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शनि अष्टोत्तर शतनामावली | Shani Ashtottara Shatanamavali PDF in Sanskrit

शनि अष्टोत्तर शतनामावली | Shani Ashtottara Shatanamavali Sanskrit PDF Download

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शनि अष्टोत्तर शतनामावली | Shani Ashtottara Shatanamavali PDF Details
शनि अष्टोत्तर शतनामावली | Shani Ashtottara Shatanamavali
PDF Name शनि अष्टोत्तर शतनामावली | Shani Ashtottara Shatanamavali PDF
No. of Pages 6
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Language Sanskrit
CategoryEnglish
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शनि अष्टोत्तर शतनामावली | Shani Ashtottara Shatanamavali Sanskrit

शनिदेव एक न्यायप्रिय देवता हैं। इनकी प्रतिदिन पूजा करने से शीघ्र ही मनुष्य के जीवन में शांति एवं खुशियों का आगमन होता है। माना जाता है कि यदि शनिदेव की पूजा विधि-विधान से की जाए तो हर मनोकामना पूरी हो सकती है। वैसे तो शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए शास्त्रों में अनेक स्त्रोत व मंत्रों की रचना की गई है। उन्ही में से एक है शनि अष्टोत्तर शतनामावली।

शनि अष्टोत्तर शतनामावली में शनिदेव की स्तुति 108 नामों से की गई है। शनि अष्टोत्तर शतनामावली का शनि देव की पूजा में विशेष महत्व है। अगर आप भी शनिदेव की कृपा पाना चाहते हैं तो इन 108 नामों से शनिदेव की पूजा अवश्य करें। इन १०८ नामों के जाप करने से शनिदेव भक्तों पर शीघ्र ही अपनी कृपा करते हैं।

भक्तजनों को श्रद्धापूर्वक शनि स्तुति करनी चाहिए ताकि शनिदेव की कृपा उनपर हमेशा बनी रहे जो भी भक्त शनिदेव का व्रत रखते है उन्हें शनि देव व्रत कथा सुनने के पश्चात ही व्रत खोलना चाहिए। भक्तजनों को शनिवार व्रत पूजा विधि अनुसार करने के बाद शनि आरती  अवश्य करनी चाहिए। शनि अष्टक का निर्मल भाव से गायन करने से शनिदेव अतिप्रशन्न होते हैं और अपने भक्तों को मन चाहा वर देते हैं। महाकाल शनि मृत्युंजय स्तोत्र  एक बहुत ही शक्तिशाली मंत्र है जो की अकाल मृत्यु जैसी भारी विपदा को भी टालने की क्षमता रखता है।

शनि अष्टोत्तर शतनामावली संस्कृत लिरिक्स | Shani Ashtottara Shatanamavali in Sanskrit :

