शिव रुद्राभिषेक मंत्र PDF in Hindi

शिव रुद्राभिषेक मंत्र Hindi PDF Download

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शिव रुद्राभिषेक मंत्र PDF Details
शिव रुद्राभिषेक मंत्र
PDF Name शिव रुद्राभिषेक मंत्र PDF
No. of Pages 4
PDF Size 1.26 MB
Language Hindi
Categoryहिन्दी | Hindi
Source pdffile.co.in
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शिव रुद्राभिषेक मंत्र Hindi

नमस्कार मित्रों, आज इस लेख के माध्यम से हम आप सभी के लिए शिव रुद्राभिषेक मंत्र PDF प्रदान करने जा रहे हैं। जैसा कि आप सभी जानते होंगे कि सनातन हिन्दू धर्म में मंत्रों का बहुत अधिक महत्व माना गया है। किसी भी प्रकार की पूजा-आराधना, हवन आदि में अनेकों प्रकार के दिव्य मंत्रों का जाप किया जाता है। शिव रुद्राभिषेक मंत्र भी उन्हीं में से एक है। शिव रुद्राभिषेक मंत्र अत्यंत ही शक्तिशाली एवं प्रभावशाली मंत्रों में से एक माना जाता है।

इस दिव्य मंत्र का उच्चारण शिवलिंग की पूजा एवं रुद्राभिषेक करते समय किया जाता है। भगवान शिव के भक्त शिवलिंग का भिन्न-भिन्न पदार्थों से भी अभिषेक करते हैं। इस लेख में आप 6 प्रकार के रुद्राभिषेक के बारे में जान सकते हैं जो कि इस प्रकार हैं- जलाभिषेक, दुग्ध अभिषेक, शहद अभिषेक, पंचामृत अभिषेक, घी अभिषेक तथा दही अभिषेक।

नीचे इन सभी अभिषेकों के महत्व के बारे में आप इस लेख के माध्यम से आसानी से जान सकते हैं। रुद्राभिषेक करने से भगवान शिव शीघ्र ही प्रसान होकर अपने भक्तों को मनचाहा वरदान प्रदान करते हैं। इसी के साथ रुद्राभिषेक करने से भक्तों को विशेष लाभ प्राप्त होता है। अगर आप भी भगवान शिव जी का विशेष आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं तो इस पावन श्रावण मास में या अपनी इच्छानुसार कभी भी रुद्राभिषेक अवश्य करें।

शिव रुद्राभिषेक मंत्र PDF

ॐ नम: शम्भवाय च मयोभवाय च नम: शंकराय च

मयस्कराय च नम: शिवाय च शिवतराय च ॥

ईशानः सर्वविद्यानामीश्व रः सर्वभूतानां ब्रह्माधिपतिर्ब्रह्मणोऽधिपति

ब्रह्मा शिवो मे अस्तु सदाशिवोय्‌ ॥

तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि।

तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥

अघोरेभ्योथघोरेभ्यो घोरघोरतरेभ्यः सर्वेभ्यः

सर्व सर्वेभ्यो नमस्ते अस्तु रुद्ररुपेभ्यः ॥

वामदेवाय नमो ज्येष्ठारय नमः श्रेष्ठारय नमो

रुद्राय नमः कालाय नम:

कलविकरणाय नमो बलविकरणाय नमः

बलाय नमो बलप्रमथनाथाय नमः

सर्वभूतदमनाय नमो मनोन्मनाय नमः ॥

सद्योजातं प्रपद्यामि सद्योजाताय वै नमो नमः ।

भवे भवे नाति भवे भवस्व मां भवोद्‌भवाय नमः ॥

नम: सायं नम: प्रातर्नमो रात्र्या नमो दिवा ।

भवाय च शर्वाय चाभाभ्यामकरं नम: ॥

यस्य नि:श्र्वसितं वेदा यो वेदेभ्योsखिलं जगत् ।

निर्ममे तमहं वन्दे विद्यातीर्थ महेश्वरम् ॥

त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिबर्धनम्

उर्वारूकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मा मृतात् ॥

सर्वो वै रुद्रास्तस्मै रुद्राय नमो अस्तु ।

पुरुषो वै रुद्र: सन्महो नमो नम: ॥

विश्वा भूतं भुवनं चित्रं बहुधा जातं जायामानं च यत् ।

सर्वो ह्येष रुद्रस्तस्मै रुद्राय नमो अस्तु ॥

रुद्राभिषेक के प्रकार और महत्व

1- जलाभिषेक – शास्त्रों के जानकारों के अनुसार ऐसा माना गया है कि भगवान शिव को जलाभिषेक करने से अच्छी वृष्टि होती है और सभी मनोरथ पूरे होते हैं।

