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सरस्वती चालीसा | Saraswati Chalisa PDF in Hindi

सरस्वती चालीसा | Saraswati Chalisa Hindi PDF Download

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सरस्वती चालीसा | Saraswati Chalisa PDF Details
सरस्वती चालीसा | Saraswati Chalisa
PDF Name सरस्वती चालीसा | Saraswati Chalisa PDF
No. of Pages 7
PDF Size 0.57 MB
Language Hindi
CategoryEnglish
Source pdffile.co.in
Download LinkAvailable ✔
Downloads17
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सरस्वती चालीसा | Saraswati Chalisa Hindi

नमस्कार मित्रों, आज इस लेख के माध्यम से हम आप सभी के लिए सरस्वती चालीसा / Saraswati Chalisa PDF प्रदान करने जा रहे हैं। सनातन हिन्दू धर्म के अनुसार माता सरस्वती विद्या, बुद्धि एवं ज्ञान की देवी मानी जाती है। हिन्दू धर्म में माता सरस्वती जी की बहुत अधिक पूजा-आराधना की जाती है। श्री सरस्वती चालीसा माता सरस्वती को समर्पित है। यह अत्यंत ही चमत्कारी एवं प्रभावशाली चालीसा है।

श्री सरस्वती चालीसा का प्रतिदिन पाठ करने से व्यक्ति को माता सरस्वती जी की विशेष कृपा से ज्ञान एवं बुद्धि की प्राप्ति होती है। यदि आप भी Shri Saraswati Chalisa Lyrics in Hindi पीडीएफ़ प्रारूप में प्राप्त करके माता सरस्वती जी का विशेष आशीर्वाद पाना चाहते हैं तो हमारे इस लेख के माध्यम से आप श्री सरस्वती चालीसा हिंदी में पीडीएफ़ प्रारूप में आसानी से फ्री में डाउनलोड कर सकते हैं तथा सरस्वती चालीसा पढ़ने से लाभ के बारे में भी जान सकते हैं।

जिसका नित्य-प्रतिदिन श्रद्धापूर्वक पाठ करके आप माता सरस्वती जी को आसानी से प्रसन्न कर सकते हैं। ऐसा माना जाता है कि माता सरस्वती जी की कृपा अगर किसी व्यक्ति पर हो जाये तो वह विशेष ज्ञान की प्राप्ति कर लेता है। कहा जाता है कोई भी बच्चा जो पढ़ाई में कमजोर हो या पढ़ने में मन नहीं लगता हो तो केवल सरस्वती चालीसा के पाठ करने या श्रवण करने मात्र से ही उसकी इस समस्या का शीघ्र ही निवारण हो जाता है इसी के साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी वह उन्नति करता है।

