PDFSource

पितर देवता की आरती | Pitra Dev Ki Aarti PDF in Hindi

पितर देवता की आरती | Pitra Dev Ki Aarti Hindi PDF Download

पितर देवता की आरती | Pitra Dev Ki Aarti Hindi PDF Download for free using the direct download link given at the bottom of this article.

पितर देवता की आरती | Pitra Dev Ki Aarti PDF Details
पितर देवता की आरती | Pitra Dev Ki Aarti
PDF Name पितर देवता की आरती | Pitra Dev Ki Aarti PDF
No. of Pages 4
PDF Size 0.51 MB
Language Hindi
CategoryEnglish
Download LinkAvailable ✔
Downloads17
If पितर देवता की आरती | Pitra Dev Ki Aarti is a illigal, abusive or copyright material Report a Violation. We will not be providing its PDF or any source for downloading at any cost.

पितर देवता की आरती | Pitra Dev Ki Aarti Hindi

धर्मशास्त्रीय मतानुसार श्राद्ध का समय अपरान्ह काल है। इस समय पितृ द्वार पर आते हैं। वायु पूराण के अनुसार इन सोलह दिनों में जो खाद्य पदार्थ आदि दिया जाता है वह अमृत रूप होकर पितरों को प्राप्त होता है। श्राद्ध में श्रद्धा, शुद्धता व पवित्रता जरूरी है।

श्राद्ध में तर्पण का बहुत अधिक महत्व है। इससे पितर संतुष्ट व तृप्त होते हैं। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार जिस प्रकार वर्षा का जल सीप में गिरने से मोती, कदली में गिरने से कपूर, खेत में गिरने से अन्न और धूल में गिरने से कीचड़ बन जाता है, उसी प्रकार तर्पण के जल से सूक्ष्म वाष्पकण- देव योनि के पितर को अमृत, मनुष्य योनि के पितर को अन्न, पशु योनि के पितर को चारा व अन्य योनियों के पितरों को उनके अनुरूप भोजन व सन्तुष्टि प्रदान करते हैं।

Pitar Ji Aarti Lyrics PDF

जय जय पितर जी महाराज,

मैं शरण पड़यों हूँ थारी,

शरण पड़यो हूँ थारी देवा,

रखियो लाज हमारी,

जय जय पितृ जी महाराज, मैं शरण पड़यों हूँ थारी ।।

आप ही रक्षक आप ही दाता,

आप ही खेवनहारे,

मैं मूरख हूँ कछु नहिं जाणूं,

आप ही हो रखवारे,

जय जय पितृ जी महाराज, मैं शरण पड़यों हूँ थारी।।

 

आप खड़े हैं हरदम हर घड़ी,

करने मेरी रखवारी।

हम सब जन हैं शरण आपकी,

है ये अरज गुजारी,

जय जय पितृ जी महाराज, मैं शरण पड़यों हूँ थारी ।।

देश और परदेश सब जगह,

आप ही करो सहाई,

काम पड़े पर नाम आपको,

लगे बहुत सुखदाई,

जय जय पितृ जी महाराज, मैं शरण पड़यों हूँ थारी।।

भक्त सभी हैं शरण आपकी,

अपने सहित परिवार,

रक्षा करो आप ही सबकी,

रहूँ मैं बारम्बार,

जय जय पितृ जी महाराज, मैं शरण पड़यों हूँ थारी ।।

जय जय पितर जी महाराज,

मैं शरण पड़यों हूँ थारी,

शरण पड़यो हूँ थारी देवा,

रखियो लाज हमारी,

जय जय पितृ जी महाराज, मैं शरण पड़यों हूँ थारी।।

तर्पण के प्रकार

  • पहला देव-तर्पण
  • दूसरा ऋषि तर्पण
  • दिव्य मानव तर्पण
  • दिव्य पितृ-तर्पण
  • यम तर्पण
  • मनुष्य-पितृ तर्पण

पितृ तर्पण विधि

श्राद्ध में किए जाने वाले तर्पण में एक लोटे में साफ जल लेकर उसमें दूध, जौ, चावल और गंगा जल मिलाकर तर्पण कार्य करना चाहिए। पितरों का तर्पण करते समय पात्र में जल लेकर दक्षिण दिशा में मुख करके बायां घुटना मोड़कर बैठें। अगर आप जनेऊ धारक हैं तो अपने जनेऊ को बाएं कंधे से उठाकर दाहिने कंधे पर रखें और हाथ के अंगूठे के सहारे से जल को धीरे-धीरे नीचे की ओर गिराएं। जो अभी मैंने आपको तर्पण की मुद्रा बताई उस मुद्रा को पितृ तीर्थ मुद्रा कहते हैं।

इसी मुद्रा में रहकर अपने सभी पितरों को तीन-तीन अंजलि जल देना चाहिए। तर्पण हमेशा साफ कपड़े पहनकर श्रद्धा से करना चाहिए। बिना श्रद्धा के धर्म-कर्म तामसी तथा खंडित होते हैं। इसलिए श्रद्धा भाव होना जरूरी है।

पितर देवता की आरती PDF डाउनलोड करने के लिए नीचे दिए हुए लिंक पर क्लिक करें 


पितर देवता की आरती | Pitra Dev Ki Aarti PDF Download Link

Report This
If the download link of Gujarat Manav Garima Yojana List 2022 PDF is not working or you feel any other problem with it, please Leave a Comment / Feedback. If पितर देवता की आरती | Pitra Dev Ki Aarti is a illigal, abusive or copyright material Report a Violation. We will not be providing its PDF or any source for downloading at any cost.

RELATED PDF FILES

Leave a Reply

Your email address will not be published.