नमामि शमीशान | Namami Shamishan PDF in Hindi

नमामि शमीशान | Namami Shamishan Hindi PDF Download

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नमामि शमीशान | Namami Shamishan PDF Details
नमामि शमीशान | Namami Shamishan
PDF Name नमामि शमीशान | Namami Shamishan PDF
No. of Pages 3
PDF Size 0.07 MB
Language Hindi
CategoryEnglish
Source pdfsource.org
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नमामि शमीशान | Namami Shamishan Hindi

नमस्कार मित्रों, आज इस लेख के माध्यम से हम आप सभी के लिए नमामि शमीशान PDF / Namami Shamishan PDF in Hindi प्रदान करने जा रहे हैं। नमामि शमीशान एक बहुत ही सुंदर एवं प्रभावशाली स्तोत्र है। हिन्दू धार्मिक पुराणों में इस स्तोत्र को का विस्तृत वर्णन मिलता है। यह स्तोत्र भगवान शिव जी को समर्पित है। भगवान शंकर हिन्दू धर्म में सबसे अधिक पूजे जाने वाले भगवान हैं।

संस्कृत भाषा में इस स्तोत्र को रुद्राष्टकम स्तोत्र के नाम से जाना जाता है। इस दिव्य स्तोत्र की रचना महान कवि तुलसीदास जी ने की थी। इस रचना के माध्यम से भगवान शिव के रुद्र रूप का बड़ी ही सुंदरता से वर्णन किया गया है। इस स्तोत्र का पाठ करने से भगवान शिव के भक्तों की सभी मनोकामनाएँ शीघ्र ही पूर्ण हो जाती है। अनेकों भक्त इस स्तोत्र का अपने दैनिक जीवन में नियमपूर्वक पाठ करते हैं।

हिंदू वैदिक शास्त्रों के अनुसार, नमामि शमीशान निर्वाण रूपं स्तोत्र को अधिक शक्तिशाली स्तोत्र इसलिए माना जाता है क्योंकि प्रतिदिन इसका पाठ करने से भगवान शिव शीघ्र ही प्रसन्न हो जाते हैं तथा अपने भक्तों को विशेष वर प्रदान करते हैं। इस चमत्कारी पाठ से व्यक्तियों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से शीघ्र ही छुटकारा मिल जाता है। यदि आप भी भगवान शिव को आसानी से प्रसन्न करना चाहते हैं तो नमामि शमीशान निर्वाण रूपं स्तोत्र का श्रद्धापूर्वक पाठ अवश्य करें।

नमामि शमीशान PDF / Namami Shamishan PDF in Hindi

नमामीशमीशान निर्वाणरूपं विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम l

निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं चिदाकाशमाकाशवासं भजेअहम ll

निराकारमोंकारमूलं तुरीयं गिरा घ्य़ान गोतीतमीशं गिरीशम l

करालं महाकाल कालं कृपालं गुणागार संसारपारं नतोअहम ll

तुश्हाराद्रि संकाश गौरं गभीरं मनोभूत कोटिप्रभा श्री शरीरम l

स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारु गङ्गा लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजङ्गा ll

चलत्कुण्डलं भ्रू सुनेत्रं विशालं प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम l

मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं प्रियं शंकरं सर्वनाथं भजामि ll

प्रचण्डं प्रकृश्ह्टं प्रगल्भं परेशं अखण्डं अजं भानुकोटिप्रकाशम l

त्रयः शूल निर्मूलनं शूलपाणिं भजे.अहं भवानीपतिं भावगम्यम ll

कलातीत कल्याण कल्पान्तकारी सदा सज्जनानन्ददाता पुरारी l

चिदानन्द संदोह मोहापहारी प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी ll

न यावतह उमानाथ पादारविन्दं भजन्तीह लोके परे वा नराणाम l

न तावत.ह सुखं शान्ति सन्तापनाशं प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासम ll

न जानामि योगं जपं नैव पूजां नतो.अहं सदा सर्वदा शम्भु तुभ्यम l

जरा जन्म दुःखौघ तातप्यमानं प्रभो पाहि आपन्नमामीश शम्भो ll

रुद्राश्ह्टकमिदं प्रोक्तं विप्रेण हरतोश्हये l

ये पठन्ति नरा भक्त्या तेश्हां शम्भुः प्रसीदति ll

ll इति श्री गोस्वामी तुलसिदास कृतम श्रीरुद्राश्ह्टकम संपूर्णम ll

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