चालीस दिन, हो भवसागर पार।।

।। इति राम सुन्दर कृत श्री शनि चालीस सम्पूर्णम् ।।

श्री शनि आरती PDF / Shri Shani Dev Aarti Lyrics in Hindi PDF

जय जय श्री शनिदेवभक्तन हितकारी।

सूरज के पुत्र प्रभुछाया महतारी॥

जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी॥

श्याम अंग वक्र-दृ‍ष्टिचतुर्भुजा धारी।

निलाम्बर धार नाथगज की असवारी॥

जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी॥

क्रीट मुकुट शीश सहजदिपत है लिलारी।

मुक्तन की माल गलेशोभित बलिहारी॥

जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी॥

मोदक और मिष्ठान चढ़े,चढ़ती पान सुपारी।

लोहा, तिल, तेल, उड़दमहिषी है अति प्यारी॥

जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी॥

देव दनुज ऋषि मुनिसुमिरत नर नारी।

विश्वनाथ धरत ध्यान हमहैं शरण तुम्हारी॥

जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी॥

शनि चालीसा के लाभ / Shani Chalisa Benefits in Hindi

  • शनि देव की पूजा भक्ति-भाव से करने से शनि देव शीघ्र प्रसन्न होते हैं तथा भक्तों पर कृपा करते हैं।
  • ऐसा माना जाता है कि जब शनि देव भक्तों पर प्रसन्न होते हैं तो उनके सभी कष्टों को तत्काल हर कर लेते हैं।
  • शनि देव का आशीर्वाद पाने के लिए शनि चालीसा का पाठ बहुत ही महत्वपूर्ण एवं कारगर उपाय है।
  • इसीलिए शानि देव को प्रसन्न करने के लिए शनि चालीसा पाठ किया जाता है। इसके प्रभाव से घर व जीवन में सुख- समृद्धि आती है।
  • इस दिव्य चालीसा का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से घर में धन की कमी कभी नहीं होती है।
  • इस चमत्कारी पाठ को करने से सभी परेशानियां शीघ्र ही दूर हो जाती हैं।
  • यदि किसी जातक को नौकरी आदि न मिल रही हो तो शनि चालीसा का पाठ करने से शनि देव के आशीर्वाद से उसकी इस समस्या का समाधान हो जाता है।
  • साथ ही शनि आरती का भक्ति-भाव से गायन करने से निश्चित ही धन-धान्य तथा कीर्ति में बढ़ोत्तरी होती है।
  • शनि चालीसा के पाठ से साधक सभी परेशानियों से मुक्त हो जाता है।
  • अगर आप भी अपने जीवन में खुशियों और सौभाग्य प्राप्त करना चाहते हैं तो शनि चालीसा का पाठ करके शनिदेव से शीघ्र ही वरदान प्राप्त कर सकते हैं।

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