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रामायण कथा | Ramayan Katha PDF in Hindi

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रामायण कथा | Ramayan Katha PDF Details
रामायण कथा | Ramayan Katha
PDF Name रामायण कथा | Ramayan Katha PDF
No. of Pages 564
PDF Size 13.54 MB
Language Hindi
CategoryEnglish
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रामायण कथा | Ramayan Katha Hindi

नमस्कार दोस्तों आज हम आपके लिए रामायण की कहानी लेकर आए हैं। रामायण कथा | Ramayan Katha PDF हिंदी भाषा में। महाकाव्य के ऐतिहासिक विकास और संरचनागत परतों को जानने के लिए कई प्रयास किए गए हैं । 7वीं से 4वीं शताब्दी ईसा पूर्व में पाठ श्रेणी के प्रारंभिक चरण के लिए विभिन्न हालिया विद्वानों के अनुमान, बाद के चरण तीसरी शताब्दी सीई तक फैले हुए हैं। कुछ भारतीयों का कहना है कि यह 600 ईसा पूर्व से पहले लिखा गया था।  इसके पीछे तर्क यह है कि इसके बाद जो महाभारत आया वह बौद्ध धर्म के बारे में मौन है, हालांकि इसमें जैन, शैव, पाशुपत आदि जैसी अन्य परंपराओं का वर्णन है। इसलिए, रामायण गौतम बुद्ध के समय से पहले होनी चाहिए। भाषा की दृष्टि से भी यह पाणिनि के समय से पहले की होनी चाहिए।

रामायण का समय त्रेतायुग का माना जाता है। हिंदू कैलेंडर चतुर्युगी प्रणाली पर आधारित है, जिसके अनुसार समय अवधि को चार युगों – सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग और कलियुग में विभाजित किया गया है, जो प्रत्येक चतुर्युग (43,20,000 वर्ष) के बाद दोहराया जाता है। कलियुग 4,32,000 वर्षों का, द्वापर 8,64,000 वर्षों का, त्रेता युग 12,96,000 वर्षों का और सतयुग 17,28,000 वर्षों का होता है। इस गणना के अनुसार रामायण का समय कम से कम 8,70,000 वर्ष (वर्तमान कलियुग के 5,118 वर्ष + पिछले द्वापर युग के 8,64,000 वर्ष) सिद्ध होता है। रामायण मीमांसा के रचयिता धर्मसम्राट स्वामी करपात्री के अनुसार गोवर्धन पुरी शंकराचार्य पीठ, पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र, श्री भगवतानंद गुरु, श्री राघवेंद्रचरितम के रचयिता, श्री राम अवतार श्वेतवरः कल्प के सातवें वैवस्वत मन्वन्तर के चौबीसवें त्रेता युग में हुए, जिसके अनुसार श्री रामचंद्र जी का काल लगभग ढाई वर्ष का था। करोड़ साल पहले से है। इस संदर्भ में विचार पीयूष, भुसुंडी रामायण, पद्म पुराण, हरिवंश पुराण, वायु पुराण, संजीवनी रामायण और पुराणों से दिया गया है।

रामायण कथा | Ramayan Katha PDF – Summary

रामायण संकलन है राम के जीवनकाल से जुड़ी घटनाओं का जिसमें गुरू शिक्षा, विवाह, वनवास, मित्रता, युद्ध, अग्नि परीक्षा, विछोह, परित्याग, अविश्वास, मान-अपमान, जीत, दुख, दीवाली और जलसमाधि तक का जीवंत चित्रण पढ़ने को मिलता है। राम एक ऐसा चरित्र है जिसका जीवन मर्यादा, मूल्यों, सीख, और मानवीय एहसासों से भरा रहा।

राम के लिए पिता के शब्द पत्थर की लकीर थे। गुरु के वचन अमल करने योग्य , माताओं का दुलार बांटने योग्य , भाईयों के प्रति दुलार था, हनुमान के लिए मित्रता और सीता के प्रति अथाह प्रेम था। राम में वह सभी गुण थे जो किसी भी अच्छे चरित्रवान व्यक्ति /मनुष्य में हो सकते हैं। राम का चरित्र हमें जीवन को मर्यादाओं में रह कर जीने की सीख भी देता है।

वाल्मीकि रामायण के बाद राम के जीवन पर रामचरितमानस 16 वीं शताब्दी के भारतीय भक्ति कवि गोस्वामी तुलसीदास (1532-1623) द्वारा रचित अवधी भाषा में एक महाकाव्य कविता है। रामचरितमानस शब्द का शाब्दिक अर्थ है “राम के कर्मों की झील”। वर्तमान में इसे हिंदी साहित्य की सबसे बड़ी कृतियों में से एक माना जाता है।

यज्ञ समाप्ति के बाद ऋषि ने दशरथ की तीनों पत्नियों को एक-एक कटोरी खीर खाने को दी। खीर खाने के कुछ महीनों बाद ही तीनों रानियाँ गर्भवती हो गयीं। ठीक 9 महीनों बाद राजा दशरथ की सबसे बड़ी रानी कौशल्या ने राम को ( राम भगवान विष्णु के सातवें अवतार थे), कैकयी ने भरत को और सुमित्रा ने जुड़वा बच्चों लक्ष्मण और शत्रुघ्न को जन्म दिया।

जिस प्रकार किसी फिल्म में हीरो, हीरोइन अपना किरदार निभाते हैं उसी प्रकार हर युग (सतयुग, त्रेता, द्वापर तथा कलयुग) में जीव अपने कर्म आधार पर अपना किरदार निभाने हेतु पृथ्वी पर जन्म लेते हैं चाहे वह स्वर्ग का राजा ही क्यों न हो। पिछले कर्मों के फलस्वरूप सबको अपने कर्मों का फल भोगना ही पड़ता है तथा चाहकर भी इस काल रूपी ब्रह्म के जाल से बच नहीं सकते।

ये अरहट का कुंआ लोई, या गल बंध्या है सब कोई।

कीड़ी कुंजर और अवतारा, अरहट डोर बंधे कई बारा।।

चतुर्भुजी भगवान कहावें, हरहट डोर बंधे सब आवें।

यो है खोखापुर का कुंआ, या में पड़ा सो निश्चय मुवा।। 

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