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लिंगाष्टकम स्तोत्रम PDF | Lingashtakam Stotram PDF in Hindi

लिंगाष्टकम स्तोत्रम PDF | Lingashtakam Stotram Hindi PDF Download

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लिंगाष्टकम स्तोत्रम PDF | Lingashtakam Stotram PDF Details
लिंगाष्टकम स्तोत्रम PDF | Lingashtakam Stotram
PDF Name लिंगाष्टकम स्तोत्रम PDF | Lingashtakam Stotram PDF
No. of Pages 5
PDF Size 0.69 MB
Language Hindi
CategoryEnglish
Source pdffile.co.in
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Tags: If लिंगाष्टकम स्तोत्रम PDF | Lingashtakam Stotram is a illigal, abusive or copyright material Report a Violation. We will not be providing its PDF or any source for downloading at any cost.

लिंगाष्टकम स्तोत्रम PDF | Lingashtakam Stotram Hindi

प्रिय पाठको, इस लेख के माध्यम से हम आपको लिंगाष्टकम स्तोत्रम पीडीऍफ़ | Lingashtakam Stotram PDF in Hindi का डाउनलोड लिंक प्रदान करने जा रहे है, लिंगाष्टकम एक “अष्टकम” (आठ छंदों वाला एक स्तोत्रम) है जिसे भगवान शिव की पूजा करते समय जप किया जाता है। यह भगवान शिव की उनके “लिंग” रूप में पूजा के लिए समर्पित है। लिंगाष्टकम को ब्रह्म मुरारी सुररचिता लिंगम स्तोत्रम के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि लिंगाष्टकम का पाठ करने से आपको मानसिक शांति मिलती है। यह भी कहा जाता है कि लिंगस्तकम के नियमित जप से अत्यधिक भक्ति के साथ व्यक्ति मोक्ष प्राप्त कर सकता है और शिवलोक तक पहुंच सकता है। भगवान शिव की कृपा पाने के लिए अत्यंत भक्ति के साथ इसका जप करें।

अष्टकम संस्कृत में आठ छंदों या छंदों की एक काव्य रचना है। वे अतीत के ऋषियों (ऋषि) के पसंदीदा काव्य वाद्ययंत्रों में से एक थे। यह भारतीय संस्कृति के इतिहास में पाए जाने वाले दर्जनों अष्टकमों से स्पष्ट होता है। ऐसा ही एक अष्टकम जो पूरे भारत के मंदिरों से निकलता है, वह है शिव लिंगाष्टकम। उस विशेष क्षेत्र के सांस्कृतिक लोकाचार को प्रतिबिंबित करने वाली मधुर धुन को सुनने के लिए हर दिन अनगिनत संख्या में लोग जागते हैं।

लिंगाष्ठकम स्तोत्र PDF | Lingashtakam Stotram PDF in Hindi

ब्रह्ममुरारि सुरार्चित लिंगं
निर्मलभासित शोभित लिंगम् |
जन्मज दुःख विनाशक लिंगं
तत्-प्रणमामि सदाशिव लिंगम् || 1 ||

अर्थ :- जो ब्रम्हा विष्णु और सभी देवगणों के इष्टदेव है, जो परम पवित्र, निर्मल, तथा सभी जीवो की मनोकामना को पूर्ण करने वाले है, और जो लिंग के रूप में बराबर जगत में स्थापित हुए है, जो संसार के संहारक है और जन्म और मृत्यु के दुखो का विनाश करते है, ऐसे भगवान सदा शिव – लिंग को नित्य निरंतर प्रणाम है!

