कोकिला व्रत की कथा | Kokila Vrat Katha PDF in Hindi

कोकिला व्रत की कथा | Kokila Vrat Katha Hindi PDF Download

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कोकिला व्रत की कथा | Kokila Vrat Katha PDF Details
कोकिला व्रत की कथा | Kokila Vrat Katha
PDF Name कोकिला व्रत की कथा | Kokila Vrat Katha PDF
No. of Pages 6
PDF Size 1.37 MB
Language Hindi
CategoryEnglish
Source pdffile.co.in
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कोकिला व्रत की कथा | Kokila Vrat Katha Hindi

नमस्कार मित्रों, आज इस लेख के माध्यम से हम आप सभी के लिए कोकिला व्रत की कथा PDF / Kokila Vrat Katha in Hindi PDF प्रदान करने जा रहे हैं। हिन्दू धर्म में कोकिला व्रत का बहुत अधिक महत्व माना जाता है। यह चमत्कारी व्रत भगवान शिव और माता पार्वती जी को समर्पित है। इस व्रत को करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है। धार्मिक शास्‍त्रों के अनुसार यह व्रत आषाढ़ मास की पूर्णिमा को किया जाता है।

कोकिला व्रत आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि के दिन भगवान शिव एवं माता पार्वती को प्रसन्न करके उनकी विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव को अपने पति के रूप में प्राप्त करने के लिए माता पार्वती ने कोयल के रूप में अनेक वर्षों तक कठिन तप किया था। इसीलिए हिन्दू धर्म में इस व्रत को अत्यधिक फल देने वाला एवं प्रभावशाली व्रत माना जाता है।

कोकिला व्रत को करने से विवाहित लोगों के दांपत्‍य जीवन सुख-शांति का समावेश होता है तथा जीवन में खुशहाली बनी रहती है। इसी के साथ यह भी माना जाता है कि अगर किसी कन्‍या के जीवन में बहुत समय से विवाह से सबंधित समस्या चल रही हो या विवाह न हो पा रहा हो तो भी सुयोग्य वर तथा मनचाहा जीवन साथी पाने के लिए इस व्रत को पूरे भक्ति-भाव से अवश्य करें तथा Kokila Vrat Ki Katha भी अवश्य पढ़ें अथवा श्रवण करें, क्योंकि  बिना कथा पढ़े या सुने व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है।

कोकिला व्रत की कथा PDF / Kokila Vrat Katha in Hindi PDF

  • कोकिला व्रत की कहानी का संबंध शिव पुराण में भी प्राप्त होता है। कथा इस प्रकार है ब्रह्माजी के मानस पुत्र दक्ष के घर देवी सती का जन्म होता है। दक्ष विष्णु का भक्त थे और भगवान शिव से द्वेष रखते थे। जब बात सती के विवाह की होती है, तब राजा दक्ष कभी भी सती का संबंध भगवान शिव से जोड़ना नहीं चाहते थे।
  • राजा दक्ष के मना करने पर भी सती ने भगवान शिव से विवाह कर लिया था। पुत्री सती के इस कार्य से दक्ष इतना क्रोधित होते हैं कि वह उससे अपने सभी संबंध तोड़ लेते हैं। कुछ समय बाद राजा दक्ष शिवजी का अपमान करने हेतु एक महायज्ञ का आयोजन करते हैं। उसमें दक्ष ने अपनी पुत्री सती और दामाद भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किया था।
  • देवी सती को जब अपने पिता के इस कार्य का बोध होता है तो वह उस यज्ञ में जाने के लिए तैयार होती हैं भगवान शिव उन्हें इस बात की इजाज़त नहीं देते, पर देवी सती की जिद के आगे हार जाते हैं और उन्हें जाने देते हैं। सती यज्ञ पर जाकर जब अपने पति का स्थान नहीं पाती तो अपने पिता दक्ष से इस बारे में पूछती हैं लेकिन दक्ष अपनी पुत्री सती और शिव का अपमान करते हैं। शिव के प्रति अपमान के शब्दों को वह सहन नहीं कर पाती हैं और उस यज्ञ के हवन कुंड में अपनी देह का त्याग कर देती हैं।
  • भगवान शिव को जब पता चलता है तो वह दक्ष और उसके यज्ञ को नष्ट कर देते हैं। शिव सती के वियोग को नहीं सह पाते हैं और उनकी इच्छा के विरुद्ध जाकर यज्ञ की अग्नि में कूदकर प्राणों को त्यागने पर उन्हें हजार वर्षों तक कोयल बनने का शाप देते हैं।
  • देवी सती कोयल बनकर हजारों वर्षों तक भगवान शिव को पुन: पाने के लिए तपस्या करती हैं। उनकी तपस्या का फल उन्हें पार्वती रूप में शिव की प्राप्ति के रूप में मिलता है। तब से कोकिला व्रत की महत्ता स्थापित होती है।

कोकिला व्रत की पूजा विधि / Kokila Vrat Ki Puja Vidhi PDF

  • व्रत करने वाले व्यक्ति को सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि करना चाहिए।
  • इस दिन गंगा स्नान करें तो सर्वोत्तम होता है।
  • स्नान के पश्चात सूर्य को अर्घ्य देकर दिन का आरंभ करें।
  • तदोपरांत माता पार्वती और शिवजी की पूजा करें।
  • शिवजी का दूध और गंगाजल से अभिषेक करें।
  • शिवजी की पूजा में सफेद और लाल पुष्पू के अलावा बेलपत्र, भांग, धतूरा, दूर्वा, अष्टगंध, धूप और दीपक रखें।
  • इन सभी वस्तुओं से पूजा करने के बाद व्रत का संकल्प लें।
  • आप चाहें तो निराहार व्रत रहें और सामर्थ्य नहीं है तो फलाहार करके भी व्रत रहा जा सकता है।
  • व्रत रखने वाले व्यक्ति को इस दिन कोकिला व्रत की व्रत कथा अवश्य पढ़नी चाहिए।
  • दिन भर व्रत रहने के बाद सूर्यास्त के समय शिवजी की आरती और पूजा करें।
  • तत्पश्चात भगवान को भोग लगाएं।
  • शाम की पूजा के बाद आप फलाहार ग्रहण कर सकते हैं।

कोकिला व्रत का महत्‍व / Significance of Kokila Vrat

  • कोकिला व्रत की ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने से सभी सुखों की प्राप्ति होती है।
  • यह दांपत्य जीवन को खुशहाल होने का वरदान प्रदान करता है।
  • इस व्रत के द्वारा मन के अनुरूप शुभ फलों की प्राप्ति होती है।
  • विवाह में आ रही किसी भी प्रकार की समस्या हो तो इस व्रत का पालन करने से विवाह-सुख प्राप्त होता है।
  • इस व्रत को करने से सुयोग्य वर की प्राप्ति होती है।
  • आषाढ़ पूर्णिमा के दिन रखा गया कोकिला व्रत संपूर्ण सावन में आने वाले व्रतों का आरंभ माना जाता है।
  • इस व्रत में माता पार्वती के स्वरूप को कोयल रूप में पूजा जाता है।
  • कहा जाता है कि माता सती ने कोयल रूप में भगवान शिव को पाने के लिए वर्षों तक कठोर तपस्या की थी।
  • उनकी तपस्या के शुभ फल स्वरूप उन्हें पार्वती रूप मिला और जीवनसाथी के रूप में भगवान शिव की प्राप्ति हुई।

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