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कार्तिक मास की कथा | Kartik Maas Katha PDF in Hindi

कार्तिक मास की कथा | Kartik Maas Katha Hindi PDF Download

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कार्तिक मास की कथा | Kartik Maas Katha PDF Details
कार्तिक मास की कथा | Kartik Maas Katha
PDF Name कार्तिक मास की कथा | Kartik Maas Katha PDF
No. of Pages 5
PDF Size 0.76 MB
Language Hindi
CategoryEnglish
Source pdffile.co.in
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कार्तिक मास की कथा | Kartik Maas Katha Hindi

नमस्कार मित्रों, आज इस लेख के माध्यम से हम आप सभी के लिए कार्तिक मास की कथा PDF / Kartik Maas Katha PDF in Hindi प्रदान करने जा रहे हैं। जैसा कि आप सभी जानते होंगे कि सनातन हिन्दू धर्म में कार्तिक मास का बहुत अधिक महत्व माना गया है। कार्तिक माह को बहुत से लोग उत्तम माह के नाम से भी जानते हैं। कार्तिक के पावन महीने में दामोदर भगवान की विशेष रूप से पूजा-अर्चना की जाती हैं।

भगवान दामोदर भगवान विष्णु जी का ही एक रूप हैं। इसीलिए कार्तिक महीने में भगवान दामोदर की पूजा करने से भगवान श्री हरी विष्णु जी भी आशीर्वाद प्राप्त होता है। हिन्दू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस माह में हम जो भी दान-पुण्य आदि करते हैं उसका कई गुना लाभ हमें भविष्य में प्राप्त होता है। कार्तिक महीने में सूर्योदय से पहले शीतल जल का स्नान करना सबसे उत्तम बताया गया है।

माना जाता है कि कार्तिक माह में ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करने से धरती के जितने भी तीर्थ स्थल है, उनका भी हमें पुण्य मिलता है। कार्तिक मास हिंदी पंचाग का आँठवा महीना है, यह महीना शरद पूर्णिमा से शुरू होकर कार्तिक पूर्णिमा तक चलता है, इस महीने में कई विशेष त्योहार भी मनाये जाते हैं। जैसे – धनतेरस, दीपावली, भाई दूज आदि। यदि आप भी भगवान विष्णु जी की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं हैं तो इस माह में दान एवं पुण्य कर्म आदि श्रद्धा-भाव से करें तथा कार्तिक मास की कथा का भी पठन अथवा श्रवण अवश्य करें।

कार्तिक मास की कथा PDF / Kartik Maas Katha in Hindi PDF Download

किसी गाँव में एक बुढ़िया रहती थी और वह कार्तिक का व्रत रखा करती थी। उसके व्रत खोलने के समय कृष्ण भगवान आते और एक कटोरा खिचड़ी का रखकर चले जाते। बुढ़िया के पड़ोस में एक औरत रहती थी। वह हर रोज यह देखकर ईर्ष्या करती कि इसका कोई नहीं है फिर भी इसे खाने के लिए खिचड़ी मिल ही जाती है।

एक दिन कार्तिक महीने का स्नान करने बुढ़िया गंगा गई. पीछे से कृष्ण भगवान उसका खिचड़ी का कटोरा रख गए। पड़ोसन ने जब खिचड़ी का कटोरा रखा देखा और देखा कि बुढ़िया नही है तब वह कटोरा उठाकर घर के पिछवाड़े फेंक आई। कार्तिक स्नान के बाद बुढ़िया घर आई तो उसे खिचड़ी का कटोरा नहीं मिला और वह भूखी ही रह गई। बार-बार एक ही बात कहती कि कहां गई मेरी खिचड़ी और कहां गया मेरा खिचड़ी का कटोरा।

दूसरी ओर पड़ोसन ने जहाँ खिचड़ी गिराई थी वहाँ एक पौधा उगा जिसमें दो फूल खिले. एक बार राजा उस ओर से निकला तो उसकी नजर उन दोनो फूलों पर पड़ी और वह उन्हें तोड़कर घर ले आया। घर आने पर उसने वह फूल रानी को दिए जिन्हें सूँघने पर रानी गर्भवती हो गई. कुछ समय बाद रानी ने दो पुत्रों को जन्म दिया।

वह दोनो जब बड़े हो गए तब वह किसी से भी बोलते नही थे लेकिन जब वह दोनो शिकार पर जाते तब रास्ते में उन्हें वही बुढ़िया मिलती जो अभी भी यही कहती कि कहाँ गई मेरी खिचड़ी और कहाँ गया मेरा कटोरा।

बुढ़िया की बात सुनकर वह दोनो कहते कि हम है तेरी खिचड़ी और हम है तेरा बेला हर बार जब भी वह शिकार पर जाते तो बुढ़िया यही बात कहती और वह दोनो वही उत्तर देते। एक बार राजा के कानों में यह बात पड़ गई। उसे आश्चर्य हुआ कि दोनो लड़के किसी से नहीं बोलते तब यह बुढ़िया से कैसे बात करते हैं।

राजा ने बुढ़िया को राजमहल बुलवाया और कहा कि हम से तो किसी से ये दोनों बोलते नहीं है, तुमसे यह कैसे बोलते है?  बुढ़िया ने कहा कि महाराज मुझे नहीं पता कि ये कैसे मुझसे बोल लेते हैं। मैं तो कार्तिक का व्रत करती थी और कृष्ण भगवान मुझे खिचड़ी का बेला भरकर दे जाते थे।

एक दिन मैं स्नान कर के वापिस आई तो मुझे वह खिचड़ी नहीं मिली। जब मैं कहने लगी कि कहां गई मेरी खिचड़ी और कहाँ गया मेरा बेला? तब इन दोनो लड़को ने कहा कि तुम्हारी पड़ोसन ने तुम्हारी खिचड़ी फेंक दी थी तो उसके दो फूल बन गए थे। वह फूल राजा तोड़कर ले गया और रानी ने सूँघा तो हम दो लड़को का जन्म हुआ। हमें भगवान ने ही तुम्हारे लिए भेजा है।

कार्तिक मास में दीपदान / Kartik Month Deep Daan

कार्तिक मास में पवित्र नदियों में एवं मंदिरों में दीप दान किया जाता हैं। साथ ही आकाश में भी दीप छोड़े जाते हैं। यह कार्य शरद पूर्णिमा से शुरू होकर कार्तिक पूर्णिमा तक चलता हैं। दीप दान के पीछे का सार यह हैं कि इससे घर में धन आता हैं। इस माह में लक्ष्मी जी के लिए दीप प्रज्वलित किया जाता हैं और यह संकेत दिया जाता हैं कि अब जीवन से अंधकार दूर करके प्रकाश देने की कृपा करें। कार्तिक में घर के मंदिर, वृंदावन, नदी के तट एवम शयन कक्ष में दीप प्रज्वलित करने का बहुत अधिक महत्व होता है।

कार्तिक माह में दान / Kartik Maas Donation

  • कार्तिक माह में दान का विशेष महत्व होता है क्योंकि ऐसा करने से मनुष्य को अक्षय धन-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
  • इसीलिए इस पूरे माह में गरीब व्यक्तियों, ब्रह्मणों आदि को दान दिया जाता हैं।
  • कार्तिक माह के महत्वपूर्ण दिनों में तुलसी दान, अन्न दान, गाय दान एवं आँवले के पौधे के दान का सर्वाधिक महत्व बताया जाता है।
  • इसी के अतिरिक्त कार्तिक माह में पशुओं को हरा चारा खिलाने का भी विशेष महत्व होता है।

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