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जीतिया व्रत कथा PDF | Jitiya Vrat Katha PDF in Hindi

जीतिया व्रत कथा PDF | Jitiya Vrat Katha Hindi PDF Download

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जीतिया व्रत कथा PDF | Jitiya Vrat Katha PDF Details
जीतिया व्रत कथा PDF | Jitiya Vrat Katha
PDF Name जीतिया व्रत कथा PDF | Jitiya Vrat Katha PDF
No. of Pages 3
PDF Size 1 MB
Language Hindi
CategoryEnglish
Source pdffile.co.in
Download LinkAvailable ✔
Downloads17
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जीतिया व्रत कथा PDF | Jitiya Vrat Katha Hindi

गंधर्वराज जीमूतवाहन बड़े ही त्यागी ओर धर्मात्मा आदमी थे | छोटी सी उम्र मे  ही उन्होने घर छोड़ दिया था ओर वनबास को चले गए थे अपने पिता की सेवा करने क लिए | एक दिन वो घूमने के लिए निकले तो  उन्हे नागमाता मिली , जब जीमूतवाहन ने उनके दुख प्रकट के बारे मे पूछा तो उन्होने बताया की नागवंश गरुड से काफी दुखी हे ,वंश की रक्षा करने के लिए वंश ने गरुड से समझोता किया हे की वे रोजाना एक नाग खाने क लिए देंगे ओर इसके बदले मे वो हम सबका सिकार नही करेगा |

अब उसके बेटे को गरुड क सामने जाना हे नागमता की सारी बात सुनकर जीमतवाहन ने उनसे वादा किया था की वो उसके बेटे को कुछ नही होने देंगे ओर उसकी जगह कपड़े म लिपटकर खुद गरुड के सामने उस चिता पे लेट जाएंगे , जहा से गरुड अपना भोजन लेता ह ओर उसने ऐसा ही किया | गरुड ने जीमूत्वाहन को अपने पेरों मे दबाकर पर्वत की तरफ लेके उड्ड गया | गरुड ने देखा की हर बार रोने ओर चिलाने की वजह शांत हे , तोउसने जब कपड़ा हटाया तो जीमूत्वाहन को पाया | फिर जीमूत्वाहन ने सारी खानी गरुड को सुनाई , जिसके बाद उसने जीमूत्वाहन को छोड़ दिया ओर नागो को न खाने का वादा किया |

Jitiya Vrat Pooja Vidhi in Hindi PDF | जितिया व्रत पूजा विधि

सप्तमी का दिन नहाई खाय के रूप मे मनाते हे ओर अस्ट्मि को निर्जला व्रत रखते हे व्रत का समापन नवमी के दिन किया जाता हे अस्ट्मि वाले दिन साए को प्रदोष काल मे संतानसूद ओरत जीमूत्वाहन की पुजा करती हे ओर व्रत कथा का भी सिर्वेण करती हे| अपनी इच्छा के अनुसार दान भी करती हे|

  • इस दिन सूर्यास्त होने से पहले सभी काम को पूरा कर के स्नान कर ले| इसके बाद प्रदोष काल मे गाय क गोबर से पूजा के स्थान को लेप ले| इसके बाद एक छोटा सा तालाब बना ले| तालाब के पास एक पाकड़ की डाल को लाकर खड़ा कर दे |
  • उसके बाद सालिवाहन राजा के पुत्र धर्मात्मा जीमूत्वाहन की मूर्ति जल के पात्र मे रख दे | इसके बाद अक्षत, रोली, धूप,दीप, लाल ओर  पीली रुई से सजाइए | अब अपनी शिरधानुसार उन्हे भोग लगाए |
  • इसके बाद गोबर या मिट्टी से मादा सियार ओर मादा चील की तस्वीर बनाए | दोनों को लाल सिंदूर लगाए |
  • इसके बाद व्रत कथा सुने या पढे |

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