2- दुग्ध अभिषेक – शिवलिंग पर दूध चढ़ाने से साधक को भगवान भोलेनाथ की कृपा से दीर्घायु प्राप्त होती है।

3- शहद अभिषेक – माना जाता है कि भगवान शिव का शहद से अभिषेक करने से जीवन के सभी दुख तथा कष्ट तत्काल ही दूर हो जाते हैं।

4- पंचामृत अभिषेक – दूध, दही, मिश्री, घी तथा शहद के मिश्रण से तैयार पंचामृत से भगवान शिव का अभिषेक करने से धन, सम्पदा की प्राप्ति होती है।

5- घी अभिषेक – मान्यता है कि शिवलिंग पर घी चढ़ाने पर किसी प्रकार का शारीरिक रोग या कोई रोग नहीं सताता।

6- दही अभिषेक – मान्यता है कि दही से अभिषेक करने से साधक को संतान सुख की प्राप्ति होती है।

रुद्राभिषेक मंत्र जाप करने की विधि

  • प्रत्येक मंत्र जाप के लिए विशेष विधि होती है, जिसके अनुसार आपको पाठ करना चाहिए।
  • क्योंकि यदि पूर्ण विधि-विधान के अनुसार कोई भी मंत्र जाप किया जाता है, तो उसका कई गुना अधिक फल प्राप्त होता है।
  • रुद्राभिषेक मंत्र का जाप करने से पहले यह आवश्यक होता है कि उस दिन, जब आप यह पाठ करने जा रहे हैं तो “शिव वास” कहां है, क्योंकि यदि सही समय पर यह मंत्र जाप किया जाएगा, तो शिव जी की कृपा प्राप्त होगी।
  • ऐसा माना जाता है कि यह जाप यदि किसी अन्य समय पर किया जाए, तो शिवजी रुष्ट भी हो सकते हैं।
  • यदि आप किसी उद्देश्य विशेष के लिए रुद्राभिषेक मंत्र का जाप करना चाहते हैं, तो आपको शिव वास अवश्य ध्यान रखना चाहिए।
  • लेकिन इसके विपरीत यदि निष्काम रूप से भगवान शिव की आराधना करना चाहते हैं, तो उसके लिए शिव वास देखा जाना आवश्यक नहीं है।

शिव वास को जानने के लिए आप निम्नलिखित वर्णन को पढ़ सकते हैं:

