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Vishnu Bhagwan Ki Vrat Ki Katha
PDF Name Vishnu Bhagwan Ki Vrat Ki Katha PDF
No. of Pages 9
PDF Size 0.97 MB
Language English
CategoryEnglish
Source pdffile.co.in
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Vishnu Bhagwan Ki Vrat Ki Katha

नमस्कार मित्रों, आज इस लेख के माध्यम से हम आपके लिए विष्णु भगवान की व्रत की कथा PDF / Vishnu Bhagwan Ki Vrat Ki Katha PDF प्रदान करने जा रहे हैं। इस कथा को हिन्दू धर्म में बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। यह कथा विष्णु जी को समर्पित है। विष्णु भगवान जी को बृहस्पतिदेव के नाम से भी जाना जाता है।

ऐसा माना जाता है कि इस कथा को पढ़ने एवं श्रवण करने वाले भक्तों की भगवान विष्णु सदैव रक्षा करते हैं। विष्णु जी की इस कथा को बृहस्पति व्रत के अंतर्गत पढ़ा एवं श्रवण किया जाता है। जो भी स्त्री एवं पुरुष सदभावना पूर्वक भगवान विष्णु जी का पूजन एवं व्रत बृहस्पतिवार के दिन श्रद्धापूर्वक करते हैं, तो भगवान विष्णु उनकी सभी मनोकामनाएं शीघ्र ही पूर्ण करते हैं।

विष्णु भगवान की व्रत की कथा PDF / विष्णु भगवान की व्रत की कथा Lyrics

भारतवर्ष में एक प्रतापी और दानी राजा राज्य करता था। वह नित्य गरीबों और ब्राह्मणों की सहायता करता था। यह बात उसकी रानी को अच्छी नहीं लगती थी, वह न ही गरीबों को दान देती, न ही भगवान का पूजन करती थी और राजा को भी दान देने से मना किया करती थी।

एक दिन राजा शिकार खेलने वन को गए हुए थे, तो रानी महल में अकेली थी। उसी समय बृहस्पतिदेव साधु वेष में राजा के महल में भिक्षा के लिए आए और भिक्षा माँगी रानी ने भिक्षा देने से इन्कार किया और कहा: हे साधु महाराज मैं तो दान पुण्य से तंग आ गई हूं। मेरा पति सारा धन लुटाते रहते हैं।

मेरी इच्छा है कि हमारा सारा धन नष्ट हो जाए फिर न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी। साधु ने कहा: देवी तुम तो बड़ी विचित्र हो। धन, सन्तान तो सभी चाहते हैं। पुत्र और लक्ष्मी तो पापी के घर भी होने चाहिए।

यदि तुम्हारे पास अधिक धन है तो भूखों को भोजन दो, प्यासों के लिए प्याऊ बनवाओ, मुसाफिरों के लिए धर्मशालाएं खुलवाओ। जो निर्धन अपनी कुंवारी कन्याओं का विवाह नहीं कर सकते उनका विवाह करा दो। ऐसे और कई काम हैं जिनके करने से तुम्हारा यश लोक-परलोक में फैलेगा।

परन्तु रानी पर उपदेश का कोई प्रभाव न पड़ा। वह बोली: महाराज आप मुझे कुछ न समझाएं। मैं ऐसा धन नहीं चाहती जो हर जगह बाँटती फिरूं। साधु ने उत्तर दिया यदि तुम्हारी ऐसी इच्छा है तो तथास्तु!

तुम ऐसा करना कि बृहस्पतिवार को घर लीपकर पीली मिट्‌टी से अपना सिर धोकर स्नान करना, भट्‌टी चढ़ाकर कपड़े धोना, ऐसा करने से आपका सारा धन नष्ट हो जाएगा। इतना कहकर वह साधु महाराज वहाँ से आलोप हो गये।

साधु के अनुसार कही बातों को पूरा करते हुए रानी को केवल तीन बृहस्पतिवार ही बीते थे, कि उसकी समस्त धन-संपत्ति नष्ट हो गई। भोजन के लिए राजा का परिवार तरसने लगा।

तब एक दिन राजा ने रानी से बोला कि हे रानी, तुम यहीं रहो, मैं दूसरे देश को जाता हूं, क्योंकि यहाँ पर सभी लोग मुझे जानते हैं। इसलिए मैं कोई छोटा कार्य नहीं कर सकता। ऐसा कहकर राजा परदेश चला गया।

वहाँ वह जंगल से लकड़ी काटकर लाता और शहर में बेचता। इस तरह वह अपना जीवन व्यतीत करने लगा। इधर, राजा के परदेश जाते ही रानी और दासी दुःखी रहने लगी।

एक बार जब रानी और दासी को सात दिन तक बिना भोजन के रहना पड़ा, तो रानी ने अपनी दासी से कहा: हे दासी! पास ही के नगर में मेरी बहिन रहती है। वह बड़ी धनवान है। तू उसके पास जा और कुछ ले आ, ताकि थोड़ी-बहुत गुजर-बसर हो जाए। दासी रानी की बहिन के पास गई।

