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शिव तांडव स्तोत्र | Shiv Tandav Lyrics PDF in Hindi

शिव तांडव स्तोत्र | Shiv Tandav Lyrics Hindi PDF Download

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शिव तांडव स्तोत्र | Shiv Tandav Lyrics PDF Details
शिव तांडव स्तोत्र | Shiv Tandav Lyrics
PDF Name शिव तांडव स्तोत्र | Shiv Tandav Lyrics PDF
No. of Pages 4
PDF Size 0.30 MB
Language Hindi
CategoryEnglish
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शिव तांडव स्तोत्र | Shiv Tandav Lyrics Hindi

Dear readers, if you are searching for Shiv Tandav Lyrics PDF and you are unable to find it anywhere then don’t worry you are on the right page. शिव तांडव स्तोत्र की रचना तम रावण ने की है। इसलिए इसे रावण तांडव स्तोत्रम के नाम से भी जाना जाता है। तब भगवान शिव ने अपने अंगूठे से पर्वत को दबा कर पर्वत को स्थिर कर दिया था, जिससे रावण का हाथ पर्वत के नीचे दब गया था।

उस समय रावण ने भगवान शिव की स्तुति की थी और वहां शिव तांडव स्तोत्र की प्रशंसा रावण ने की थी, इसलिए रावण शिव तांडव स्तोत्रम भगवान शिव को बहुत प्रिय माना जाता है। स्रोत बहुत ही चमत्कारी और लाभकारी माना जाता है।

जो भी भक्त रावण रचित शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करते हैं उनसे शिव शंकर भोलेनाथ बहुत प्रशन्न होते है। श्री शिवरामाष्टक स्तोत्रम् स्तोत्र का लगातार 11 बार पाठ करने से व्यक्ति की बुद्धि एवं ज्ञान में विशेष वृद्धि होती है। भक्तजनों को ॐ जय शिव ओमकारा आरती का गायन भी करना चाहिए वैसे भी यह भक्तों की प्रिय आरती है। जो भी शिव जी के बड़े भक्त हैं और महाशिवरात्रि का व्रत रखते है उन्हें इस दिन  विधि अनुसार महा शिवरात्रि अभिषेक भी करना चाहिए। शिव सूत्र ऐसे ग्रंथ हैं जो आध्यात्मिकता के पथ पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं। शिव सहस्रनाम स्तोत्र हिंदू परंपरा में एक प्रकार का भक्तिपूर्ण भजन है जिसमें एक देवता के कई नाम सूचीबद्ध हैं। भोलेनाथ जी की पूजा-अर्चना कर के शिव जी आरती अवश्य करनी चाहिए तभी पूजा सफल होती है।

Shiv Tandav Lyrics PDF in Hindi | शिव तांडव स्तोत्र PDF हिंदी में

जटा टवी गलज्जलप्रवाह पावितस्थले गलेऽव लम्ब्यलम्बितां भुजंगतुंग मालिकाम्‌।

डमड्डमड्डमड्डमन्निनाद वड्डमर्वयं चकारचण्डताण्डवं तनोतु नः शिव: शिवम्‌ ॥१॥

जटाकटा हसंभ्रम भ्रमन्निलिंपनिर्झरी विलोलवीचिवल्लरी विराजमानमूर्धनि।

धगद्धगद्धगज्ज्वल ल्ललाटपट्टपावके किशोरचंद्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं मम: ॥२॥

