सोमवती अमावस्या व्रत कथा | Somvati Amavasya Vrat Katha PDF in Hindi

सोमवती अमावस्या व्रत कथा | Somvati Amavasya Vrat Katha Hindi PDF Download

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सोमवती अमावस्या व्रत कथा | Somvati Amavasya Vrat Katha PDF Details
सोमवती अमावस्या व्रत कथा | Somvati Amavasya Vrat Katha
PDF Name सोमवती अमावस्या व्रत कथा | Somvati Amavasya Vrat Katha PDF
No. of Pages 6
PDF Size 0.57 MB
Language Hindi
CategoryReligion & Spirituality
Source pdffile.co.in
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सोमवती अमावस्या व्रत कथा | Somvati Amavasya Vrat Katha Hindi

नमस्कार पाठकों, इस लेख के माध्यम से आप सोमवती अमावस्या व्रत कथा PDF / Somvati Amavasya Vrat Katha PDF Hindi प्राप्त कर सकते हैं। हिन्दू वैदिक पंचाङ्ग में अमावस्या तिथि का बहुत अधिक महत्व होता है। अमावस्या तिथि को न केवल व्रत – पूजन अपितु पितृ तर्पण आदि कार्यों के लिए भी सर्वथा उचित माना जाता है। जब अमावस्या तिथि सोमवार के दिन पड़ती है तब उसे सोमवती अमावस्या के नाम से जाना जाता है।

सोमवती अमावस्या का व्रत नियमपूर्वक करने से व्यक्ति अपने जीवन में आने वाले विभिन प्रकार के कष्टों से बच सकता है तथा अपने परिवार के साथ साथ अपने पितृ आदि को प्रसन्न रख सकता है। माना जाता है कि सोमवती अमावस्या के अवसर पर जो भी व्यक्ति पूर्ण भक्तिभाव से तीर्थ स्नान करने के उपरांत दक्षिण दिशा कि ओर तर्पण करता है उसकी कुंडली से समस्त प्रकार के पितृ दोष समाप्त हो जाते हैं।

इस व्रत के प्रभाव से घर में विभिन्न प्रकार के मांगलिक कार्यों का आयोजन होता है। यदि आप भी सोमवती अमावस्या व्रत का सम्पूर्ण लाभ लेना चाहते हैं तो व्रत की पूजा के समय नीचे दिये गयी Somvati Amavasya Vrat Katha in Hindi PDF से सोमवती अमावस्या व्रत कथा का पाठ अवश्य करें।

सोमवती अमावस्या व्रत कथा PDF / Somvati Amavasya Vrat Katha Hindi PDF

एक गरीब ब्राह्मण परिवार था। उस परिवार में पति-पत्नी के अलावा एक पुत्री भी थी। वह पुत्री धीरे-धीरे बड़ी होने लगी। उस पुत्री में समय और बढ़ती उम्र के साथ सभी स्त्रियोचित गुणों का विकास हो रहा था। वह लड़की सुंदर, संस्कारवान एवं गुणवान थी। किंतु गरीब होने के कारण उसका विवाह नहीं हो पा रहा था।

एक दिन उस ब्राह्मण के घर एक साधु महाराज पधारें। वो उस कन्या के सेवाभाव से काफी प्रसन्न हुए। कन्या को लंबी आयु का आशीर्वाद देते हुए साधु ने कहा कि इस कन्या के हथेली में विवाह योग्य रेखा नहीं है। तब ब्राह्मण दम्पति ने साधु से उपाय पूछा, कि कन्या ऐसा क्या करें कि उसके हाथ में विवाह योग बन जाए।

साधु ने कुछ देर विचार करने के बाद अपनी अंतर्दृष्टि से ध्यान करके बताया कि कुछ दूरी पर एक गांव में सोना नाम की धोबिन जाति की एक महिला अपने बेटे और बहू के साथ रहती है, जो बहुत ही आचार-विचार और संस्कार संपन्न तथा पति परायण है। यदि यह कन्या उसकी सेवा करे और वह महिला इसकी शादी में अपने मांग का सिंदूर लगा दें, उसके बाद इस कन्या का विवाह हो तो इस कन्या का वैधव्य योग मिट सकता है। साधु ने यह भी बताया कि वह महिला कहीं आती-जाती नहीं है।

यह बात सुनकर ब्राह्मणी ने अपनी बेटी से धोबिन की सेवा करने की बात कही। अगल दिन कन्या प्रात: काल ही उठ कर सोना धोबिन के घर जाकर, साफ-सफाई और अन्य सारे करके अपने घर वापस आ जाती। एक दिन सोना धोबिन अपनी बहू से पूछती है कि- तुम तो सुबह ही उठकर सारे काम कर लेती हो और पता भी नहीं चलता।

