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जय अम्बे गौरी आरती | Jai Ambe Gauri Aarti PDF in Hindi

जय अम्बे गौरी आरती | Jai Ambe Gauri Aarti Hindi PDF Download

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जय अम्बे गौरी आरती | Jai Ambe Gauri Aarti PDF Details
जय अम्बे गौरी आरती | Jai Ambe Gauri Aarti
PDF Name जय अम्बे गौरी आरती | Jai Ambe Gauri Aarti PDF
No. of Pages 6
PDF Size 0.75 MB
Language Hindi
CategoryEnglish
Source pdffile.co.in
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जय अम्बे गौरी आरती | Jai Ambe Gauri Aarti Hindi

नमस्कार मित्रों, आज इस लेख के माध्यम से हम आप सभी को जय अम्बे गौरी आरती PDF / Jai Ambe Gauri Aarti PDF in Hindi प्रदान करने जा रहे है। जय अम्बे गौरी आरती बहुत ही प्रचलित और लाभकारी आरती है, इसका गायन अधिकतर नवरात्रि के सुंदर पर्व में किया जाता है। इसके गायन मात्र से व्यक्ति को माँ अम्बे (दुर्गा जी) की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

प्रत्येक पूजन के अंत में आरती करना आवश्यक होता है। आरती करने से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसी प्रकार माँ अम्बे की आरती का गायन करने से व्यक्ति को सुख, शांति एवं प्रसन्नता की अनुभूति होती हैं। आरती के बिना पूजन को अपूर्ण माना जाता है। इसलिए नवरात्रि के पर्व में पूजन के बाद माँ अम्बे की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए जय अम्बे गौरी आरती का गायन अवश्य करना चाहिए।

जय अम्बे गौरी आरती PDF | Jai Ambe Gauri Aarti in Hindi PDF

जय अम्बे गौरी,मैया जय श्यामा गौरी।

तुमको निशिदिन ध्यावत,हरि ब्रह्मा शिवरी॥

जय अम्बे गौरी

माँग सिन्दूर विराजत,टीको मृगमद को।

उज्जवल से दो‌उ नैना,चन्द्रवदन नीको॥

जय अम्बे गौरी

कनक समान कलेवर,रक्ताम्बर राजै।

रक्तपुष्प गल माला,कण्ठन पर साजै॥

जय अम्बे गौरी

केहरि वाहन राजत,खड्ग खप्परधारी।

सुर-नर-मुनि-जन सेवत,तिनके दुखहारी॥

जय अम्बे गौरी

कानन कुण्डल शोभित,नासाग्रे मोती।

कोटिक चन्द्र दिवाकर,सम राजत ज्योति॥

जय अम्बे गौरी

शुम्भ-निशुम्भ बिदारे,महिषासुर घाती।

धूम्र विलोचन नैना,निशिदिन मदमाती॥

जय अम्बे गौरी

चण्ड-मुण्ड संहारे,शोणित बीज हरे।

मधु-कैटभ दो‌उ मारे,सुर भयहीन करे॥

जय अम्बे गौरी

ब्रहमाणी रुद्राणीतुम कमला रानी।

आगम-निगम-बखानी,तुम शिव पटरानी॥

जय अम्बे गौरी

चौंसठ योगिनी मंगल गावत,नृत्य करत भैरूँ।

बाजत ताल मृदंगा,अरु बाजत डमरु॥

जय अम्बे गौरी

तुम ही जग की माता,तुम ही हो भरता।

भक्‍तन की दु:ख हरता,सुख सम्पत्ति करता॥

जय अम्बे गौरी

भुजा चार अति शोभित,वर-मुद्रा धारी।

मनवान्छित फल पावत,सेवत नर-नारी॥

जय अम्बे गौरी

कन्चन थाल विराजत,अगर कपूर बाती।

श्रीमालकेतु में राजत,कोटि रतन ज्योति॥

जय अम्बे गौरी

श्री अम्बेजी की आरती,जो को‌ई नर गावै।

कहत शिवानन्द स्वामी,सुख सम्पत्ति पावै॥

जय अम्बे गौरी

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