निर्जला एकादशी व्रत कथा PDF | Nirjala Ekadashi Vrat Katha PDF in Hindi

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निर्जला एकादशी व्रत कथा PDF | Nirjala Ekadashi Vrat Katha PDF Details
निर्जला एकादशी व्रत कथा PDF | Nirjala Ekadashi Vrat Katha
PDF Name निर्जला एकादशी व्रत कथा PDF | Nirjala Ekadashi Vrat Katha PDF
No. of Pages 8
PDF Size 0.98 MB
Language Hindi
CategoryReligion & Spirituality
Source pdffile.co.in
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निर्जला एकादशी व्रत कथा PDF | Nirjala Ekadashi Vrat Katha Hindi

नमस्कार मित्रों, आज इस लेख के माध्यम से हम आप सभी के लिए निर्जला एकादशी व्रत कथा / Nirjala Ekadashi Vrat Katha in Hindi PDF प्रदान करने जा रहे हैं। सनातन हिन्दू धर्म में निर्जला एकादशी का विशेष महत्व माना गया है। यह भगवान श्री हरी विष्णु जी को समर्पित है। निर्जला एकादशी के दिन बिना अन्न-जल ग्रहण किए व्रत किया जाता है। इसीलिए इस एकादशी के व्रत को बहुत ही कठिन माना जाता है।

निर्जला एकादशी को पाण्डव एकादशी या भीमसेन एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। हिन्दू धर्म में निर्जला व्रत का पालन बड़े ही भक्ति-भाव से किया जाता है। इस दिन व्रत एवं पूजा-अर्चना करने से विष्णु जी शीघ्र ही प्रसन्न हो जाते हैं। इस व्रत को करने से सभी एकादशी का फल प्राप्त होता है एवं मनचाहे फल की प्राप्ति होती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने वाले भक्तों को अंत काल में सुख भोगकर मोक्ष की अवश्य प्राप्ति होती है।

सनातन हिन्दू धर्म में भगवान विष्णु का विशेष महत्व माना गया है। वह संसार के पालनकर्ता एवं दयानिधि हैं। इसीलिए अगर आप भी भगवान विष्णु की कृपा अपने जीवन में पाना चाहते हैं तो निर्जला एकादशी का श्रद्धाभाव से व्रत करें। अगर आप बिना जल ग्रहण किए व्रत करने में असमर्थ हैं तो फलाहार भी कर सकते हैं। इस दिन निर्जला एकादशी की कथा पढ़ने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है इसीलिए व्रत कथा को अवश्य पढ़ें अथवा श्रवण करें।

