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रथ सप्तमी व्रत कथा PDF | Rath Saptami Vrat Katha PDF in Hindi

रथ सप्तमी व्रत कथा PDF | Rath Saptami Vrat Katha Hindi PDF Download

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रथ सप्तमी व्रत कथा PDF | Rath Saptami Vrat Katha PDF Details
रथ सप्तमी व्रत कथा PDF | Rath Saptami Vrat Katha
PDF Name रथ सप्तमी व्रत कथा PDF | Rath Saptami Vrat Katha PDF
No. of Pages 4
PDF Size 0.54 MB
Language Hindi
CategoryEnglish
Source pdffile.co.in
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रथ सप्तमी व्रत कथा PDF | Rath Saptami Vrat Katha Hindi

नमस्कार प्रिय मित्रो इस लेख के माध्यम से रथ सप्तमी व्रत कथा PDF 2022 के बारे में बता रहे है। यह कथा एक आम कथा नहीं यह सदियों से चली आ रही हिन्दू धर्म में पौराणिक कथा है। रथ सप्तमी कथा को सूर्य कथा है भी कहा जाता है। कहा जाता है की इसी दिन ही कश्यप ऋषि और अदिति के संयोग से भगवान सूर्य का जन्म हुआ था। ऐसा माना जाता है की सूर्य देव की पूजा करने से मनुष्य के जीवन में आये कष्ट दूर हो जाते है और उनकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है। इस रथ सप्तमी कथा में बताया गया है की सूर्य रथ सप्तमी के दिन लोगों को रोग मुक्त करने वाला और पुत्र कामना की पूर्ति करने वाला कहा जाता है। पौराणिक मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र भी रथ सप्तमी के दिन ही सूर्य का ​तप करने के बाद रोग मुक्त हो पाए थे। इस कारण इस दिन को आरोग्य सप्तमी और पुत्र सप्तमी के नाम से जानते है। रथ सप्तमी व्रत माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को आता है।

रथ सप्तमी व्रत कथा PDF | Rath Saptami vrat Katha

एक बार कम्बोज साम्राज्य के राजा यशोवर्मा अति महान राजा थे। उनके साम्राज्य को सम्भालने के लिए उनका कोई उत्तराधिकारी नहीं था। राजा यशोवर्मा ऋषिओ के द्वारा बताये गए उपायों को करते थे ताकि उनकी मनो कामना पूर्ण हो जाये। उन्होंने संतान प्राप्ति के लिए अनेक देवी-देवताओं से मन्नत मांगी और हवनभी कराया ताकि उनके राज्य को सँभालने के लिए एक संतान मिल जाये। उनके इस कामना से उनके भगवान की कृपा से उनके घर में पुत्र का जन्म हुआ था। परन्तु उनकी खुशी ज्यादा दिन नहीं चली थी। क्योंकि उनका पुत्र मानसिक रूप से बीमार था। उस समय उनके राज्य में एक साधु आए थे।

राजा यशोवर्मा ने उनकी स्वागत किया और पूर्ण रूप से खातिरदारी की जिससे प्रसन्न होकर साधु ने उनसे वरदान मांगने के लिए कहा । राजा ने अपने पुत्र की मानसिक बीमारी की बात कही की वह जन्म से ही बीमार है। इस पर साधु ने कहा कि यह तुम्हारे पिछले जन्म के कर्मों का फल है जिसके कारण तुम्हारे पुत्र की यह हालत है। फिर साधु ने राजा को उपाय बताया की वह सूर्य रथ सप्तमी का व्रत सच्ची श्रद्धा और पूरी निष्ठा के साथ करने के लिए कहा था। राजा ने वैसा ही किया। परिणाम स्वरूप राजा का पुत्र धीरे-धीरे मानसिक बीमारी से पूरी तरह ठीक हो गया। उसके बाद राजा के इस उत्तराधिकारी पुत्र ने राज्य पर शासन किया और कीर्ति, यश प्राप्त किया। इस प्रकार रथ सप्तमी व्रत को संतान सप्तमी के नाम से भी जाना जाता है।

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