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शनि चालीसा PDF | Shani Chalisa PDF in Hindi

शनि चालीसा PDF | Shani Chalisa Hindi PDF Download

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शनि चालीसा PDF | Shani Chalisa PDF Details
शनि चालीसा PDF | Shani Chalisa
PDF Name शनि चालीसा PDF | Shani Chalisa PDF
No. of Pages 8
PDF Size 0.47 MB
Language Hindi
CategoryEnglish
Source pdffile.co.in
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शनि चालीसा PDF | Shani Chalisa Hindi

नमस्कार प्रिय पाठको आज हम आपको इस लेख के माध्यम से शनि चालीसा PDF/ Shani Chanlisha के बारे में जानकारी दे रहे है। जैसा की हमारे हिन्दू धर्म में पौराणिक मान्यताओं के अनुसार अनेको देवी – देवताओ की पूजा की जाती है। उसी प्रकार शनि देव को भी लोग अधिक मान्यता देते है। कहते है की शनि देव न्याय के देवता है। जो भक्त शनि की शनिवार को पूजा व् शनिदेव का व्रत करते है। ईश्वर उनकी मनोकानए पूर्ण करते है और घर में कलह को भी दूर करते है। व्यक्ति के जीवन में चल रहे कष्टों का समापन होता है। भगवन शनि देव को शनिवार के दिन सरसो का तेल से स्नान कराना चाहिए और काले वस्त्र अर्पण करने चाहिए। पूजा की सामग्री सरसो के तेल का दिया, काले तिल,चावल, काला धागा, काले पुष्प, अगरवत्ती, रोली,माचिस, मीठा तेल नैवेद्य मिठाई, रूई के पत्ते कपूर, श्री शनिदेव की तस्वीर, तेल में बनीं पूड़ियां काला उड़द लौंग ,पान-सुपारी गंगाजल या किसी पवित्र सरिता का जल आदि सभी को एक थाल में रखे और श्री शनि देव की चालीसा का गान करे। ऐसा करने से ईश्वर शनि प्रसन्न होते है और भक्तो की मनोकामनाएं पूर्ण करते है। शनि देव भगवान शिव को अपना गुरु मानते थे और साथ ही ये भी कहा जाता है की हनुमान जी की पूजा करने से शनिदेव शांत हो जाते हैं। यदि आपके जीवन में भी कठिन समय चल रहे तो शनि देव की पूजा शनिवार को अवश्य कर सकते है जिससे आपके कष्ट दूर होंगे। शनिदेव की गान के लिए हम इस पीडीऍफ़ के माध्यम से शनि चालीसा प्रदान कर रहे है। जिससे आप शनि चालीसा को डाउनलोड करके प्राप्त कर सकते हो।

शनि देव के व्रत को पूर्ण कर के शनि देव की आरती भी अवश्य करनी चाहिए इससे शनि महाराज बहुत प्रशन्न होते हैं और सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। शनि देव के भक्त उनको प्रशन्न करने के लिए शनि मंत्रो का उच्च्चारण भी करते हैं साथ ही शनि स्तुति भी करते हैं। जो भी भक्त शनिदेव का व्रत रखते है उन्हें शनि देव व्रत कथा सुनने के पश्चात ही व्रत खोलना चाहिए।  शनि अष्टक का निर्मल भाव से गायन करने से शनिदेव अतिप्रशन्न होते हैं और अपने भक्तों को मन चाहा वर देते हैं। महाकाल शनि मृत्युंजय स्तोत्र  एक बहुत ही शक्तिशाली मंत्र है जो की अकाल मृत्यु जैसी भारी विपदा को भी टालने की क्षमता रखता है।

 

श्री शनि चालीसा PDF | Shri Shani Chalisha PDF

दोहा :
जय-जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महराज।
करहुं कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज।

चौपाई:
जयति-जयति शनिदेव दयाला।
करत सदा भक्तन प्रतिपाला।1।
चारि भुजा तन श्याम विराजै।
माथे रतन मुकुट छवि छाजै।।

परम विशाल मनोहर भाला।
टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला।।
कुण्डल श्रवण चमाचम चमकै।
हिये माल मुक्तन मणि दमकै।2।

कर में गदा त्रिशूल कुठारा।
पल विच करैं अरिहिं संहारा।।
पिंगल कृष्णो छाया नन्दन।
यम कोणस्थ रौद्र दुःख भंजन।।

सौरि मन्द शनी दश नामा।
भानु पुत्रा पूजहिं सब कामा।।
जापर प्रभु प्रसन्न हों जाहीं।
रंकहु राउ करें क्षण माहीं।।

पर्वतहूं तृण होई निहारत।
तृणहंू को पर्वत करि डारत।।
राज मिलत बन रामहि दीन्हा।
कैकइहूं की मति हरि लीन्हा।।

बनहूं में मृग कपट दिखाई।
मात जानकी गई चुराई।।
लषणहि शक्ति बिकल करि डारा।
मचि गयो दल में हाहाकारा।।

दियो कीट करि कंचन लंका।
बजि बजरंग वीर की डंका।।

नृप विक्रम पर जब पगु धारा।
चित्रा मयूर निगलि गै हारा।।
हार नौलखा लाग्यो चोरी।
हाथ पैर डरवायो तोरी।।

भारी दशा निकृष्ट दिखाओ।
तेलिहुं घर कोल्हू चलवायौ।।
विनय राग दीपक महं कीन्हो।
तब प्रसन्न प्रभु ह्नै सुख दीन्हों।।

हरिशचन्द्रहुं नृप नारि बिकानी।
आपहुं भरे डोम घर पानी।।
वैसे नल पर दशा सिरानी।
भूंजी मीन कूद गई पानी।।

श्री शकंरहि गहो जब जाई।
पारवती को सती कराई।।
तनि बिलोकत ही करि रीसा।
नभ उड़ि गयो गौरि सुत सीसा।।

पाण्डव पर ह्नै दशा तुम्हारी।
बची द्रोपदी होति उघारी।।
कौरव की भी गति मति मारी।
युद्ध महाभारत करि डारी।।

रवि कहं मुख महं धरि तत्काला।
लेकर कूदि पर्यो पाताला।।
शेष देव लखि विनती लाई।
रवि को मुख ते दियो छुड़ाई।।

वाहन प्रभु के सात सुजाना।
गज दिग्गज गर्दभ मृग स्वाना।।
जम्बुक सिंह आदि नख धारी।
सो फल ज्योतिष कहत पुकारी।।

गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं।
हय ते सुख सम्पत्ति उपजावैं।।
गर्दभहानि करै बहु काजा।
सिंह सिद्धकर राज समाजा।।

जम्बुक बुद्धि नष्ट करि डारै।
मृग दे कष्ट प्राण संहारै।।
जब आवहिं प्रभु स्वान सवारी।
चोरी आदि होय डर भारी।।

तैसहिं चारि चरण यह नामा।
स्वर्ण लोह चांदी अरु ताम्बा।।
लोह चरण पर जब प्रभु आवैं।
धन सम्पत्ति नष्ट करावैं।।

समता ताम्र रजत शुभकारी।
स्वर्ण सर्व सुख मंगल भारी।।
जो यह शनि चरित्रा नित गावै।
कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै।।

अद्भुत नाथ दिखावैं लीला।
करैं शत्राु के नशि बल ढीला।।
जो पंडित सुयोग्य बुलवाई।
विधिवत शनि ग्रह शान्ति कराई।।

पीपल जल शनि-दिवस चढ़ावत।
दीप दान दै बहु सुख पावत।।
कहत राम सुन्दर प्रभु दासा।
शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा।।

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