निर्जला एकादशी व्रत कथा PDF / Nirjala Ekadashi Vrat Katha Hindi PDF

  • भीमसेन व्यासजी से कहने लगे कि हे पितामह! भ्राता युधिष्ठिर, माता कुंती, द्रोपदी, अर्जुन, नकुल और सहदेव आदि सब एकादशी का व्रत करने को कहते हैं, परंतु महाराज मैं उनसे कहता हूँ कि भाई मैं भगवान की शक्ति पूजा आदि तो कर सकता हूँ, दान भी दे सकता हूँ परंतु भोजन के बिना नहीं रह सकता।
  • इस पर व्यासजी कहने लगे कि हे भीमसेन! यदि तुम नरक को बुरा और स्वर्ग को अच्छा समझते हो तो प्रति मास की दोनों एक‍ा‍दशियों को अन्न मत खाया करो। भीम कहने लगे कि हे पितामह! मैं तो पहले ही कह चुका हूँ कि मैं भूख सहन नहीं कर सकता। यदि वर्षभर में कोई एक ही व्रत हो तो वह मैं रख सकता हूँ, क्योंकि मेरे पेट में वृक नाम वाली अग्नि है सो मैं भोजन किए बिना नहीं रह सकता।
  • भोजन करने से वह शांत रहती है, इसलिए पूरा उपवास तो क्या एक समय भी बिना भोजन किए रहना कठिन है। अत: आप मुझे कोई ऐसा व्रत बताइए जो वर्ष में केवल एक बार ही करना पड़े और मुझे स्वर्ग की प्राप्ति हो जाए। श्री व्यासजी कहने लगे कि हे पुत्र! बड़े-बड़े ऋषियों ने बहुत शास्त्र आदि बनाए हैं जिनसे बिना धन के थोड़े परिश्रम से ही स्वर्ग की प्राप्ति हो सकती है।
  • इसी प्रकार शास्त्रों में दोनों पक्षों की एका‍दशी का व्रत मुक्ति के लिए रखा जाता है। व्यासजी के वचन सुनकर भीमसेन नरक में जाने के नाम से भयभीत हो गए और काँपकर कहने लगे कि अब क्या करूँ? मास में दो व्रत तो मैं कर नहीं सकता, हाँ वर्ष में एक व्रत करने का प्रयत्न अवश्य कर सकता हूँ। अत: वर्ष में एक दिन व्रत करने से यदि मेरी मुक्ति हो जाए तो ऐसा कोई व्रत बताइए।
  • यह सुनकर व्यासजी कहने लगे कि वृषभ और मिथुन की संक्रां‍‍ति के बीच ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की जो एकादशी आती है, उसका नाम निर्जला है। तुम उस एकादशी का व्रत करो। इस एकादशी के व्रत में स्नान और आचमन के सिवा जल वर्जित है। आचमन में छ: मासे से अधिक जल नहीं होना चाहिए अन्यथा वह मद्यपान के सदृश हो जाता है।
  • इस दिन भोजन नहीं करना चाहिए, क्योंकि भोजन करने से व्रत नष्ट हो जाता है। यदि एकादशी को सूर्योदय से लेकर द्वादशी के सूर्योदय तक जल ग्रहण न करे तो उसे सारी एकादशियों के व्रत का फल प्राप्त होता है। द्वादशी को सूर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि करके ब्राह्मणों का दान आदि देना चाहिए। इसके पश्चात भूखे और सत्पात्र ब्राह्मण को भोजन कराकर फिर आप भोजन कर लेना चाहिए। इसका फल पूरे एक वर्ष की संपूर्ण एकादशियों के बराबर होता है।
  • व्यासजी कहने लगे कि हे भीमसेन! यह मुझको स्वयं भगवान ने बताया है। इस एकादशी का पुण्य समस्त तीर्थों और दानों से अधिक है। केवल एक दिन मनुष्य निर्जल रहने से पापों से मुक्त हो जाता है। जो मनुष्य निर्जला एकादशी का व्रत करते हैं उनकी मृत्यु के समय यमदूत आकर नहीं घेरते वरन भगवान के पार्षद उसे पुष्पक विमान में बिठाकर स्वर्ग को ले जाते हैं। अत: संसार में सबसे श्रेष्ठ निर्जला एकादशी का व्रत है। इसलिए यत्न के साथ इस व्रत को करना चाहिए।
  • उस दिन ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का उच्चारण करना चाहिए और गौदान करना चाहिए। इस प्रकार व्यासजी की आज्ञानुसार भीमसेन ने इस व्रत को किया। इसलिए इस एकादशी को भीमसेनी या पांडव एकादशी भी कहते हैं। निर्जला व्रत करने से पूर्व भगवान से प्रार्थना करें कि हे भगवन! आज मैं निर्जला व्रत करता हूँ, दूसरे दिन भोजन करूँगा। मैं इस व्रत को श्रद्धापूर्वक करूँगा, अत: आपकी कृपा से मेरे सब पाप नष्ट हो जाएँ।
  • इस दिन जल से भरा हुआ एक घड़ा वस्त्र से ढँक कर स्वर्ण सहित दान करना चाहिए। जो मनुष्य इस व्रत को करते हैं उनको करोड़ पल सोने के दान का फल मिलता है और जो इस दिन यज्ञादिक करते हैं उनका फल तो वर्णन ही नहीं किया जा सकता। इस एकादशी के व्रत से मनुष्य विष्णुलोक को प्राप्त होता है। जो मनुष्य इस दिन अन्न खाते हैं, ‍वे चांडाल के समान हैं। वे अंत में नरक में जाते हैं।
  • जिसने निर्जला एकादशी का व्रत किया है वह चाहे ब्रह्म हत्यारा हो, मद्यपान करता हो, चोरी की हो या गुरु के साथ द्वेष किया हो मगर इस व्रत के प्रभाव से स्वर्ग जाता है। हे कुंतीपुत्र! जो पुरुष या स्त्री श्रद्धापूर्वक इस व्रत को करते हैं उन्हें अग्रलिखित कर्म करने चाहिए। प्रथम भगवान का पूजन, फिर गौदान, ब्राह्मणों को मिष्ठान्न व दक्षिणा देनी चाहिए तथा जल से भरे कलश का दान अवश्य करना चाहिए।
  • निर्जला के दिन अन्न, वस्त्र, उपाहन (जूती) आदि का दान भी करना चाहिए। जो मनुष्य भक्तिपूर्वक इस कथा को पढ़ते या सुनते हैं, उन्हें निश्चय ही स्वर्ग की प्राप्ति होती है।

एकादशी पूजा सामग्री / Nirjala Ekadashi Puja Samagri

कर्मांक वस्तु
1. श्री विष्णु जी का चित्र अथवा मूर्ति,
2. पुष्प,
3. नारियल,
4. सुपारी,
5. फल,
6. लौंग,
7. धूप,
8. दीप,
9. घी,
10. पंचामृत,
11. अक्षत,
12. तुलसी दल,
13. चंदन
14. मिष्ठान

निर्जला एकादशी का शुभ मुहूर्त / Nirjala Ekadashi 2022 Date And Time in Hindi

  • निर्जला एकादशी पारण
निर्जला एकादशी शुक्रवार, जून 10, 2022 को
11वाँ जून को, पारण (व्रत तोड़ने का) समय – 01:38 पी एम से 04:26 पी एम
पारण तिथि के दिन हरि वासर समाप्त होने का समय – 11:09 ए एम
एकादशी तिथि प्रारम्भ – जून 10, 2022 को 07:25 ए एम बजे
एकादशी तिथि समाप्त – जून 11, 2022 को 05:45 ए एम बजे
  • निर्जला एकादशी पारण
गौण निर्जला एकादशी शनिवार, जून 11, 2022 को
12वाँ जून को, गौण एकादशी के लिए पारण (व्रत तोड़ने का) समय – 05:16 ए एम से 08:04 ए एम
पारण के दिन द्वादशी सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाएगी।
एकादशी तिथि प्रारम्भ  जून 10, 2022 को 07:25 ए एम बजे
एकादशी तिथि समाप्त  जून 11, 2022 को 05:45 ए एम बजे

निर्जला एकादशी व्रत का महत्व

  • भगवान श्री हरी विष्णु जी को समर्पित निर्जला एकादशी का नियमपूर्वक व्रत रखने से व्यक्ति के न केवल वर्ष भर की सभी एकादशी के व्रत का फल मिलता है बल्कि विष्णु लोक की भी प्राप्ति का द्वार खुल जाता है।
  • इस दिव्य एकादशी के व्रत करने से भगवान विष्णु जी के भक्तों के समस्त पाप कर्म निष्फल हो जाते हैं।

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