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वरुथिनी एकादशी व्रत कथा | Varuthini Ekadashi Vrat Katha PDF in Hindi

वरुथिनी एकादशी व्रत कथा | Varuthini Ekadashi Vrat Katha Hindi PDF Download

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वरुथिनी एकादशी व्रत कथा | Varuthini Ekadashi Vrat Katha PDF Details
वरुथिनी एकादशी व्रत कथा | Varuthini Ekadashi Vrat Katha
PDF Name वरुथिनी एकादशी व्रत कथा | Varuthini Ekadashi Vrat Katha PDF
No. of Pages 4
PDF Size 0.90 MB
Language Hindi
CategoryEnglish
Source pdffile.co.in
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Tags: If वरुथिनी एकादशी व्रत कथा | Varuthini Ekadashi Vrat Katha is a illigal, abusive or copyright material Report a Violation. We will not be providing its PDF or any source for downloading at any cost.

वरुथिनी एकादशी व्रत कथा | Varuthini Ekadashi Vrat Katha Hindi

नमस्कार मित्रों, आज इस लेख के माध्यम से हम आप सभी के लिए वरुथिनी एकादशी व्रत कथा / Varuthini Ekadashi Vrat Katha PDF प्रदान करने जा रहे हैं। हिन्दू सनातन धर्म में एकादशी व्रत को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। एकादशी का व्रत भगवान विष्णु जी को समर्पित होता है। अनेकों एकादशी की तरह वरूथनी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को अंत समय में मोक्ष की प्राप्ति होती है।

एकादशी व्रत का नियमपूर्वक पालन करने से भगवान विष्णु के भक्तों पर उनकी अत्यंत कृपा होती है। इस व्रत को करने से व्यक्ति के समस्त पापों का नाश हो जाता है और व्यक्ति को सुख समृद्धि एवं शांतिमय जीवन की प्राप्ति होती है। इसलिए अगर आप भी भगवान विष्णु जी का विशेष आशीर्वाद प्राप्त करके अपने जीवन को सुखमय बनाना चाहते हैं तो वरूथनी एकादशी का व्रत पूरे भक्ति -भाव से अवश्य करें।

वरुथिनी एकादशी की व्रत कथा / Varuthini Ekadashi Vrat Katha PDF

  • बहुत समय पहले की बात है नर्मदा किनारे एक राज्य था जिस पर मांधाता नामक राजा राज किया करते थे।
  • राजा बहुत ही पुण्यात्मा थे, अपनी दानशीलता के लिये वे दूर-दूर तक प्रसिद्ध थे। वे तपस्वी भी और भगवान विष्णु के उपासक थे।
  • एक बार राजा जंगल में तपस्या करने के लिये चले गये और एक विशाल वृक्ष के नीचे अपना आसन लगाकर तपस्या आरंभ कर दी वे अभी तपस्या में ही लीन थे कि एक जंगली भालू ने उन पर हमला कर दिया वह उनके पैर को चबाने लगा।
  • लेकिन राजा मान्धाता तपस्या में ही लीन रहे भालू उन्हें घसीट कर ले जाने लगा तो ऐसे में राजा को घबराहट होने लगी, लेकिन उन्होंने तपस्वी धर्म का पालन करते हुए क्रोध नहीं किया और भगवान विष्णु से ही इस संकट से उबारने की गुहार लगाई।
  • भगवान अपने भक्त को संकट में कैसे देख सकते हैं इसीलिए विष्णु भगवान प्रकट हुए और भालू को अपने सुदर्शन चक्र से मार गिराया। लेकिन तब तक भालू राजा के पैर को लगभग पूरा चबा चुका था। राजा बहुत दुखी एवं दर्द में थे।
  • भगवान विष्णु ने कहा वत्स विचलित होने की आवश्यकता नहीं है। वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी जो कि वरुथिनी एकादशी के नाम से जानी जाती है पर मेरे वराह रूप की पजा करना। व्रत के प्रताप से तुम पुन: संपूर्ण अंगो वाले हष्ट-पुष्ट हो जाओगे।
  • भालू ने जो भी तुम्हारे साथ किया यह तुम्हारे पूर्वजन्म के पाप का फल है। इस एकादशी के व्रत से तुम्हें सभी पापों से भी मुक्ति मिल जायेगी।
  • भगवन की आज्ञा मानकर मांधाता ने वैसा ही किया और व्रत का पारण करते ही उसे जैसे नवजीवन मिला हो। वह फिर से हष्ट पुष्ट हो गया। अब राजा और भी अधिक श्रद्धाभाव से भगवद्भक्ति में लीन रहने लगा।

वरुथिनी एकादशी की पूजा विधि / Varuthini Ekadashi Puja Vidhi

  • सर्वप्रथम एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि करके निवृत्त हो जाएँ।
  • इसके बाद साफ सुथरे कपड़े धारण कर लें।
  • अब भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
  • तत्पश्चात एक चौकी पर पीले रंग का कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र को स्थापित कर लें।
  • अब आप चाहे तो पूजा घर में ही जहां चित्र रखा हो वहीं पर रखा रहने दें।
  • इसके बाद भगवान विष्णु को पीले रंग के पुष्प, माला चढ़ाएं।
  • तदोपरान्त भगवान श्री हरी विष्णु जी को पीला चंदन लगाएं।
  • तत्पश्चात भगवान को भोग लगाकर घी का दीपक और धूप जलाएं।
  • इसके बाद विष्णु सहस्त्रनाम पाठ के साथ एकादशी व्रत कथा का पाठ भी कर लें।
  • अंत में भगवान विष्णु जी की विधिवत आरती करें।
  • आरती करने के पश्चात पूरे दिन फलाहार व्रत रहने के बाद द्वादशी के दिन व्रत का पारण कर दें।

बरूथिनी एकादशी पारण / Varuthini Ekadashi Paran Muhurt

वरूथिनी एकादशी मंगलवार, अप्रैल 26, 2022 को
27वाँ अप्रैल को, पारण (व्रत तोड़ने का) समय –  06:41 ए एम से 08:22 ए एम
पारण तिथि के दिन हरि वासर समाप्त होने का समय –  06:41 ए एम
एकादशी तिथि प्रारम्भ –  अप्रैल 26, 2022 को 01:37 ए एम बजे
एकादशी तिथि समाप्त –  अप्रैल 27, 2022 को 12:47 ए एम बजे

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