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शिव तांडव स्तोत्र सरल भाषा में | Shiv Tandav Stotram Easy Lyrics PDF in Hindi

शिव तांडव स्तोत्र सरल भाषा में | Shiv Tandav Stotram Easy Lyrics Hindi PDF Download

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शिव तांडव स्तोत्र सरल भाषा में | Shiv Tandav Stotram Easy Lyrics PDF Details
शिव तांडव स्तोत्र सरल भाषा में | Shiv Tandav Stotram Easy Lyrics
PDF Name शिव तांडव स्तोत्र सरल भाषा में | Shiv Tandav Stotram Easy Lyrics PDF
No. of Pages 7
PDF Size 1.38 MB
Language Hindi
Categoryहिन्दी | Hindi
Source pdffile.co.in
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शिव तांडव स्तोत्र सरल भाषा में | Shiv Tandav Stotram Easy Lyrics Hindi

नमस्कार मित्रों, आज इस लेख के माध्यम से हम आप सभी के लिए शिव तांडव स्तोत्र सरल भाषा में PDF / Shiva Tandava Stotram Easy Lyrics PDF in Hindi प्रदान करने जा रहे हैं। शिव तांडव स्तोत्र बहुत ही दिव्य एवं प्रभावशाली स्तोत्र है। यह दिव्य स्तोत्र भगवान शिव जी को समर्पित हैं। भगवान शिव अत्यंत ही भोले एवं दयालु भगवान हैं।

इसीलिए भगवान शिव को भोलेनाथ के नाम से भी जाना जाता है। भगवान भोलेनाथ हिन्दू धर्म में सबसे अधिक पूजे जाने वाले भगवान हैं। ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति बहुत समय से गंभीर रोगों से ग्रसित हो तो भगवान शिव के इस दिव्य स्तोत्र का नियमपूर्वक पाठ अथवा श्रवण करने से हर गंभीर समस्या का शीघ्र ही अंत हो जाता है।

इस स्तोत्र का भक्ति-भाव से पाठ करने से मनुष्य को हर सुख की प्राप्ति होती है। इस लेख के माध्यम से आप इस स्तोत्र को पीडीएफ़ प्रारूप में प्राप्त कर सकते हो। जिसका पाठ करके आप भगवान शिव को आसानी से प्रसन्न करके मनचाहे फल की प्राप्ति कर सकते हो। यदि आप इस स्तोत्र का पाठ करने में असमर्थ हैं तो मात्र इसका श्रवण करके भी आप भगवान शंकर का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

शिव तांडव स्तोत्र सरल भाषा में PDF / Shiv Tandav Stotram Easy Lyrics in Hindi PDF

(शिव तांडव स्तोत्र सरल भाषा में)

जटा ट वी गलज् जल प्रवाह पावि तस् थले
गलेऽव लम् ब्य लम् बिताम् भुजन्ग तुन्ग मालिकाम्‌।
डमड् डमड् डमड् डमन् निनाद वड् डमर वयम्
चकार चण्ड ताण्डवम् तनोतु नः शिव: शिवम्‌ ॥1॥

जटा कटाह सम् भ्रम भ्रमन् नि लिम्प निर् झरी
विलोल वीचि वल् लरी विराज मान मूर् धनि।
धगद् धगद् धगज् ज्वलल् ललाट पट्ट पावके
किशोर चन्द्र शेखरे रतिः प्रति क्षणम् मम ॥2॥

धरा धरेन्द्र नन् दिनी विलास बन्धु बन् धुरस्
फुरद् दिगन्त सन् तति प्रमोद मान मानसे।
कृपा कटाक्ष धो रणी निरुद् ध दुर् धरा पदि
क्व चिद् दिगम् बरे मनो विनोद मेतु वस्तुनि ॥3॥

जटा भुजङ्ग पिङ् गलस् फुरत् फणा मणि प्रभा-
कदम्ब कुङ्कुम द्रव प्रलिप्त दिग्व धू मुखे ।
मदान्ध सिन्धुर स्फुरत् वगुत्त रीय मेदुरे
मनो विनोद मद् भुतम् बिभर्तु भूत भर् तरि ॥4॥

सहस्र लोच न प्रभृ त्य शेष लेख शेखर-
प्रसून धूलि धोरणी विधू सरा ङिघ्र पीठभूः ।
भुजङ्ग राज मालया निबद् ध जाट जूटकः
श्रियै चिराय जायताम् चकोर बन्धु शेखरः ॥5॥

ललाट चत्वर ज्व लद् धनञ्जय स्फु लिङ्गभा-
निपीत पञ्च सायकम् नमन् निलिम्प नायकम्‌ ।
सुधा मयूख लेखया विराज मान शेखरम्
महा कपालि सम् पदे शिरो जटाल मस् तुनः ॥6॥

कराल भाल पट् टिका धगद् धगद् धगज् ज्वलद्
धनञ् जया हुती कृत प्रचण्ड पञ्च सायके ।
धरा धरेन्द्र नन्दिनी कुचाग्र चित्र पत्रक-
प्रकल्प नैक शिल् पिनि त्रिलोचने रतिर् मम ॥7॥

नवीन मेघ मण्डली नि रुद् ध दुर् धरस् फुरत्
कुहू निशी थिनी तमः प्रबन्ध बद्ध कन्धरः ।
निलिम्प निर्झरी धरस् तनोतु कृत्ति सिन्धुरः
कला निधान बन्धुरः श्रियम् जगद् धुरन् धर: ॥8॥