देवमुनि प्रवरार्चित लिंगं
कामदहन करुणाकर लिंगम् |
रावण दर्प विनाशन लिंगं
तत्-प्रणमामि सदाशिव लिंगम् || 2 ||

अर्थ :- सभी देवताओं और मुनियों द्वारा पुजित लिंग जो काम का दमन करता है तथा करूणामयं भगवान् शिव का स्वरूप है जिसके द्वारा रावण के अभिमान का भी नाश हुआ उन सदाशिव लिंग को मैं प्रणाम करता हूँ।

सर्व सुगंध सुलेपित लिंगं
बुद्धि विवर्धन कारण लिंगम् |
सिद्ध सुरासुर वंदित लिंगं
तत्-प्रणमामि सदाशिव लिंगम् || 3 ||

अर्थ :- जो सभी प्रकार के सुगंधित पदार्थों द्वारा सुलेपित लिंग है जो कि बुद्धि का विकास करने वाला है तथा सिद्ध- सुर (देवताओं) एवं असुरों सभी के लिए वन्दित है उन सदाशिव लिंग को हमारा प्रणाम।

कनक महामणि भूषित लिंगं
फणिपति वेष्टित शोभित लिंगम् |
दक्ष सुयज्ञ निनाशन लिंगं
तत्-प्रणमामि सदाशिव लिंगम् || 4 ||

अर्थ :- जो स्वर्ण एवं महामणियों से विभूषित एवं सर्पों के स्वामी से शोभित सदाशिव लिंग तथा जो कि दक्ष के यज्ञ का विनाश करने वाला है।आपको हमारा प्रणाम।

कुंकुम चंदन लेपित लिंगं
पंकज हार सुशोभित लिंगम् |
संचित पाप विनाशन लिंगं
तत्-प्रणमामि सदाशिव लिंगम् || 5 ||

अर्थ :- लिंग जो कुंकुम एवं चन्दन से सुशोभित है। कमल हार से सुशोभित है। सदाशिव लिंग जो कि हमें सारे संञ्चित पापों से मुक्ति प्रदान करने वाला है उन सदाशिव लिंग को हमारा प्रणाम।

देवगणार्चित सेवित लिंगं
भावै-र्भक्तिभिरेव च लिंगम् |
दिनकर कोटि प्रभाकर लिंगं
तत्-प्रणमामि सदाशिव लिंगम् || 6 ||

अर्थ :- सदाशिव लिंग को हमारा प्रणाम जो सभी देवों एवं गणों द्वारा शुद्ध विचार एवं भावों के द्वारा पुजित है तथा करोडों सूर्य सामान प्रकाशित हैं।

अष्टदलोपरिवेष्टित लिंगं
सर्वसमुद्भव कारण लिंगम् |
अष्टदरिद्र विनाशन लिंगं
तत्-प्रणमामि सदाशिव लिंगम् || 7 ||

अर्थ :- आठों दलों में मान्य तथा आठों प्रकार के दरिद्रता का नाश करने वाले सदाशिव लिंग जो सभी प्रकार के सृजन के परम कारण हैं आप सदाशिव लिंग को हमारा प्रणाम।

सुरगुरु सुरवर पूजित लिंगं
सुरवन पुष्प सदार्चित लिंगम् |
परात्परं परमात्मक लिंगं
तत्-प्रणमामि सदाशिव लिंगम् || 8 ||

अर्थ :- देवताओं एवं देव गुरू द्वारा स्वर्ग के वाटिका के पुष्पों द्वारा पुजित परमात्मा स्वरूप जो कि सभी व्याख्याओं से परे है उन सदाशिव लिंग को हमारा प्रणाम।

लिंगाष्टकमिदं पुण्यं यः पठेश्शिव सन्निधौ |
शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते ||

शिव लिंगाष्टकम के जाप के लाभ

अंतिम श्लोक एक परिशिष्ट है जो शिव लिंगाष्टकम के जाप के लाभों को संक्षेप में प्रस्तुत करता है। इस स्तोत्र का नियमित पाठ करने से लाभ होता है:

  1. इसका जाप नकारात्मक विचारों को दूर कर के मन को शांति देने में सहयोग करता है।
  2. इसके जाप से स्वास्थ्य, समृद्धि और ज्ञान का उदय होता है।
  3. इसका पाठ करने से मन में सकारात्मकता, आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति की वृद्धि होती है।

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