पांडुरंगाष्टक स्तोत्र | Pandurangashtakam PDF in Sanskrit

पांडुरंगाष्टक स्तोत्र | Pandurangashtakam Sanskrit PDF Download

पांडुरंगाष्टक स्तोत्र | Pandurangashtakam Sanskrit PDF Download for free using the direct download link given at the bottom of this article.

पांडुरंगाष्टक स्तोत्र | Pandurangashtakam PDF Details
पांडुरंगाष्टक स्तोत्र | Pandurangashtakam
PDF Name पांडुरंगाष्टक स्तोत्र | Pandurangashtakam PDF
No. of Pages 5
PDF Size 0.93 MB
Language Sanskrit
CategoryReligion & Spirituality
Source pdffile.co.in
Download LinkAvailable ✔
Downloads17
Tags:

पांडुरंगाष्टक स्तोत्र | Pandurangashtakam Sanskrit

नमस्कार मित्रों, आज इस लेख के माध्यम से हम आप सभी के लिए पांडुरंगाष्टक स्तोत्र / Pandurangashtakam PDF प्रदान करने जा रहे हैं। पांडुरंगाष्टक एक बहुत ही शक्तिशाली एवं दिव्य वैदिक स्तोत्र है। इसे मुख्य रूप से संस्कृत में लिखा गया है। यह भगवान पांडुरंग जी को समर्पित है। भगवान पांडुरंग भगवान श्री हरी विष्णु जी के दिव्य रूपों में से एक माने जाते हैं।

भगवान पांडुरंग जी को पंढरीनाथ, पांडुरंग, विठाई, विठोबा, विट्ठल गुरुराव, श्री हरि, आदि पवित्र नामों से जाना जाता है। इस स्तोत्र के पाठ से भगवान पांडुरंग जी की उनके भक्तों पर विशेष कृपा प्राप्त होती है। पांडुरंग भगवान जी की पूजा दुनिया भर के भक्तों द्वारा की जाती है।परंतु पांडुरंग जी के इस दिव्य स्वरूप को मुख्यतः दक्षिण भारत में अधिकांश पूजा जाता है।

श्री पांडुरंगा अष्टकम / Shri Pandurangashtakam PDF

महायोगपीठे तटे भीमरथ्या

वरं पुण्डरीकाय दातुं मुनीन्द्रैः ।

समागत्य तिष्ठन्तमानंदकंदं

परब्रह्मलिङ्गं भजे पाण्डुरङ्गम् ॥ १॥

तटिद्वाससं नीलमेघावभासं

रमामंदिरं सुंदरं चित्प्रकाशम् ।

वरं त्विष्टकायां समन्यस्तपादं

परब्रह्मलिङ्गं भजे पाण्डुरङ्गम् ॥ २॥

प्रमाणं भवाब्धेरिदं मामकानां

नितम्बः कराभ्यां धृतो येन तस्मात् ।

विधातुर्वसत्यै धृतो नाभिकोशः

परब्रह्मलिङ्गं भजे पाण्डुरङ्गम् ॥ ३॥

स्फुरत्कौस्तुभालङ्कृतं कण्ठदेशे

श्रिया जुष्टकेयूरकं श्रीनिवासम् ।

शिवं शांतमीड्यं वरं लोकपालं

परब्रह्मलिङ्गं भजे पाण्डुरङ्गम् ॥ ४॥

शरच्चंद्रबिंबाननं चारुहासं

लसत्कुण्डलाक्रांतगण्डस्थलांतम् ।

जपारागबिंबाधरं कञ्जनेत्रं

परब्रह्मलिङ्गं भजे पाण्डुरङ्गम्॥ ५॥

किरीटोज्वलत्सर्वदिक्प्रांतभागं

सुरैरर्चितं दिव्यरत्नैरनर्घैः ।

त्रिभङ्गाकृतिं बर्हमाल्यावतंसं

परब्रह्मलिङ्गं भजे पाण्डुरङ्गम्॥ ६॥

विभुं वेणुनादं चरंतं दुरंतं

स्वयं लीलया गोपवेषं दधानम् ।

गवां बृन्दकानन्ददं चारुहासं

परब्रह्मलिङ्गं भजे पाण्डुरङ्गम् ॥ ७॥

अजं रुक्मिणीप्राणसञ्जीवनं तं

परं धाम कैवल्यमेकं तुरीयम् ।

प्रसन्नं प्रपन्नार्तिहं देवदेवं

परब्रह्मलिङ्गं भजे पाण्डुरङ्गम् ॥ ८॥

स्तवं पाण्डुरंगस्य वै पुण्यदं ये

पठन्त्येकचित्तेन भक्त्या च नित्यम् ।

भवांभोनिधिं ते वितीर्त्वान्तकाले

हरेरालयं शाश्वतं प्राप्नुवन्ति ॥

॥ इति श्रीमत्परमहंसपरिव्राजकाचार्यस्य श्रीगोविन्दभगवत्पूज्यपादशिष्यस्य श्रीमच्छङ्करभगवतः कृतौ पाण्डुरङ्गाष्टकं सम्पूर्णम् ॥

पांडुरंगाष्टक स्तोत्र / Pandurang Ashtakam Sanskrit PDF

नीचे दिये गए लिंक पर क्लिक करके आप Pandurangashtakam PDF को आसानी से डाउनलोड कर सकते हैं।


पांडुरंगाष्टक स्तोत्र | Pandurangashtakam PDF Download Link