होलिका दहन व्रत कथा | Holika Dahan Vrat Katha and Pooja Vidhi PDF in Hindi

होलिका दहन व्रत कथा | Holika Dahan Vrat Katha and Pooja Vidhi Hindi PDF Download

होलिका दहन व्रत कथा | Holika Dahan Vrat Katha and Pooja Vidhi Hindi PDF Download for free using the direct download link given at the bottom of this article.

होलिका दहन व्रत कथा | Holika Dahan Vrat Katha and Pooja Vidhi PDF Details
होलिका दहन व्रत कथा | Holika Dahan Vrat Katha and Pooja Vidhi
PDF Name होलिका दहन व्रत कथा | Holika Dahan Vrat Katha and Pooja Vidhi PDF
No. of Pages 4
PDF Size 0.76 MB
Language Hindi
CategoryReligion & Spirituality
Source pdffile.co.in
Download LinkAvailable ✔
Downloads17

होलिका दहन व्रत कथा | Holika Dahan Vrat Katha and Pooja Vidhi Hindi

नमस्कार पाठकों, इस लेख के माध्यम से आप होलिका दहन व्रत कथा / Holika Dahan Vrat Katha and Pooja Vidhi PDF Hindi प्राप्त कर सकते हैं। होलिका दहन होलिका उत्सव के एक दिन पहले किया जाता है। होलिका दहन करने के लिए गाय के गोबर से बने उपलों तथा पवित्र लकड़ियों से एक होलिका का निर्माण करके उसे अग्नि से प्रज्जवलित किया जाता है।

होलिका दहन करने उपरांत सभी लोग एक दूसरे को होली की शुभकामनायें देते हैं तथा अगली सुबह रंगों से होली खेलते हैं। यदि आप भी होलिका दहन की पूजा विधिवत करना चाहते हैं तथा इससे सम्बंधित कथा भी आपको पढ़नी चाहिए जो की इस लेख में दी गयी है। होलिका दहन की कथा में होलिका दहन के पीछे का कारन भी बताया गया है।

होलिका दहन व्रत कथा / Holika Dahan Vrat Katha and Pooja Vidhi

भगवान श्री विष्णु के कई भक्त हुए जिनमें से एक भक्त का नाम प्रहलाद था। प्रहलाद का जन्म असुर कुल में होने के कारण प्रहलाद के पिता राजा हिरण्यकश्यप को विष्णु भगवान के प्रति अपने पुत्र की आस्था बहुत खटकती थी। लेकिन प्रहलाद को ये गुण अपनी मां कयाधु से मिले होने की वजह से वह अन्य चीजों की परवाह किये बिना केवल भगवान की भक्ति में लगा रहता था।

लाख समझने के बाद जब प्रहलाद ने भक्ति नहीं छोड़ी तो पिता हिरण्यकश्यप ने उसे बहुत सी यातनाएं दीं। लेकिन हर बार भगवान विष्णु की कृपा से प्रहलाद बच जाता था। सभी तरकीबें अपनाने के बाद अंत में हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद को मारने के लिए अपनी असुरी बहन होलिका का सहारा लिया। होलिका को अग्नि में न जलने का वरदान प्राप्त था। इसलिए हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका की गोद में पुत्र प्रहलाद को बैठा दिया तथा उनके चारों तरग अग्नि जला दी।

लेकिन होलिका को आग में न जलने का वरदान होने के बाद भी वह उस आग में भस्म हो गई। वहीं भगवान विष्णु के लिए सच्ची भक्ति होने के कारण उस अग्नि में से प्रहलाद सुरक्षित निकल आया। उसी समय से धुलन्डी से एक दिन पहले होलिका का दहन करने की इस प्रथा की शुरुवात हुई। इसलिए बुराई पर अच्छाई की विजय की इस कथा को होलिका दहन से पूर्व पढ़ने से जीवन के कष्टों से मुक्ति मिलती है।

होलिका दहन पूजा विधि / Holika Dahan Puja Vidhi PDF

  • फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को सुबह नहाकर होलिका व्रत का संकल्प करें।
  • दोपहर में होलिका दहन स्थान को पवित्र जल से शुद्ध कर लें।
  • उसमें लकड़ी, सूखे उपले और सूखे कांटे डालें।
  • शाम के समय उसकी पूजा करें।
  • होलिका के पास और किसी मंदिर में दीपक जलाएं।
  • होलिका में कपूर भी डालना चाहिए।
  • इससे होली जलते समय कपूर का धुआं वातावरण की पवित्रता बढ़ता है।
  • शुद्ध जल सहित अन्य पूजा सामग्रियों को एक-एक कर होलिका को अर्पित करें।
  • होलिका दहन के समय परिवार के सभी सदस्यों को होलिका की तीन या सात परिक्रमा करनी चाहिए।
  • इसके बाद घर से लाए हुए जौ, गेहूं, चने की बालों को होली की ज्वाला में डाल दें। होली की अग्नि और भस्म लेकर घर आएं और पूजा वाली जगह रखें।
You can download Holika Dahan Vrat Katha PDF in Hindi by clicking on the following download button.

होलिका दहन व्रत कथा | Holika Dahan Vrat Katha and Pooja Vidhi PDF Download Link

RELATED PDF FILES