धराधरेंद्रनंदिनी विलासबन्धुबन्धुर स्फुरद्दिगंतसंतति प्रमोद मानमानसे।

कृपाकटाक्षधोरणी निरुद्धदुर्धरापदि क्वचिद्विगम्बरे मनोविनोदमेतु वस्तुनि ॥३॥

जटाभुजंगपिंगल स्फुरत्फणामणिप्रभा कदंबकुंकुमद्रव प्रलिप्तदिग्व धूमुखे।

मदांधसिंधु रस्फुरत्वगुत्तरीयमेदुरे मनोविनोदद्भुतं बिंभर्तुभूत भर्तरि ॥४॥

सहस्रलोचन प्रभृत्यशेषलेखशेखर प्रसूनधूलिधोरणी विधूसरां घ्रिपीठभूः।

भुजंगराजमालया निबद्धजाटजूटकः श्रियैचिरायजायतां चकोरबंधुशेखरः ॥५॥

ललाटचत्वरज्वल द्धनंजयस्फुलिंगभा निपीतपंच सायकंनम न्निलिंपनायकम्‌।

सुधामयूखलेखया विराजमानशेखरं महाकपालिसंपदे शिरोजटालमस्तुनः ॥६॥

करालभालपट्टिका धगद्धगद्धगज्ज्वल द्धनंजया धरीकृतप्रचंड पंचसायके।

धराधरेंद्रनंदिनी कुचाग्रचित्रपत्र कप्रकल्पनैकशिल्पिनी त्रिलोचनेरतिर्मम ॥७॥

नवीनमेघमंडली निरुद्धदुर्धरस्फुर त्कुहुनिशीथनीतमः प्रबद्धबद्धकन्धरः।

निलिम्पनिर्झरीधरस्तनोतु कृत्तिसिंधुरः कलानिधानबंधुरः श्रियं जगंद्धुरंधरः ॥८॥

प्रफुल्लनीलपंकज प्रपंचकालिमप्रभा विडंबि कंठकंध रारुचि प्रबंधकंधरम्‌।

स्मरच्छिदं पुरच्छिंद भवच्छिदं मखच्छिदं गजच्छिदांधकच्छिदं तमंतकच्छिदं भजे ॥९॥

अखर्वसर्वमंगला कलाकदम्बमंजरी रसप्रवाह माधुरी विजृंभणा मधुव्रतम्‌।

स्मरांतकं पुरातकं भावंतकं मखांतकं गजांतकांधकांतकं तमंतकांतकं भजे ॥१०॥

जयत्वदभ्रविभ्रम भ्रमद्भुजंगमस्फुरद्ध गद्धगद्विनिर्गमत्कराल भाल हव्यवाट्।

धिमिद्धिमिद्धि मिध्वनन्मृदंग तुंगमंगलध्वनिक्रमप्रवर्तित: प्रचण्ड ताण्डवः शिवः ॥११॥

दृषद्विचित्रतल्पयो र्भुजंगमौक्तिकमस्र जोर्गरिष्ठरत्नलोष्ठयोः सुहृद्विपक्षपक्षयोः।

तृणारविंदचक्षुषोः प्रजामहीमहेन्द्रयोः समं प्रवर्तयन्मनः कदा सदाशिवं भजे ॥१२॥

कदा निलिंपनिर्झरी निकुंजकोटरे वसन्‌ विमुक्तदुर्मतिः सदा शिरःस्थमंजलिं वहन्‌।

विमुक्तलोललोचनो ललामभाललग्नकः शिवेति मंत्रमुच्चरन्‌ कदा सुखी भवाम्यहम्‌ ॥१३॥

इमं हि नित्यमेव मुक्तमुक्तमोत्तम स्तवं पठन्स्मरन्‌ ब्रुवन्नरो विशुद्धमेति संततम्‌।

हरे गुरौ सुभक्तिमाशु याति नान्यथागतिं विमोहनं हि देहिनां सुशंकरस्य चिंतनम् ॥१६॥

Shiv Tandav Stotra Path Vidhi | शिव तांडव स्तोत्र पाठ विधि

  • प्रातः काल या प्रदोष काल में इसका पाठ करना सर्वोत्तम होता है।
  • पहले शिव जी को प्रणाम करके उन्हें धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
  • इसके बाद गाकर शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करें।
  • अगर नृत्य के साथ इसका पाठ करें तो सर्वोत्तम होगा।
  • पाठ के बाद शिव जी का ध्यान करें और अपनी प्रार्थना करें।

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