श्री सरस्वती चालीसा हिंदी / Saraswati Chalisa Lyrics in Hindi PDF

॥ दोहा ॥

जनक जननि पद कमल रज,निज मस्तक पर धारि।

बन्दौं मातु सरस्वती,बुद्धि बल दे दातारि॥

पूर्ण जगत में व्याप्त तव,महिमा अमित अनंतु।

रामसागर के पाप को,मातु तुही अब हन्तु॥

॥ चौपाई ॥

जय श्री सकल बुद्धि बलरासी।जय सर्वज्ञ अमर अविनासी॥

जय जय जय वीणाकर धारी।करती सदा सुहंस सवारी॥

रूप चतुर्भुजधारी माता।सकल विश्व अन्दर विख्याता॥

जग में पाप बुद्धि जब होती।जबहि धर्म की फीकी ज्योती॥

तबहि मातु ले निज अवतारा।पाप हीन करती महि तारा॥

बाल्मीकि जी थे बहम ज्ञानी।तव प्रसाद जानै संसारा॥

रामायण जो रचे बनाई।आदि कवी की पदवी पाई॥

कालिदास जो भये विख्याता।तेरी कृपा दृष्टि से माता॥

तुलसी सूर आदि विद्धाना।भये और जो ज्ञानी नाना॥

तिन्हहिं न और रहेउ अवलम्बा।केवल कृपा आपकी अम्बा॥

करहु कृपा सोइ मातु भवानी।दुखित दीन निज दासहि जानी॥

पुत्र करै अपराध बहूता।तेहि न धरइ चित सुन्दर माता॥

राखु लाज जननी अब मेरी।विनय करूं बहु भांति घनेरी॥

मैं अनाथ तेरी अवलंबा।कृपा करउ जय जय जगदंबा॥

मधु कैटभ जो अति बलवाना।बाहुयुद्ध विष्णू ते ठाना॥

समर हजार पांच में घोरा।फिर भी मुख उनसे नहिं मोरा॥

मातु सहाय भई तेहि काला।बुद्धि विपरीत करी खलहाला॥

तेहि ते मृत्यु भई खल केरी।पुरवहु मातु मनोरथ मेरी॥

चंड मुण्ड जो थे विख्याता।छण महुं संहारेउ तेहि माता॥

रक्तबीज से समरथ पापी।सुर-मुनि हृदय धरा सब कांपी॥

काटेउ सिर जिम कदली खम्बा।बार बार बिनवउं जगदंब॥

जग प्रसिद्ध जो शुंभ निशुंभा।छिन में बधे ताहि तू अम्बा॥

भरत-मातु बुधि फेरेउ जाई।रामचन्द्र बनवास कराई॥

एहि विधि रावन वध तुम कीन्हा।सुर नर मुनि सब कहुं सुख दीन्हा॥

को समरथ तव यश गुन गाना।निगम अनादि अनंत बखाना॥

विष्णु रूद्र अज सकहिं न मारी।जिनकी हो तुम रक्षाकारी॥

रक्त दन्तिका और शताक्षी।नाम अपार है दानव भक्षी॥

दुर्गम काज धरा पर कीन्हा।दुर्गा नाम सकल जग लीन्हा॥

दुर्ग आदि हरनी तू माता।कृपा करहु जब जब सुखदाता॥

नृप कोपित जो मारन चाहै।कानन में घेरे मृग नाहै॥

सागर मध्य पोत के भंगे।अति तूफान नहिं कोऊ संगे॥

भूत प्रेत बाधा या दुःख में।हो दरिद्र अथवा संकट में॥

नाम जपे मंगल सब होई।संशय इसमें करइ न कोई॥

पुत्रहीन जो आतुर भाई।सबै छांड़ि पूजें एहि माई॥

करै पाठ नित यह चालीसा।होय पुत्र सुन्दर गुण ईसा॥

धूपादिक नैवेद्य चढावै।संकट रहित अवश्य हो जावै॥

भक्ति मातु की करै हमेशा।निकट न आवै ताहि कलेशा॥

बंदी पाठ करें शत बारा।बंदी पाश दूर हो सारा॥

करहु कृपा भवमुक्ति भवानी।मो कहं दास सदा निज जानी॥

॥ दोहा ॥

माता सूरज कान्ति तव,अंधकार मम रूप।

डूबन ते रक्षा करहु,परूं न मैं भव-कूप॥

बल बुद्धि विद्या देहुं मोहि,सुनहु सरस्वति मातु।

अधम रामसागरहिं तुम,आश्रय देउ पुनातु॥

सरस्वती माता की आरती / Saraswati Aarti in Hindi PDF

जय सरस्वती माता,मैया जय सरस्वती माता।

सदगुण वैभव शालिनी,त्रिभुवन विख्याता॥

जय सरस्वती माता॥

चन्द्रवदनि पद्मासिनि,द्युति मंगलकारी।

सोहे शुभ हंस सवारी,अतुल तेजधारी॥

जय सरस्वती माता॥

बाएं कर में वीणा,दाएं कर माला।

शीश मुकुट मणि सोहे,गल मोतियन माला॥

जय सरस्वती माता॥

देवी शरण जो आए,उनका उद्धार किया।

पैठी मंथरा दासी,रावण संहार किया॥

जय सरस्वती माता॥

विद्या ज्ञान प्रदायिनि,ज्ञान प्रकाश भरो।

मोह अज्ञान और तिमिर का,जग से नाश करो॥

जय सरस्वती माता॥

धूप दीप फल मेवा,माँ स्वीकार करो।

ज्ञानचक्षु दे माता,जग निस्तार करो॥

जय सरस्वती माता॥

माँ सरस्वती की आरती,जो कोई जन गावे।

हितकारी सुखकारीज्ञान भक्ति पावे॥

जय सरस्वती माता॥

जय सरस्वती माता,जय जय सरस्वती माता।

सदगुण वैभव शालिनी,त्रिभुवन विख्याता॥

जय सरस्वती माता॥

सरस्वती चालीसा पढ़ने के लाभ / Saraswati Chalisa Benefits in Hindi

  • इस दिव्य चालीसा के पाठ से व्यक्ति को विद्या, बुद्धि एवं ज्ञान की प्राप्ति होती है।
  • जिस बच्चे का पढ़ाई में मन न लगता हो तो इसके पाठ से उसकी इस समस्या का आसानी से समाधान हो जाता है।
  • सरस्वती चालीसा का पाठ करने से माता सरस्वती जी की कृपा प्राप्त होती है।
  • श्रद्धापूर्वक इस चालीसा का पाठ करने से अज्ञान से मुक्ति मिलती है।
  • श्री सरस्वती चालीसा पाठ नित्य पाठ करने से विद्यार्थियों का मन एकाग्रचित्त होता है, जिससे उसकी हर क्षेत्र में उन्नति होती है।
  • इस दिव्य चालीसा के पाठ से बुध ग्रह मजबूत होता है।
  • श्री मां सरस्वती चालीसा का भक्ति-भाव से पाठ करने से व्यक्ति में तेज बढ़ता है, जिससे उसका समाज में यश व ऐश्वर्य बढ़ता है।

Saraswati Chalisa PDF

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