उस दिन गुरुवार था और रानी की बहिन उस समय बृहस्पतिवार व्रत की कथा सुन रही थी। दासी ने रानी की बहिन को अपनी रानी का संदेश दिया, लेकिन रानी की बड़ी बहिन ने कोई उत्तर नहीं दिया। जब दासी को रानी की बहिन से कोई उत्तर नहीं मिला तो वह बहुत दुःखी हुई और उसे क्रोध भी आया। दासी ने वापस आकर रानी को सारी बात बता दी। सुनकर रानी ने अपने भाग्य को कोसा।

उधर, रानी की बहिन ने सोचा कि मेरी बहिन की दासी आई थी, परंतु मैं उससे नहीं बोली, इससे वह बहुत दुःखी हुई होगी। कथा सुनकर और पूजन समाप्त करके वह अपनी बहिन के घर आई और कहने लगी: हे बहिन! मैं बृहस्पतिवार का व्रत कर रही थी। तुम्हारी दासी मेरे घर आई थी परंतु जब तक कथा होती है, तब तक न तो उठते हैं और न ही बोलते हैं, इसलिए मैं नहीं बोली। कहो दासी क्यों गई थी?

रानी बोली: बहिन, तुमसे क्या छिपाऊं, हमारे घर में खाने तक को अनाज नहीं था। ऐसा कहते-कहते रानी की आंखें भर आई। उसने दासी समेत पिछले सात दिनों से भूखे रहने तक की बात अपनी बहिन को विस्तार पूर्वक सुना दी।

रानी की बहिन बोली: देखो बहिन! भगवान बृहस्पतिदेव सबकी मनोकामना को पूर्ण करते हैं। देखो, शायद तुम्हारे घर में अनाज रखा हो।

पहले तो रानी को विश्वास नहीं हुआ पर बहिन के आग्रह करने पर उसने अपनी दासी को अंदर भेजा तो उसे सचमुच अनाज से भरा एक घड़ा मिल गया। यह देखकर दासी को बड़ी हैरानी हुई। Note – कृपया सम्पूर्ण कथा पढ़ने के लिए नीचे दिए डाउनलोड बटन पर क्लिक करें।

विष्णु भगवान के व्रत की विधि / Vishnu Bhagwan Ke Vrat Ki Vidhi

  • बृहस्पतिवार को विष्णु भगवान की पूजा करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि पूजा विधि-विधान के अनुसार हो।
  • गुरुवार के व्रत वाले दिन प्रात: काल उठकर बृहस्पति देव का पूजन बड़े ही श्रद्धा – भाव से करना चाहिए।
  • बृहस्पतिदेव का पूजन पीली वस्तुएं, पीले फूल, चने की दान, पीली मिठाई, पीले चावल आदि का भोग लगाकर किया जाता है।
  • इस व्रत में केले का पूजन ही करें।
  • कथा और पूजन के समय मन, कर्म और वचन से शुद्ध होकर मनोकामना पूर्ति के लिये भगवान विष्णु से प्रार्थना करनी चाहिए।
  • व्रत के दिन में एक समय ही भोजन करें।
  • भोजन चने की दाल आदि का करें, नमक न खा‌एं, पीले वस्त्र पहनें, पीले फलों का प्रयोग करें, पीले चंदन से पूजन करें।
  • पूजन के पश्चात भगवान विष्णु (बृहस्पतिदेव) की कथा पढ़नी अथवा सुननी चाहिये।

विष्णु भगवान की आरती PDF / Vishnu Bhagwan Ki Aarti Lyrics

ॐ जय बृहस्पति देवा
ॐ जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा।
छिन-छिन भोग लगाऊं, कदली फल मेवा।।
ॐ जय बृहस्पति देवा।।
तुम पूर्ण परमात्मा, तुम अंतर्यामी।
जगतपिता जगदीश्वर, तुम सबके स्वामी।।
ॐ जय बृहस्पति देवा।।
चरणामृत निज निर्मल, सब पातक हर्ता।
सकल मनोरथ दायक, कृपा करो भर्ता।।
ॐ जय बृहस्पति देवा।।
तन, मन, धन अर्पण कर, जो जन शरण पड़े।
प्रभु प्रकट तब होकर, आकर द्वार खड़े।।
ॐ जय बृहस्पति देवा।।
दीनदयाल दयानिधि, भक्तन हितकारी।
पाप दोष सब हर्ता, भव बंधन हारी।।
ॐ जय बृहस्पति देवा।।
सकल मनोरथ दायक, सब संशय तारो।
विषय विकार मिटाओ, संतन सुखकारी।।
ॐ जय बृहस्पति देवा।।
जो कोई आरती तेरी प्रेम सहित गावे।
जेष्टानंद बंद सो-सो निश्चय पावे।।
ॐ जय बृहस्पति देवा।।

गुरुवार व्रत में क्या खाना चाहिये?

श्री हरी विष्णु भगवान जी को प्रसन्न करने हेतु जो भक्तगण गुरुवार के दिन व्रत करते हैं, उन्हें व्रत के दिन संध्या के समय ही किसी प्रकार के भोज्य पदार्थ आदि का सेवन करना चाहिए। यद्यपि दिन के समय आप चाय, दूध, जल आदि का सेवन कर सकते हैं। आप दिन में फलों का सेवन भी कर सकते हैं। बृहस्पतिवार के व्रत के समय व्रत रखने वाले व्यक्ति को किसी भी प्रकार के नमक का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

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