शिव वास जानने की विधि

  • किसी भी महीने के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा अर्थात प्रथमा, अष्टमी और अमावस्या तथा शुक्ल पक्ष की द्वितीया व नवमी तिथि के दिन भगवान शिव का वास माता गौरी के साथ होता है। ऐसे में यदि आप इस इन तिथियों का ध्यान रखते हुए रुद्राभिषेक मंत्र से भगवान शिव का रुद्राभिषेक करते हैं, तो आपको सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
  • किसी भी महीने के कृष्ण पक्ष की पंचमी और द्वादशी तिथि तथा शुक्ल पक्ष की षष्ठी और त्रयोदशी तिथि में भगवान शिव नंदी पर सवार होकर संपूर्ण विश्व में भ्रमण करते हैं। यदि इन तिथियों में रुद्राभिषेक मंत्र से भगवान शिव का अभिषेक किया जाए, तो आपकी हर कामना अवश्य पूर्ण होती है।
  • किसी भी महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तथा एकादशी और शुक्ल पक्ष की पंचमी और द्वादशी तिथि में भगवान शिव का वास कैलाश पर्वत पर होता है और इस दिन रुद्राभिषेक मंत्र से शिव आराधना करने पर भगवान शिव की विशेष अनुकंपा प्राप्त होती है तथा परिवार में सुख समृद्धि की वृद्धि होती है।
  • कृष्ण पक्ष की सप्तमी और चतुर्दशी तथा शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा, अष्टमी और पूर्णिमा तिथियों में भगवान शिव का निवास श्मशान में होता है तथा वे समाधि में लीन होते हैं। इन तिथियों पर रुद्राभिषेक मंत्र से रुद्राभिषेक किया जाए, तो भगवान शिव की साधना भंग होने से उनके क्रोधित होने की संभावना होती है और ऐसे में आपको लाभ के स्थान पर हानि हो सकती है तो इन तिथियों पर रुद्राभिषेक न करें।
  • कृष्ण पक्ष की तृतीया और दशमी तथा शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तथा एकादशी तिथि में भगवान शिव का वास क्रीड़ा क्षेत्र में होता है क्योंकि वे क्रीड़ारत रहते हैं। इसलिए इन तिथियों पर रुद्राभिषेक मंत्र का प्रयोग करने से बचना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से आपकी संतान को कष्ट मिलने की अधिक संभावना होती है।
  • कृष्ण पक्ष की द्वितीया और नवमी तथा शुक्ल पक्ष की तृतीया तथा दशमी तिथि में भगवान शिव का वास देवताओं की सभा में होता है, क्योंकि इन तिथियों पर वे सभी देवताओं की समस्याएं सुनते हैं। इन तिथियों में रुद्राभिषेक करने से भगवान शिव क्रुद्ध हो सकते हैं, क्योंकि उनके कार्य में व्यवधान उत्पन्न होता है। इसलिए इस दिन रुद्राभिषेक करने से संताप तथा दुख मिल सकता है।
  • किसी भी महीने के कृष्ण पक्ष की षष्ठी और त्रयोदशी तथा शुक्ल पक्ष की सप्तमी और चतुर्दशी तिथि में भगवान शिव का वास भोजन स्थल में होता है और वे भोजन करते हैं। इस दिन रुद्राभिषेक मंत्र से शिव जी का आवाहन करने पर वह व्यक्ति को पीड़ा दे सकते हैं इसलिए इस दिन भी रुद्राभिषेक मंत्र का जाप नहीं करना चाहिए।

रुद्राभिषेक मंत्र जाप करने के लाभ

  • रुद्राभिषेक मंत्र का जाप करते हुए रुद्राभिषेक करने से जातक कालसर्प योग से छुटकारा पा लेता है।
  • बहुत समय से यदि आपके घर में गृहकलेश चल रहा हो तो रुद्राभिषेक करने से अत्यंत लाभ प्राप्त होगा।
  • यदि आप किसी असाध्य रोग से पीड़ित हैं, तो आपको कुशा के माध्यम से रुद्राभिषेक मंत्र से शिवजी की पूजा अवश्य करनी चाहिए।
  • रुद्राभिषेक मंत्र का जाप करते हुए गन्ने के रस से शिवजी का रुद्राभिषेक करने से धन-संपत्ति की प्राप्ति होती है।
  • दुग्ध से रुद्राभिषेक करने से संतान-सुख की प्राप्ति होती है।
  • कहा जाता है कि रुद्राभिषेक मंत्र का जाप करते हुए सरसों के तेल से रुद्राभिषेक करने से जातक को नौकरी आसानी से मिल जाती है तहा शत्रु समस्या का भी समाधान हो जाता है।
  • यदि लम्बे समय से ज्वर की समस्या चल रही हो, तो ज्वर की शांति के लिए गंगाजल से अभिषेक करें तथा रुद्राभिषेक मंत्रों का उच्चारण करें।
  • भवन अथवा वाहन की प्राप्ति के लिए साधक को रुद्राभिषेक मंत्र का जाप करने के साथ-साथ दही से भगवान शिव का रुद्राभिषेक करना चाहिए।

रुद्राभिषेक मंत्र का प्रभाव

माना जाता है कि रुद्राभिषेक मंत्र में इतनी शक्ति होती है कि जिस भी जगह इस मंत्र का श्रद्धापूर्वक पाठ किया जाता है, वहाँ शुद्धता का वातावरण बन जाता है, तथा नकारात्मकता का अंत हो जाता है। यह मंत्र ग्रह जनित दोषों का भी शीघ्र ही अंत कर देता है। इसी के साथ ऐसा भी माना गया है कि यदि आपके आसपास कोई व्यक्ति बहुत अधिक समय से बीमार है, तो उसको भी बीमारी से बहुत जल्द छुटकारा मिल सकता है।

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