।। शनि अष्टोत्तरशतनामावली ।।

ॐ शनैश्चराय नमः ।

ॐ शान्ताय नमः ।

ॐ सर्वाभीष्टप्रदायिने नमः ।

ॐ शरण्याय नमः ।

ॐ वरेण्याय नमः ।

ॐ सर्वेशाय नमः ।

ॐ सौम्याय नमः ।

ॐ सुरवन्द्याय नमः ।

ॐ सुरलोकविहारिणे नमः ।

ॐ सुखासनोपविष्टाय नमः । १०

ॐ सुन्दराय नमः ।

ॐ घनाय नमः ।

ॐ घनरूपाय नमः ।

ॐ घनाभरणधारिणे नमः ।

ॐ घनसारविलेपाय नमः ।

ॐ खद्योताय नमः ।

ॐ मन्दाय नमः ।

ॐ मन्दचेष्टाय नमः ।

ॐ महनीयगुणात्मने नमः ।

ॐ मर्त्यपावनपदाय नमः । २०

ॐ महेशाय नमः ।

ॐ छायापुत्राय नमः ।

ॐ शर्वाय नमः ।

ॐ शततूणीरधारिणे नमः ।

ॐ चरस्थिरस्वभावाय नमः ।

ॐ अचञ्चलाय नमः ।

ॐ नीलवर्णाय नमः ।

ॐ नित्याय नमः ।

ॐ नीलाञ्जननिभाय नमः ।

ॐ नीलाम्बरविभूशणाय नमः । ३०

ॐ निश्चलाय नमः ।

ॐ वेद्याय नमः ।

ॐ विधिरूपाय नमः ।

ॐ विरोधाधारभूमये नमः ।

ॐ भेदास्पदस्वभावाय नमः ।

ॐ वज्रदेहाय नमः ।

ॐ वैराग्यदाय नमः ।

ॐ वीराय नमः ।

ॐ वीतरोगभयाय नमः ।

ॐ विपत्परम्परेशाय नमः । ४०

ॐ विश्ववन्द्याय नमः ।

ॐ गृध्नवाहाय नमः ।

ॐ गूढाय नमः ।

ॐ कूर्माङ्गाय नमः ।

ॐ कुरूपिणे नमः ।

ॐ कुत्सिताय नमः ।

ॐ गुणाढ्याय नमः ।

ॐ गोचराय नमः ।

ॐ अविद्यामूलनाशाय नमः ।

ॐ विद्याविद्यास्वरूपिणे नमः । ५०

ॐ आयुष्यकारणाय नमः ।

ॐ आपदुद्धर्त्रे नमः ।

ॐ विष्णुभक्ताय नमः ।

ॐ वशिने नमः ।

ॐ विविधागमवेदिने नमः ।

ॐ विधिस्तुत्याय नमः ।

ॐ वन्द्याय नमः ।

ॐ विरूपाक्षाय नमः ।

ॐ वरिष्ठाय नमः ।

ॐ गरिष्ठाय नमः । ६०

ॐ वज्राङ्कुशधराय नमः ।

ॐ वरदाभयहस्ताय नमः ।

ॐ वामनाय नमः ।

ॐ ज्येष्ठापत्नीसमेताय नमः ।

ॐ श्रेष्ठाय नमः ।

ॐ मितभाषिणे नमः ।

ॐ कष्टौघनाशकर्त्रे नमः ।

ॐ पुष्टिदाय नमः ।

ॐ स्तुत्याय नमः ।

ॐ स्तोत्रगम्याय नमः । ७०

ॐ भक्तिवश्याय नमः ।

ॐ भानवे नमः ।

ॐ भानुपुत्राय नमः ।

ॐ भव्याय नमः ।

ॐ पावनाय नमः ।

ॐ धनुर्मण्डलसंस्थाय नमः ।

ॐ धनदाय नमः ।

ॐ धनुष्मते नमः ।

ॐ तनुप्रकाशदेहाय नमः ।

ॐ तामसाय नमः । ८०

ॐ अशेषजनवन्द्याय नमः ।

ॐ विशेशफलदायिने नमः ।

ॐ वशीकृतजनेशाय नमः ।

ॐ पशूनां पतये नमः ।

ॐ खेचराय नमः ।

ॐ खगेशाय नमः ।

ॐ घननीलाम्बराय नमः ।

ॐ काठिन्यमानसाय नमः ।

ॐ आर्यगणस्तुत्याय नमः ।

ॐ नीलच्छत्राय नमः । ९०

ॐ नित्याय नमः ।

ॐ निर्गुणाय नमः ।

ॐ गुणात्मने नमः ।

ॐ निरामयाय नमः ।

ॐ निन्द्याय नमः ।

ॐ वन्दनीयाय नमः ।

ॐ धीराय नमः ।

ॐ दिव्यदेहाय नमः ।

ॐ दीनार्तिहरणाय नमः ।

ॐ दैन्यनाशकराय नमः । १००

ॐ आर्यजनगण्याय नमः ।

ॐ क्रूराय नमः ।

ॐ क्रूरचेष्टाय नमः ।

ॐ कामक्रोधकराय नमः ।

ॐ कलत्रपुत्रशत्रुत्वकारणाय नमः ।

ॐ परिपोषितभक्ताय नमः ।

ॐ परभीतिहराय नमः ।

ॐ भक्तसंघमनोऽभीष्टफलदाय नमः ।

॥ इति शनि अष्टोत्तरशतनामावलिः सम्पूर्णम् ॥

 

शनि अष्टोत्तर शतनामावली के लाभ | Shani Ashtottara Shatanamavali Benefits :

  • इस लाभकारी शनि अष्टोत्तर शतनामावली का भक्तिभाव से पाठ करने पर शनि देव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
  • जिन राशियों पर शनि की ढैया या साढ़ेसाती चल रही है, उन राशियों के जातकों को भी शनि देव के इन दिव्य १०८ नामों का जाप अवश्य करना चाहिए।
  • शनि अष्टोत्तर शतनामावली का नियमित रूप से जाप करने पर मनुष्य की आजीविका सम्बन्धी समस्याओं का शीघ्र ही समाधान होता है।
  • जिन युवाओं को बहुत समय से प्रयास करने पर भी नौकरी मिलने में कठीनाई आ रही है उन्हें सूर्यास्त के पश्चात इस चमत्कारी शनि शतनामावली का पाठ करना चाहिए।
  • यदि किसी व्यक्ति को पुराना जटिल रोग है और उपचार करवाने पर भी ठीक नहीं हो रहा हो, तो शनि अष्टोत्तर का जाप करने से निश्चित ही उस व्यक्ति को शीघ्र ही उस रोग से छुटकारा मिल जायेगा।
  • अगर किसी को बहुत समय से मानसिक पीड़ा का कष्ट उठाना पड़ रहा हो तो अगर वह व्यक्ति इन १०८ नामों का प्रतिदिन श्रद्धापूर्वक जाप करले तो वह अवश्य ही इस कष्ट से छूट जायेगा।

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