परशुराम जी की आरती | Parshuram Aarti PDF in Hindi

परशुराम जी की आरती | Parshuram Aarti Hindi PDF Download

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परशुराम जी की आरती | Parshuram Aarti PDF Details
परशुराम जी की आरती | Parshuram Aarti
PDF Name परशुराम जी की आरती | Parshuram Aarti PDF
No. of Pages 7
PDF Size 0.99 MB
Language Hindi
CategoryReligion & Spirituality
Source pdffile.co.in
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परशुराम जी की आरती | Parshuram Aarti Hindi

नमस्कार पाठकों, इस लेख के माध्यम से आप परशुराम जी की आरती / Parshuram Aarti in Hindi PDF प्राप्त कर सकते हैं। हिन्दू सनातन धर्म में परशुराम जी को विष्णु भगवान का छठवाँ अवतार माना जाता है। परशुराम जी का जन्म त्रेता युग (रामायण काल) में एक ब्राह्मण के यहाँ हुआ था। परशुराम जी की महिमा का वर्णन हिन्दू वैदिक धर्म ग्रन्थों में प्राप्त होता है।

भगवान परशुराम जी को श्री हरी विष्णु जी का एक उग्र अवतार माना जाता है। वह विभिन्न प्रकार की शस्त्र विद्या में पारंगत हैं। शास्त्रों के अनुसार भगवान परशुराम जी अमर हैं अतः वह प्रत्येक युग में उपस्थित हैं। यदि आप अपने जीवन में भगवान परशुराम का आशीर्वाद ग्रहण करना चाहते हैं तो आपको नियमित रूप से उनका पूजन अवश्य करना चाहिए।

परशुराम बाबा की आरती / Parshuram Bhagwan Ki Aarti in Hindi

ओउम जय परशुधारी, स्वामी जय परशुधारी।

सुर नर मुनिजन सेवत, श्रीपति अवतारी।।

ओउम जय।।

जमदग्नी सुत नरसिंह, मां रेणुका जाया।

मार्तण्ड भृगु वंशज, त्रिभुवन यश छाया।।

ओउम जय।।

कांधे सूत्र जनेऊ, गल रुद्राक्ष माला।

चरण खड़ाऊँ शोभे, तिलक त्रिपुण्ड भाला।।

ओउम जय।।

ताम्र श्याम घन केशा, शीश जटा बांधी।

सुजन हेतु ऋतु मधुमय, दुष्ट दलन आंधी।।

ओउम जय।।

मुख रवि तेज विराजत, रक्त वर्ण नैना।

दीन-हीन गो विप्रन, रक्षक दिन रैना।।

ओउम जय।।

कर शोभित बर परशु, निगमागम ज्ञाता।

कंध चार-शर वैष्णव, ब्राह्मण कुल त्राता।।

ओउम जय।।

माता पिता तुम स्वामी, मीत सखा मेरे।

मेरी बिरत संभारो, द्वार पड़ा मैं तेरे।।

ओउम जय।।

अजर-अमर श्री परशुराम की, आरती जो गावे।

पूर्णेन्दु शिव साखि, सुख सम्पति पावे।।

ओउम जय।।

श्री परशुराम जी की दूसरी आरती / Shri Parshuram Second Aarti Lyrics PDF

शौर्य तेज बल-बुद्घि धाम की॥

रेणुकासुत जमदग्नि के नंदन।

कौशलेश पूजित भृगु चंदन॥

अज अनंत प्रभु पूर्णकाम की।

आरती कीजे श्री परशुराम की ॥1॥

नारायण अवतार सुहावन।

प्रगट भए महि भार उतारन॥

क्रोध कुंज भव भय विराम की।

आरती कीजे श्री परशुराम की ॥2॥

परशु चाप शर कर में राजे।

ब्रम्हसूत्र गल माल विराजे॥

मंगलमय शुभ छबि ललाम की।

आरती कीजे श्री परशुराम की ॥3॥

जननी प्रिय पितु आज्ञाकारी।

दुष्ट दलन संतन हितकारी॥

ज्ञान पुंज जग कृत प्रणाम की।

आरती कीजे श्री परशुराम की ॥4॥

परशुराम वल्लभ यश गावे।

श्रद्घायुत प्रभु पद शिर नावे॥

छहहिं चरण रति अष्ट याम की।

आरती कीजे श्री परशुराम की ॥5॥

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