प्रफुल्ल नील पङकज प्रपञ्च कालि म प्रभा
वलम्बि कण्ठ कन्दली रुचि प्रबद्ध कन्धरम्‌।
स्मरच् छिदम् पुरच् छिदम् भवच् छिदम् मखच् छिदम्
गजच् छि दान्ध कच् छिदम् तमन्त कच् छिदम् भजे ॥9॥

अखर्व सर्व मङ्गला कला कदम्ब मञ्जरी
रस प्रवाह माधुरी विजृम् भणा मधु व्रतम्‌।
स्मरान् तकम् पुरान् तकम् भवान् तकम् मखान् तकम्
गजान् त कान् ध कान्तकम् तमन्त कान्तकम् भजे ॥10॥

जयत् वदभ्र विभ्रम भ्रमद् भुजङ्ग मश्वस
द्विनिर्ग मत् क्रमस् फुरत् कराल भाल हव्य वाट्।
धिमिद् धिमिद् धिमिद् ध्वनन् मृदङ्ग तुङ्ग मङ्गल
ध्वनि क्रम प्रवर् तित प्रचण्ड ताण्डवः शिवः ॥11॥

दृषद् विचित्र तल्प योर् भुजङ्ग मौक्ति कस्र जोर
गरिष्ठ रत्न लोष्ठयोः सुहृद् विपक्ष पक्ष योः।
तृणार विन्द चक्षुषोः प्रजा मही महेन्द्रयोः
सम प्रवृत्ति कः कदा सदा शिवं भजाम्यहम् ॥12॥

कदा निलिम्प निर्झरी निकुञ्ज कोटरे वसन्‌
विमुक्त दुर् मतिः सदा शिरःस्थ मञ्जलिम् वहन्‌।
विलोल लोल लोचनो ललाम भाल लग्नकः
शिवेति मन्त्र मुच्चरन्‌ कदा सुखी भवाम्यहम्‌ ॥13॥

इमं हि नित्य मेव मुक्त मुत्त मोत्तम् स्तवम्
पठन् स्मरन्‌ ब्रुवन् नरो विशुद्धि मेति सन्ततम्‌।
हरे गुरौ सुभक्ति माशु याति नान्यथा गतिं
विमोहनं हि देहिनांं सुशङ्करस्य चिंतनम् ॥16॥

पूजा ऽवसान समये दश वक्त गीतं
यः शम्भू पूजन परम् पठति प्रदोषे।
तस्य स्थिरां रथ गजेन्द्र तुरङ्ग युक्ताम्
लक्ष्मिम् सदैव सुमुखिम् प्रददाति शम्भुः ॥17॥

इति श्रीरावण- कृतम् शिव- ताण्डव- स्तोत्रम् सम्पूर्णम्

शिव तांडव स्तोत्र पाठ की विधि / Shiv Tandav Stotra Path Vidhi

  • धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, शिव तांडव स्तोत्र का पाठ सुबह या शाम के समय करना सर्वश्रेष्ठ माना गया है।
  • शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करने के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नानादि से निवृत्त हो जाएं।
  • तत्पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • तदोपरांत भगवान शिव को प्रणाम करके धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
  • शिव तांडव स्तोत्र का पाठ सदैव तेज आवाज में और गाकर करना चाहिए।
  • नृत्य के साथ शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है, परंतु नृत्य केवल पुरुष ही कर सकते हैं।
  • पाठ संपूर्ण होने के पश्चात भगवान शिव का श्रद्धापूर्वक ध्यान करें।
  • इस बात का विशेष ध्यान रखें कि जब शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करें, तो मन में किसी के प्रति दुर्भावना ना हो।

शिव तांडव स्तोत्र के लाभ / Shiv Tandav Stotram Ke Labh in Hindi

  • जो भी भक्त इस शिवतांडव स्तोत्र का पाठ श्रद्धापूर्वक करते हैं उसनें भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
  • ऐसा माना जाता है कि इस स्तोत्र के नियमित रूप से पाठ करने से भगवान शिव शीघ्र ही प्रसन्न होते हैं।
  • अगर भगवान शिव से आप मनचाहा वरदान प्राप्त करना चाहते हैं तो शिवतांडव स्तोत्र का पाठ करने से मनचाहे वरदान की प्राप्ति होती है।
  • इस चमत्कारी स्तोत्र का हृदय से पाठ करने से जातक के जीवन में कभी भी धन-सम्पति की कमी नहीं होती है।
  • शिवतांडव स्तोत्र के पाठ से व्यक्ति को उत्कृष्ट व्यक्तित्व की प्राप्ति होती है।
  • जो भक्त इस स्तोत्र का मन से पाठ करते हैं उनकी भगवान भोलेनाथ के आशीर्वाद से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
  • शिव तांडव स्तोत्र का यह दिव्य पाठ अत्यंत ही शक्तिशाली एवं ऊर्जावान है इसीलिए इसका जाप करने से व्यक्ति में आत्मबल एवं तेज बढ़ता है।
  • ऐसा माना जाता है कि पूरे मनोयोग से नित्यप्रति शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करने से वाणी सिद्धि प्राप्त होती है।
  • शिव तांडव स्तोत्र का पाठ बिना किसी त्रुटि के करने से मनुष्य को हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है।

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