बहू ने कहा- मां जी, मैंने तो सोचा कि आप ही सुबह उठकर सारे काम खुद ही खत्म कर लेती हैं। मैं तो देर से उठती हूं। इस पर दोनों सास-बहू निगरानी करने लगी कि कौन है जो सुबह ही घर का सारा काम करके चला जाता है। कई दिनों के बाद धोबिन ने देखा कि एक कन्या मुंह अंधेरे घर में आती है और सारे काम करने के बाद चली जाती है।

जब वह जाने लगी तो सोना धोबिन उसके पैरों पर गिर पड़ी, पूछने लगी कि आप कौन है और इस तरह छुपकर मेरे घर की चाकरी क्यों करती हैं? तब कन्या ने साधु द्बारा कही गई सारी बात बताई। सोना धोबिन पति परायण थी, उसमें तेज था। वह तैयार हो गई। सोना धोबिन के पति थोड़ा अस्वस्थ थे। उसने अपनी बहू से अपने लौट आने तक घर पर ही रहने को कहा।

सोना धोबिन ने जैसे ही अपने मांग का सिन्दूर उस कन्या की मांग में लगाया, उसका पति मर गया। उसे इस बात का पता चल गया। वह घर से निराजल ही चली थी, यह सोचकर की रास्ते में कहीं पीपल का पेड़ मिलेगा तो उसे भंवरी देकर और उसकी परिक्रमा करके ही जल ग्रहण करेगी। उस दिन सोमवती अमावस्या थी।

ब्राह्मण के घर मिले पूए-पकवान की जगह उसने ईंट के टुकड़ों से 108 बार भंवरी देकर 108 बार पीपल के पेड़ की परिक्रमा की और उसके बाद जल ग्रहण किया। ऐसा करते ही उसके पति के मुर्दा शरीर में वापस जान आ गई। धोबिन का पति वापस जीवित हो उठा। इसीलिए सोमवती अमावस्या के दिन से शुरू करके जो व्यक्ति हर अमावस्या के दिन भंवरी देता है, उसके सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है। पीपल के पेड़ में सभी देवों का वास होता है।

अतः जो व्यक्ति हर अमावस्या को न कर सके, वह सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या के दिन 108 वस्तुओं कि भंवरी देकर सोना धोबिन और गौरी-गणेश का पूजन करता है, उसे अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। ऐसी प्रचलित परंपरा है कि पहली सोमवती अमावस्या के दिन धान, पान, हल्दी, सिंदूर और सुपाड़ी की भंवरी दी जाती है।

उसके बाद की सोमवती अमावस्या को अपने सामर्थ्य के हिसाब से फल, मिठाई, सुहाग सामग्री, खाने की सामग्री इत्यादि की भंवरी दी जाती है और फिर भंवरी पर चढाया गया सामान किसी सुपात्र ब्राह्मण, ननंद या भांजे को दिया जा सकता है।

सोमवती अमावस्या की पूजा विधि / Somvati Amavasya Vrat Katha Hindi PDF

  • ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सभी कामों से निवृत्त होकर स्नान कर लें।
  • सोमवती अमावस्या के दिन गंगा स्नान का अधिक महत्व है। इसलिए गंगा स्नान जरूर करें।
  • अगर आप स्नान करने के लिए नहीं जा पा रहे हैं तो घर में ही नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल डालकर नहा लें।
  • इसके बाद भगवान सूर्य को अर्घ्य दें।
  • भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करना चाहिए।
  • सोमवती अमावस्या के दिन अपनी योग्यता के अनुसार दान जरूर देना चाहिए।
  • पितरों की शांति के लिए तर्पण, श्राद्ध आदि कर सकते हैं।

सोमवती अमावस्या पर न करें ये काम / Do not do on Somvati Amavasya

  • व्रत के दिन देर तक न सोयें बल्कि सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठें।
  • इस दिन किसी भी व्यक्ति का अपमान न करें।
  • बड़ों का अनादर न करें।
  • किसी से कठोर बचन न बोलें।
  • सोमवती अमावस्या व्रत के दिन श्मशान घाट पर न जाएँ. कहा जाता है इस दिन श्मशान घाट पर जाने से आसुरी शक्तियां जागृत होती है जो कि प्रभु के ध्यान और पूजन में बाधा पहुंचाती हैं।
  • इस दिन भूलकर भी मांस, मदिरा और किसी भी प्रकार का मांसाहारी भोजन का सेवन न करें।
  • सोमवती अमावस्या के दिन शारीरिक संबंध न बनाएं।

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