श्रावण सोमवार व्रत आरती PDF | Sawan Somvar Vrat Aarti PDF in Hindi

श्रावण सोमवार व्रत आरती PDF | Sawan Somvar Vrat Aarti Hindi PDF Download

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श्रावण सोमवार व्रत आरती PDF | Sawan Somvar Vrat Aarti PDF Details
श्रावण सोमवार व्रत आरती PDF | Sawan Somvar Vrat Aarti
PDF Name श्रावण सोमवार व्रत आरती PDF | Sawan Somvar Vrat Aarti PDF
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Language Hindi
CategoryEnglish
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श्रावण सोमवार व्रत आरती PDF | Sawan Somvar Vrat Aarti Hindi

प्रिय पाठक, यदि आप श्रावण सोमवार व्रत आरती PDF / Sawan Somvar Vrat Aarti PDF in Hindi खोज रहे हैं और आप इसे कहीं नहीं ढूंढ पा रहे हैं तो चिंता न करें आप सही पृष्ठ पर हैं। हिंदू धर्म में श्रावण को भगवान शिव का प्रिय महीना माना जाता है। महादेव को समर्पित यह पवित्र महीना चल रहा है। ऐसा माना जाता है कि श्रावण के महीने में हर सोमवार की पूजा करने वाले भक्त को महादेव की कृपा प्राप्त होती है। इस पूरे महीने में देश भर के शिव मंदिरों में भक्तों का तांता लगा रहता है। इस महीने में भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए शिव भक्तों द्वारा विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। साथ ही, श्रावण के महीने में प्रत्येक सोमवार को उपवास रखा जाता है और भगवान शिव की पूजा विधिपूर्वक की जाती है।

श्रावण में सोमवार का व्रत करने से अविवाहित महिलाओं को योग्य वर की प्राप्ति होती है और विवाहित लोगों का दाम्पत्य जीवन सुखमय व्यतीत होता है। श्रावण सोमवार का व्रत करने से मनुष्य के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। इसके अलावा इस दिन पूजा के दौरान शिव शंकर की पूजा करने से भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। नीचे भगवान शिव की आरती दी गई है, यहां से आप हर सोमवार को श्रावण में आरती का पाठ कर सकते हैं….

श्रावण सोमवार व्रत आरती PDF | Sawan Somvar Vrat Aarti PDF in Hindi

||आरती||

जय शिव ओंकारा जय शिव ओंकारा |
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव अर्दाडी धारा || टेक

एकानन, चतुरानन, पंचानन राजे |
हंसानन गरुडासन बर्षवाहन साजै || जय

दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अते सोहै |
तीनो रूप निरखता त्रिभुवन जन मोहै || जय

अक्षयमाला वन माला मुंड माला धारी |
त्रिपुरारी कंसारी वर माला धारो || जय

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे |
सनकादिक ब्रह्मादिक भूतादिक संगे || जय

कर मे श्रेष्ठ कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता |
जग – कर्ता जग – हर्ता जग पालन कर्ता || जय

ब्रह्मा विष्णु सदा शिव जानत अविवेका |
प्रणवाक्षर के मध्य ये तीनो एका || जय

त्रिगुण शिवजी की आरती जो कोई गावे |
कहत शिवानन्द स्वामी सुख सम्पति पावे || जय

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