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महेश नवमी व्रत कथा | Mahesh Navami Vrat Katha PDF in Hindi

महेश नवमी व्रत कथा | Mahesh Navami Vrat Katha Hindi PDF Download

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महेश नवमी व्रत कथा | Mahesh Navami Vrat Katha PDF Details
महेश नवमी व्रत कथा | Mahesh Navami Vrat Katha
PDF Name महेश नवमी व्रत कथा | Mahesh Navami Vrat Katha PDF
No. of Pages 4
PDF Size 0.89 MB
Language Hindi
CategoryEnglish
Source pdffile.co.in
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महेश नवमी व्रत कथा | Mahesh Navami Vrat Katha Hindi

नमस्कार मित्रों, आज इस लेख के माध्यम से हम आप सभी के लिए महेश नवमी व्रत कथा / Mahesh Navami Vrat Katha PDF प्रदान करने जा रहे हैं। हिन्दी धर्म में महेश नवमी बहुत प्रचलित एवं महत्वपूर्ण व्रत कथा मानी जाती है। यह भगवान भोलेनाथ को समर्पित है। भगवान भोलेनाथ के अनेकों पवित्र एवं सुंदर नाम हैं जैसे – महेश, शिव, महाकाल, त्रिकालदर्शी आदि।

हिन्दू धर्म में भगवान शिव को बहुत ही प्रभावशाली एवं दयालु माना जाता हैं। ऐसे अनेकों भक्त हैं, जो महेश नवमी के व्रत को बहुत अधिक महत्वपूर्ण मानते हैं, एवं  भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए महेश नवमी का व्रत बड़े ही भक्ति-भाव से करते हैं। भगवान शिव त्रिमूर्ति में से एक माने जाते हैं। जिनके नाम इस प्रकार हैं- भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान महेश (शिव जी)।

भगवान शिव अपने भक्तों द्वारा की गयी थोड़ी पूजा-अर्चना करने से भी शीघ्र प्रसन्न होकर अपने भक्तों की मनोकामना को पूर्ण कर देते हैं।  महेश नमवी का व्रत करने से घर में सुख, शांति एवं समृद्धि बनी रहती है। इसीलिए अगर आप भी भगवान शिव को शीघ्र प्रसन्न करना चाहते हैं और उनका विशेष आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं तो महेश नवमी का व्रत श्रद्धापूर्वक अवश्य करें।

महेश नवमी व्रत कथा / Mahesh Navami Vrat Katha PDF

  • बहुत समय पहले खडगलसेन नाम का एक प्रतापी राजा राज करता था, परन्तु उसकी कोई संतान नहीं थी। राजा को पुत्रकामेष्टी यज्ञ से पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई।
  • राजा ने अपने पुत्र का नाम कुंवर सुजान रखा। परन्तु ऋषियों ने 20 वर्ष तक राजा को अपने पुत्र को उत्तर दिशा में न जाने देने को कहा। राजा का पुत्र एक दिन शिकार खेलते हुए उत्तर दिशा में सूरज कुण्ड की ओर चल पड़ा।
  • सैनिकों के मना करने पर भी नहीं रूका और वहां कुछ ऋषियों को यज्ञ करता देख क्रोधित हो गया। राजकुमार ने ऋषियों को उस उत्तर दिशा में न आने देने की बात पर बुरा भला कहा और सैनिकों से यज्ञ में विघ्न उत्पन्न करवाया, जिससे क्रोधित हो कर ऋषियों ने श्राप दे दिया और राजकुमार समेत सभी सैनिक पत्थर हो गये।
  • समाचार सुनकर राजा खडगलसेन का निधन हो गया, सभी रानियां विधवा हो गईं। राजकुमार की पत्नी चन्द्रावती सभी सैनिकों की पत्नियों के साथ ऋषियों के पास गईं और क्षमा-याचना की।
  • ऋषियों ने उन्हें उमापति भगवान महेश की पूजा करने को कहा। रानी चन्द्रावती की तपस्या से प्रसन्न हो कर भगवान शिव ने ऋषियों के श्राप को निष्फल कर दिया और उसे अखण्ड सौभाग्यवती होने का वरदान दिया।
  • राजकुमार सुजान कुवंर ने सभी सैनिकों के साथ उस दिन से क्षत्रिय धर्म त्याग दिया और व्यापर करने लगे। भगवान महेश के नाम से माहेश्वरी कहलाने लगे। तब से माहेश्वरी समाज में महेश नवमी का पर्व मनाया जाने लगा।

महेश नवमी पूजा – विधि / Mahesh Navami Puja Vidhi

  • महेश नवमी व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर आदि से निवृत्त हो लें।
  • स्नान करने के पश्चात घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें।
  • अब भगवान शिव एवं माता पार्वती का गंगाजल से अभिषेक करें।
  • किसी भी शुभ कार्य से पहले भगवान गणेश की पूजा- अर्चना की जाती है।
  • इसीलिए सर्वप्रथम भगवान गणेश जी की पूजा अवश्य कर लें, क्योंकि बिना गणेश जी की पूजा किए किसी भी पूजा-अर्चना का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता।
  • इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती को पुष्प अर्पित करें।
  • अंत में भगवान शिव और माता पार्वती को भोग लगाएं और आरती करें।
  • भोग लगाते समय इस बात का ध्यान अवश्य रखें कि भगवान को सिर्फ सात्विक चीजों का भोग लगाया जाता है।

महेश नवमी महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महेश नवमी के दिन भगवान शंकर व माता पार्वती की पूजा करने से सभी भक्तों की मनोकामनाएं शीघ्र ही पूर्ण हो जाती हैं। ऐसी मान्यता है कि महेश नवमी के दिन भगवान शिव की कृपा से भक्तों को पापों से मुक्ति मिल जाती है।

महेश नवमी 2022 शुभ मुहूर्त

ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 08 जून को सुबह 08 बजकर 20 मिनट से प्रारंभ होगी,

जो कि 9 जून को सुबह 08 बजकर 21 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार महेश नवमी 08 जून को मनाई जाएगी।

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